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हस्तरेखा विज्ञान (पार्ट 3), हथेली पर गुरु पर्वत का स्थान, मनुष्य के जीवन पर पड़ने वाले इसके शुभ-अशुभ प्रभाव को जानें : श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज

 

 

 

 

हस्तरेखा विज्ञान जो ज्योतिषशास्त्र का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा है, हस्तरेखा विज्ञान से इंसान के जीवन की कुछ गहराइयों को जाना जा सकता है। वैसे तो हाथ की रेखाएं हमारे ग्रहों की चाल व ग्रहदशा के मुताबिक बनती, बदलती रहती हैं। लेकिन हाथ की रेखाएं जीवन में घटने वाली घटनाओं की अनुभूति कराती रहती हैं। बहस इनको जानने वाला चाहिए।

 

 

श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज हस्तरेखा विज्ञान के बारे में पहले ही दो लेखों में काफी वर्णन कर चुके हैं। आज वे “हथेली में गुरु पर्वत का स्थान और उसके प्रभाव” के बारे में उल्लेख कर रहे हैं।

 

हस्तरेखा विज्ञान (भाग 1) : –

 

हस्तरेखा विज्ञान के अद्भुत रहस्य (भाग 2), हस्तरेखा विज्ञान से कैसे होता है स्वास्थ्य का अध्यन, जाने श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज से

 

 

हस्तरेखा विज्ञान (भाग 2) : –

हस्तरेखा विज्ञान के अद्भुत रहस्य (भाग 2), हस्तरेखा विज्ञान से कैसे होता है स्वास्थ्य का अध्यन, जाने श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज से

 

 

 

हथेली मे गुरु पर्वत का स्थान और उसका मनुष्य के जीवन पर पड़ने वाला शुभ अशुभ प्रभाव जाने:-

भारतीय सामुद्रिक शास्त्र जिसमें हस्तेखा विषय में हथेली की रेखाओं से भाग्य-सौभाग्य का विश्लेषण बहुत गहराई तक संभव है।मनुष्य की हथेलियों की विभिन्न रेखाएं और उंगलियों की जड़ यानि निचले भाग में छोटे से उभार लिए हुए क्षेत्र यानि पर्वत से व्यक्ति के मूल स्वभाव, चारित्रिक विशेषता और भुत-वर्तमान और भविष्य के छिपे हुए विश्वनीय तथ्यों को जाना जा सकता है। इस प्रकार से उसके कार्यक्षेत्र के बारे में और उसकी कार्यक्षमता और निपुणता के बारे भी ज्ञान होता है।दोनों हाथों की हथेली में 9 ग्रहों यानि राहु,केतु और चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि और सूर्य क्षेत्र यानि पर्वत होते हैं। इन पर्वतों के उभार और उनके ऊपर मिलने वाली अनेक छोटी रेखाओं,जाल,व्रत,त्रिभुज,त्रिशूल आदि और मुख्य बड़ी रेखाओं के वहाँ से प्रारम्भ और वहाँ पर अंत या टूटना आदि के आधार पर व्यक्ति के जीवन की गन अवगुण या क्षेत्रों में सफलता,विफलता आदि विषय की लगभग सही गणना हो जाती है।
आज का मुख्य हस्तरेखा का ज्ञान विषय है-ब्रह्स्पति या गुरु क्षेत्र या पर्वत-

हथेली मे गुरु पर्वत का महत्व:-

हस्तरेखा विज्ञान में गुरु पर्वत का स्थान मनुष्य के दोनों हाथ की पहली अंगुली यानि तर्जनी ऊँगली और उसके बगल की दूसरी बड़ी अंगुली यानी मध्यमा के बीच का क्षेत्र होता है।और इस गुरु पर्वत के नीचे ह्रदय रेखा का प्रारम्भ या अंत होता है।साथ इस स्थान पर बना उभार हाथ के किनारे से होकर मध्यमा ऊँगली के नीचे तक बनता है। इस पर्वत को नीचे से और हथेली के किनारे और अंगूठे के नीचे से छूती हुई और गुरु और मध्यमा ऊँगली के ठीक नीचे से हथेली के दूसरी और कनिष्ठा के नीचे तक जो रेखा जाती है,वो मस्तिष्क रेखा कहलाती है।गुरु पर्वत के उभार या उन्नत स्थिति के आधार पर ही व्यक्ति के ऊपर गुरु ग्रह की केसी कृपा दृष्टि है, ये अनुमान लगा कर व्यक्ति के जीवन का अच्छा ज्ञान और परिणाम प्राप्त किया जा सकता है।

