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ईवीएम हैकिंग का दावा सच्चा या झूंठा?विषय तो जांच का है। सबसे बड़ा सवाल अगर भाजपा विपक्ष में होती तो क्या करती?

भारत में ईवीएम हैकिंग के सबसे पहले आरोप साल 2009 से लगने शुरू हुए थे। 2009 में कांग्रेस ने चुनाव जीता था जिस पर भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने सवाल उठाए और आरोप लगाया कि कांग्रेस ने ईवीएम से छेड़खानी की है।

ऐसे ही आरोप 2014 के लोकसभा चुनावों के बाद लगने शुरू हुए। आरोपों को बल तब मिला जब यूपी चुनावों में बड़ी तादाद में ईवीएम में खराबी की ख़बर आयी।
सबसे बड़ी बात यूपी चुनाव नोटबन्दी के ठीक बाद आये। नोटबन्दी के बाद पूरे देश में भाजपा सरकार के खिलाफ जनाक्रोश था और इसके बाबजूद भाजपा ने यूपी में जबरदस्त जीत साहिल की। जीत ही नहीं बल्कि ऐतिहासिक जीत हासिल की।
भाजपा लोकसभा चुनावों के बाद जीत पर जीत हासिल करती रही। पंजाब, दिल्ली और बिहार के चुनावों को छोड़ दें, तो जहाँ-जहाँ चुनाव हुए वहां वहां भाजपा ने अपना परचम लहराया।
विपक्ष ने ईवीएम को हटाने की खूब मांग की लेकिन न तो इस पर केंद्र सरकार ने समर्थन किया और न ही चुनाव आयोग ने।
यहां तक कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी खूब सवाल उठे।

आम आदमी पार्टी ने वाकायदा ईवीएम को हैक करके दिखाया कि किस तरह से दूसरी पार्टी को वोट जाता है।

अब एक बार फिर ईवीएम पर सवाल खड़े हो गए हैं। ईवीएम को लेकर लंदन में चल रहे हैकथॉन कार्यक्रम में एक कथित अमेरिकी हैकर ने बड़ा दावा किया है। हैकर ने कहा है कि साल 2014 के लोकसभा चुनाव में उसने बीजेपी के लिए भी हैकिंग की थी। इतना ही नहीं हैकर ने यह भी दावा किया है कि बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री गोपीनाथ मुंडे ने उनकी टीम से हैकिंग कराने के लिए संपर्क किया था।

इतना ही नहीं अमेरिकी हैकर ने ये भी दावा किया है कि साल 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री गोपीनाथ मुंडे की मौत कार हादसे में नहीं हुई थी, बल्कि उनकी हत्या कराई गई थी। हैकर ने कहा है कि गोपीनाथ मुंडे इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन को हैक करने के बारे में जानकारी रखते थे।

हैकर के दावे:

साल 2014 के लोकसभा चुनाव में उसने बीजेपी के लिए भी हैकिंग की थी। हैकिंग के लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री गोपीनाथ मुंडे ने उनकी टीम से संपर्क किया था।

साल 2015 के दिल्ली विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी के पक्ष में ईवीएम की हैकिंग की थी। ट्रांसमीटर के जरिये ईवीएम की हैकिंग हो सकती है। हैकिंग करने के लिए हमारी टीम में 14 लोग हैं।

हैकर के इस खुलासे पर चुनाव आयोग ने कहा है कि ईवीएम हैकिंग का दावा गलत है। चुनाव आयोग चुनाव में जिन ईवीएम का इस्तेमाल करता है, वह पूरी तरह से सुरक्षित है। मशीन तकनीकी विशेषज्ञों की निगरानी में ही तैयार होती है। लंदन में हैकिंग को लेकर आयोजित कार्यक्रम को चुनाव आयोग ने प्रायोजित करार दिया है।

चुनाव आयोग ने यह भी कहा है, ‘भारत में इस्तेमाल की जाने वाली ईवीएम भारत इलेक्ट्रॉनिक ऐंड कॉर्पोरेशल ऑफ इंडिया लिमिटेड की तरफ से बेहद कड़े सुपरविजन में बनाई जाती हैं। साल 2010 में गठित तकनीकी विशेषज्ञों की एक कमिटी की देखरेख में यह पूरा काम होता है। हम इस बात पर भी अलग से विचार करेंगे कि क्या इस मामले पर कोई कानूनी मदद ली जा सकती है?”

आपको बता दें कि बीते दो तीन साल से ईवीएम की हैकिंग का मुद्दा सियासी गलियारों में काफी जोरशोर से उठता रहा है और विपक्षी पार्टियां ईवीएम की हैंकिग का दावा करती रही हैं और उनकी मांग रही है कि ईवीएम की बजाए बैलेट-बॉक्स के जरिए चुनाव कराए जाएं। खास बात ये है कि पहली बार ईवीएम की हैकिंग का मुद्दा साल 2009 में बीजेपी ने उठाया था, जब बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने 2009 में अपनी पार्टी की हार के पीछे ईवीएम की हैकिंग का शक जाहिर किया था।


मनीष कुमार “अंकुर”
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