स्वामी जी द्वारा बताई गयीं ज्ञानवर्धक बातें आपको शायद ही कहीं मिलें। जो बातें, उपाय स्वामी जी आपको बताते हैं वे सभी सिद्ध की हुई चीजें हैं। यह अपूर्व ज्ञान है जो स्वामी जी आपतक पहुंचा रहे हैं।
श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज ने खबर 24 एक्सप्रेस के माध्यम से, सोशल मीडिया के माध्यम से, टीवी चैनल्स के माध्यम से अनंत ज्ञान आप तक पहुंचाया है। और यकीन मानिए आपमें से हज़ारो लोगों को स्वामी जी की बताई बातों और उपायों से फायदा हुआ है और होता है।
स्वामी जी आज तंत्र त्राटक के दूसरे भाग त्रिकाल त्राटक के बारे में आपको विस्तृत जानकारी दे रहे हैं। आप भी इस अनंत ज्ञान का फायदा उठाएं और अपने जीवन में बदलाव लाएं, जीवन को खुशहाल बनाएं।
तंत्र त्राटक (भाग-1) से कैसे प्राप्त करें अन्तर्द्रष्टि, इससे कैसे कर सकते हैं गहन अध्ययन, जानें सब श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज से
तंत्र त्राटक के बारे में पढ़ने के लिए ऊपर दिए गए लिंक पाए क्लिक
त्रिकाल त्राटक योग 【भाग-2】
जिसके निरन्तर अभ्यास से आप मन की तीनों अवस्था-भूतकाल-वर्तमान काल-भविष्यकाल के सन्धिकाल में स्थापित होकर इन्हें देख सकते है।वेसे ये इतना आसान नहीं है।फिर भी त्राटक योग विद्या में इस सब क्रिया विद्याओं की सिद्ध गुरुओं ने अपने शिष्यों के ज्ञान और ध्यान के लिए व्यवस्था की है।और उन्हीं में से एक ये गुप्त त्राटक क्रिया विधि का अनुभव सिद्ध यहाँ वर्णन कर रहा हूँ।
त्रिकालज्ञ त्राटक योग विधि:-
किसी भी आरामदायक अवस्था में आराम से बैठ जाये और अपने सामने के फर्श को खुली आँखों से देखे। इस देखती अवस्था में ही अपनी दोनों आँखें थोड़ी से संकुचित कर ले, जिससे पूरी खुली हुयी आँखों पर तनाव नही पड़ेगा।अब ऐसे थोड़ी देर निरन्तर अपलक देखते हुए ही, अपने और फर्श के बीच में, एक वेक्यूम के द्रश्य वाला, आकाश बन जायेगा। उस आकाश में आपको कुछ कुछ स्पष्ट से अनगिनत स्फुर्लिंग बुलबुले बनते फूटते से दिखाई देंगे और अभी नहीं दिखें तो,कुछ दिन के अभ्यास से अवश्य ही दिखने लगेंगे।
अब इन्हीं पानी के से रंग वाले इन स्फुरुलिंग यानि सतरंगी चमक लिए,आपकी ही द्रष्टि के माध्यम से निकलते आपके ही प्राण ऊर्जा से बने ये बुलबुलों को, पहली किसी भी अवस्था में परिवर्तन किये बिना देखते रहो।धीरे धीरे आगे चलकर, यही स्थिति सर्वाधिक उन्नतिकारक त्राटक विद्या बन जाती है। इस अवस्था में रहने का अधिक विकास करते जाओ और प्रारम्भ में जब भी आँखें थके। तब अपनी आखों को बंद कर ले। और जब तक देखे गए और अनुभव किये,उसी भाग का ध्यान करते रहे।जब तक वो भाव आपके ध्यान में बना रहे,यो तब तक उसी भाव का ध्यान करें।और ऐसा भाव ध्यान की समाप्ति होने पर,फिर से पुनः पहली वाली फर्श को देखते हुए,उस आकाश में तैरते मिटते ऊर्जा बुलबुलों को देखने की त्राटक क्रिया करे। तब आप वो साक्षी महाभाव की अद्धभुत आलोकिकता का प्रत्यक्ष अनुभव त्रिकालज्ञान और समाधि की प्राप्ति करेंगे। जिसका पहले कभी अन्य त्राटक और क्रियायोगो के करने पर दिव्य अनुभव की प्राप्ति नही की होगी।