गुरु पर्वत का प्रभाव:-

किसी भी व्यक्ति का गुरु पर्वत उसके हाथ की ह्रदय रेखा और मस्तिष्क की रेखा के साथ क्या सम्बन्ध है,उससे प्रभावित होता हैं। उसमें धर्म हो या राजनैतिक या सामाजिक हो या परिवारिक पद प्रतिष्ठा और वहाँ शासन करने की क्षमता और नेतृत्व और व्यक्ति के सामान्य प्रेम रिश्ते और दिव्य प्रेम की प्राप्ति और सफलता और वैवाहिक सुख और पुत्र की प्राप्ति या पुत्रियों का भाग्य आदि सभी प्रकार के विकसित या विकास का ज्ञान प्राप्त करता है,साथ ही उसे वैचारिक दृष्टिकोण से सुदृढ़ भी बनाता है।

वेसे उभरे व् ऊंचाई लिए हुए गुरु पर्वत वाले व्यक्ति पद और पैसे के पीछे नहीं भागते हैं, बल्कि उनकी दृष्टि उसकी अंतिम उच्चता पर होती है। वे सभी कार्य को कानूनी और सामाजिक और जातिगत मर्यादा के दायरे में रहकर सफलता से करना पसंद करते हैं। इन्हें अच्छे स्तर के खाने-पीने का भी बहुत शौक होता है तथा वे अपने परिवार हो या अपना समाज से बहुत लगाव रखते हैं।

गुरु पर्वत के उभार से बने चोटी या शिखर का स्वरूप र ढलाव किस पर्वत की और है,ये भी व्यक्ति के ऊपर गुरु ग्रह प्रभाव को दर्शाते हुए उसके गुण-अवगुण को परिभाषित करता है।गुरु पर्वत की छोटी या शिखर के शनि पर्वत की ओर झुके होने पर व्यक्ति में आध्यात्मिकता,योग अभ्यास से सफलता या योगी होना आदि सबंधित विषय में सफलता और उसके जीवन में अनुशासन और गंभीरता आ जाती है, लेकिन जरा से गुरु पर्वत के दबे होने से वह उदासी और एकांतवास जीवन और उपेक्षा के भाव से घिर सकता है। इसी तरह से गुरु पर्वत के हृदय रेखा के पास होने की स्थिति में वह व्यक्ति पारिवारिक दायित्वों के महत्व को समझने और निभाने वाला होता है। यह कहें कि वह परिवार के सदस्यों के लिए कृत संकंल्प होता है। इस उच्च पर्वत के पास या मस्तिष्क रेखा का पास होने पर व्यक्ति की बौद्धिक गतिविधियां बड़ी सुलझी हुयी और तीव्र योजना वाली होती है।
गुरु पर्वत का संबंध उंगली के प्रकार से भी होता है। यदि उभरे गुरु पर्वत वाले व्यक्ति की तर्जनी के लंबी हो तो उसमें लापरवाही के अवगुण आ जाते हैं।ऊँगली नुकीली हो ऐसे लोग राजनीती या किसी भी यूनियन में उच्चता पाने के लिए हत्या करनी या करनी और तानाशाह प्रवृति के भी हो सकते हैं।मध्यमा और तर्जनी के बीच खालीपन हो और पर्वत दबा हो तो ऐसे व्यक्ति को सभी प्रकार की उन्नति करते में लोगो से धोखे और अंत में जीवन को संकट मिलते है या हत्या भी होती है, वैसे तर्जनी के छोटी होने पर ऐसा नहीं होता है। उंगली के टेढ़े मेढ़ी या विकृत होने की स्थिति में वह व्यक्ति काफी धूर्त, पाखंडी या चालाक और स्वार्थी होता है। इसके अतिरिक्त तर्जनी की तीन खंडों में पहले खंड के लंबा होने पर व्यक्ति धर्मपरायण, राजनीतिज्ञ या शि़क्षाविद हो सकता है और यहां खड़ी रेखाएं उसकी प्रसाशनिक या राजनेतिक सहायक मित्रों की संख्या अच्छी होती है और यदि यहाँ पड़ी रेखाएं या कटी फ़टी रेखाएं हो तो उसे उसके मित्रों से धोखा और लाभ नहीं मिलता या प्रेम और पत्नी से सुख नहीं मिलता,पत्नी सदा बीमार रहती है।और पद में अचानक परिवर्तन या लाभकारी पद नहीं मिलते है , जबकि दूसरे खंड के लंबा होने पर उसमें सफल कारोबारी के गुण आ सकते हैं। इसी तरह से तीसरे खंड के लंबा होने पर व्यक्ति स्वादिष्ट व्यंजनों का शौकीन होता है।यहाँ खड़ी रेखाएं अच्छे मित्रों से लाभ बताती है।और ऊँगली के अंत में चक्र हो तो बहुत शुभ या दबे गुरु पर्वत के गुणों को ठीक कर देता है।बिगड़ा चक्र हानि देता है और चक्र या शंख की आक्रति भी शिक्षा और पद से लाभ और नही तो उसका कोई एक पुत्र या पुत्री बहुत उच्चता को प्राप्त होता है।
गुरु पर्वत पर विभिन्न किस्म के चिन्हों, जैसे- त्रिभुज, क्राॅस, बिंदु या तिल, वृत्त, वर्ग, द्वीप, जाल, तारे आदि होने की स्थिति में भी व्यक्ति कई तरह के प्रभाव को अनुभव करता है। वे इस प्रकार हो सकते हैं:-

त्रिभुजः-

गुरु पर्वत पर त्रिभुज बने होने पर व्यक्ति में धर्म या सामजिक क्षेत्र में ज्ञानवर्धक मार्गदर्शन देने या व्यापारिक क्षेत्र में कम्पनियों को मार्गदर्शन देने और कूटनीतिज्ञता के गुण आ जाते हैं और अधिकतर वह अपनी उन्नति के प्रति अतिमहत्वाकांक्षी बन जाता है।जिस कारण कई बार उसमें अपने समकालीन या अनुयायियों के प्रति हद से ज्यादा अभिमान तक आ जाता है और उनके शोषण आदि से वो अपने जीवन में ही अपना सर्वनाश कर बैठता है। और ठीक यही गुण या अवगुण को गुरु पर्वत पर त्रिभुज के अधूरे होने के से ये सभी स्थितियां को भी जीवन में देता है।

वर्गः-

गुरु पर्वत पर आड़ा या तिरछा वर्ग का होना बहुत ही शुभ माना गया है। जिस किसी व्यक्ति की हथेली पर यह होता है, वह उच्च पद को अपनी नवीन योजनाए की बौद्धिकता और योग्यता के बल पर प्राप्त करने में सफल हो जाता है, चाहे वह साधारण कुल या परिवार का ही सदस्य क्यों नहीं रहा हो। ऐसे व्यक्ति कुशल व सफल प्रशासक या प्रसाशनिक अधिकारी बन सकते हैं और अधिकारिक और सार्वजनिक तौर पर सम्मानित किए जाते हैं।

वृत्तः-

यदि किसी व्यक्ति के गुरु पर्वत पर छोटा सा गोल व्रत सा बना हो तो वह अपनी वैचारिक रणनीति पर चलकर अपने प्रयत्नों से उच्च पद को हासिल करने में सफल होता है। ऐसा व्यक्ति को उनके प्रेम से या जीवनसाथी के परिवार यानि सुसराल से सदा सहायता मिलती है।