ठीक इसी स्थिति में आपको अचानक ही किसी परिचित या अपरिचित की स्पष्ट आवाज या बातचीत का कुछ अंश सुनाई पड़ेगा।जिसे सुनकर आपका ध्यान भंग हो जायेगा।ऐसे ही अचानक कोई द्रश्य आपको दिखेगा।अभी ये सब मिक्सप यानि मिश्रित चित्र दिखेंगे।जिनमें भूतकाल या वर्तमानकाल या भविष्यकाल के द्रश्य या आवाज होती है।अभी उनका अनुमान लगाना आसान नहीं होगा।इस त्राटक के बाद आपके सोने के समय दिखे सपने भी बदल जायेंगे।उनमें भी यही सब होगा।और सम्भव है,ध्यान ठीक चला तो,आपको सच्चे आलोकिक दर्शन होने लगेंगे।इसी सबके चलते आप जो संकल्प यानि प्रबल इच्छा करेंगे,ठीक वहीं सपने में दिखेगा।और कभी वहीं त्राटक करते में दिखेगा।अपरिचित चेहरे दिखेंगे।ये वो चित्र है,जो वायुमंडल में से आपके पास से अभी गुजर रहे है।कोई गाना सुनोगे,जो थोड़ी देर बाद ही आपको सच में कहीं या टीवी पे खोलते ही सुनाई देगा।आदि आदि घटनाओं के बढ़ते बढ़ते आपको इस त्रिकाल की सन्धि यानि वीच में स्थिति की जब प्राप्ति होगी, तब आपको पहले सच्चे अनुमान लगाने की भविष्य शक्ति की प्राप्ति होगी।फिर स्वप्न सिद्धि और फिर त्रिकाल दर्शन की सिद्धि होगी।यही इसका क्रम है।यो शीघ्रता नहीं करें।बस नियमित अभ्यास करते रहे।और अवश्य मनवांछित प्राप्ति होगी।
यहाँ मैने इसके विशेष अनुभव नही लिखे है। क्योकि उन्हें पढ़ कर साधक उनकी कल्पना से इस ध्यानयोग को बिगाड़ लेता है। यो बस करो और अवश्य पाओगे।
विशेष:-
स्मरण रहे इसमें किसी भी मंत्र आदि को नही जपना है।क्योकि पहले हमें सभी अनंत पूर्वजन्मों के संकल्पों को मिटाना होता है।जैसे आपके मोबाईल में आने वाले sms के निरन्तर आने पर वो भर जायेगा और नए sms को नहीं ग्रहण करेगा।यो पहले पुरानो को।मिटाना पड़ता है और तभी नए पढ़े और लिख कर भेजे जा सकते है।यही सिद्धांत यहां मन रूपी मोबाईल और अनंत व्यर्थ के द्रश्य रूपी sms है।यो उन्हें पहले पकड़ो और मिटाओ और नए लिखो और देखो।यही त्राटक विद्या का गुरु सूत्र यानि फंडा है।
त्राटक के बाद ठंडे पानी से आँखे जरूर धोते रहना चाहिए।
इससे आगामी लेख (भाग-3) में कोई और त्राटक विद्या के विषय में आपको बताऊंगा।
मेरे दीक्षित शिष्यो को अपनी गुरु प्रदत ध्यान विधि से ही सब समयानुसार प्राप्त होगा।चाहे तो ज्ञान वर्धन के लिए अभ्यास 15 मिनट कर सकते है।
मेरी पुस्तक सन 2002 में प्रमाणिक सचित्रों के साथ प्रकाशित हुयी।जिसे आप इस पते से खरीदकर अध्ययन कर सकते है-“सम्मोहन से योग निंद्रा तक-एक विज्ञानं”
बी.आर.पी.सी.(इंडिया)लि.
4222/1,अंसारी रोड,दरिया गंज,नई दिल्ली-110002
तंत्र त्राटक (भाग-1) से कैसे प्राप्त करें अन्तर्द्रष्टि, इससे कैसे कर सकते हैं गहन अध्ययन, जानें सब श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज से
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अगर आप अपने जीवन में कोई कमी महसूस कर रहे हैं घर में सुख-शांति नहीं मिल रही है? वैवाहिक जीवन में उथल-पुथल मची हुई है? पढ़ाई में ध्यान नहीं लग रहा है? कोई आपके ऊपर तंत्र मंत्र कर रहा है? आपका परिवार खुश नहीं है? धन व्यर्थ के कार्यों में खर्च हो रहा है? घर में बीमारी का वास हो रहा है? पूजा पाठ में मन नहीं लग रहा है?
अगर आप इस तरह की कोई भी समस्या अपने जीवन में महसूस कर रहे हैं तो एक बार श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज के पास जाएं और आपकी समस्या क्षण भर में खत्म हो जाएगी।
माता पूर्णिमाँ देवी की चमत्कारी प्रतिमा या बीज मंत्र मंगाने के लिए, श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज से जुड़ने के लिए या किसी प्रकार की सलाह के लिए संपर्क करें +918923316611
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श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येंद्र जी महाराज
जय सत्य ॐ सिद्धायै नमः
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