जालः-

इसका गुरु पर्वत पर कटी फ़टी रेखाओं से जाल बना होना अशुभ होता है, क्योंकि ऐसा व्यक्ति गुप्त षड्यंत्रकारी, घर परिवार और प्रेम या जीवनसाथी को धोखा देना, निर्दयी, स्वार्थी और झुटे अभिमान से भरा होता है।

तारेः-

गुरु पर्वत पर तारे आदि के चिन्ह दिखने का मतलब है,की वह व्यक्ति धर्म हो या आध्यात्मवादी नवीन दर्शन उसके प्राप्ति या उसे रखने के प्रति अति महत्वाकांक्षी है। वह उच्च पद को हासिल कर लेता है और पूरी तरह से पारिवारिक और सामाजिक सरोकार की भावना से भी भरा होता है।नवीन धर्म दर्शन का संस्थापक होता है।

तिलः-

गुरु पर्वत पर सफेद, लाल, पीले या काले रंग के बिंदु या तिल हो सकते हैं। सफेद व्यक्ति की अच्छी उन्नति, लाल तिल रक्त विकार से रोग, पीला तिल रक्ताल्पता के रोग और काला तिल गुप्त तरीकों से धन लक्ष्मी अर्थात धनागमन को दर्शाता है।

क्रासः-

गुरु पर्वत पर क्रास बने होने का अर्थ है-वैवाहिक जीवन सुखमय होता है,पर गुप्त प्रेम सम्बंध बनते है,जो लगभग किसी को पता नही चलते,ये दिव्य प्रेम का भी चिन्ह है,यानि किसी आदर्शवादी कल्पना से प्रेम करना और उस मार्ग पर चलना,प्रेमा भक्ति।और उच्च वैचारिकता को महत्व देना। ऐसे व्यक्ति सोच-विचार कर ही कोई कार्य करते हैं। पर इन्हें प्रेम में धोखे मिलने से प्रेम ज्ञान अनुभव होता है। और जीवनसाथी भी अनुकूल शिक्षा के होते हैं।

द्वीपः-

गुरु पर्वत पर द्वीप बने होने का अर्थ है की व्यक्ति में व्यर्थ की कल्पनाओं से घिरे होकर उसपर कार्य नहीं कर पाने के आत्मविश्वास की कमी को दर्शाता है।

शारीरिक बनावटः-

उन्नत यानि अत्यधिक उभार के गुरु पर्वत वाले व्यक्ति अच्छे व्यक्तित्व वाले होते हैं और उनकी बनावट सुद्रढ़ मांसलता लिए हुए होती है। या कहें इनके शरीर से तंदरुस्ती झलकती है। हालांकि यदि जिस किसी व्यक्ति की हथेली में गुरु पर्वत कम विकसित होता है, वे दुबले-पतले होते हैं।

व्यक्तित्वः-

उभरे हुए अर्थात उन्नत गुरु पर्वत वाले व्यक्ति का व्यक्तित्व काफी आदर्शवादिता, वैचारिकता, व्यवहारिकता और आजाद ख्यालों से भरा होता है। उनमें गजब की बौद्धिकता होती है तथा वे हर कार्य को काफी सोच-विचारकर विवके और बुद्धि के साथ करते हैं। ऐसे व्यक्ति जिनके गुरु पर्वत में उभार अत्यधिक होता है उनमें का नकारात्मक पहलू भी होता है। वे अभिमानी होते हैं और अपने आगे दूसरे को काफी पीछे या कमजोर, यहां तक की तुच्छ समझते हैं।
हालांकि उनमें एक कुशल शासक, शिक्षक, धर्मगुरु, विचारक बनने के तमाम गुण मौजूद होते हैं। इनमें दूसरे के नेतृत्व करने की अद्भुत क्षमता होती है। वे अतिमहत्वाकांक्षी भी होते हैं। दबे हुए पर्वत वाले व्यक्ति का न केवल कामकाज काफी निम्न स्तर का होता है, बल्कि वे निम्न विचारधारा के भी हो सकते हैं और उनसे सहयोग की उम्मीद नहीें कर सकते हैं। यहां तक कि सपाट गुरु पर्वत वालों के संबंध असमाजिक लोगों के साथ हो सकते हैं।

जीवनशैलीः-

ज्यादा विकसित अर्थात उभरे हुए गुरु पर्वत वाले व्यक्ति की जीवन शैली अंधविश्वास यानि तंत्र मंत्र अनुष्ठानों से अपने अनुकूल बनाने की वृति और वैभव पूर्ण दिखावे से भरी होती है। इनकी रूचि जितनी राजनीति में होती है उतनी ही साहित्य में भी होती है,पर वो जनप्रिय हो सकता है,पर नेता नहीं। वैसे अपने अतिविकसित करने के प्रति अतिमाहत्वाकांक्षी होते हैं,यो मुख पर मुस्कान,आँख में अभिमान रखते है और झूठी शान के लिए खर्च करने से नहीं चूकते हैं। वैसे ये परिस्थितियों के अनुसर ढल जाते हैं।

स्वास्थ्यः- किसी भी व्यक्ति के गुरु पर्वत की स्थिति से उसके स्वस्थ होने की स्थिति का पता लगाया जा सकता है। उभरे हुए गुरु पर्वत वाले व्यक्ति व्यक्ति तरहां तरहां के रुचिकर घर या होटल में खाने-पीने के बहुत शौकीन होते हैं,चूँकि खाने पीने का संबंध सीधे पाचन-तंत्र से है।यो इन्हें लीवर में सूजन, अपच से निरन्तर गैस की परेशानी या फिर मोटापे की शिकायत रह सकती है। कमजोर गुरु पर्वत वाले व्यक्ति वायु संबंधी विकारों के होने से पीलिया से ग्रस्त हो सकते हैं या फिर इन्हें मधुमेह और अजीर्ण जैसी बीमारियों हो सकती हैं।

विशेष लाभ के लिए करें ये ध्यान उपाय:-
वेसे तो आपकी जिस भी ऊँगली या उसके ग्रह पर्वत में दोष हो या उसकी महादशा चल रही हो और आपके पास उससे सम्बंधित महंगे रत्न पहने की सामर्थ्य नहीं हो या वे फलित नही हो रहे हो तो, जब भी ध्यान को समय मिले तभी बैठकर अपनी मुठ्टी को सहजता से बन्द करके उस उंगली को सीधा रखें और उसे ऐसा करने से पहले थोडा सहला ले और जब उसमे सहलाने से गर्मी सी अनुभव हो ठीक तभी अपनी मुट्ठी बन्द करके उस ऊँगली को मन ही मन देखते हुए अपना गुरु मन्त्र या उस ग्रह का मंत्र जपते हुए ध्यान करें और अनुभव करें की इसमें आपकी मन की शक्ति इकट्ठी हो रही है और तब यही अनुभव करते रहे।जबतक मन लगे और समयानुसार उठ जाये।तब कुछ ही दिन में आप उस ऊँगली से सम्बंधित लाभकारी चमत्कार देखेंगे और कहेंगे की जय गुरुदेव..

करें ऐसा जप ध्यान जो अपने कहीं नही सुना और देखा होगा और चमत्कार देखे.,

 

 

 

“इस लेख को अधिक से अधिक अपने मित्रों, रिश्तेदारों और शुभचिंतकों को भेजें, पूण्य के भागीदार बनें।”

अगर आप अपने जीवन में कोई कमी महसूस कर रहे हैं? घर में सुख-शांति नहीं मिल रही है? वैवाहिक जीवन में उथल-पुथल मची हुई है? पढ़ाई में ध्यान नहीं लग रहा है? कोई आपके ऊपर तंत्र मंत्र कर रहा है? आपका परिवार खुश नहीं है? धन व्यर्थ के कार्यों में खर्च हो रहा है? घर में बीमारी का वास हो रहा है? पूजा पाठ में मन नहीं लग रहा है?
अगर आप इस तरह की कोई भी समस्या अपने जीवन में महसूस कर रहे हैं तो एक बार श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज के पास जाएं और आपकी समस्या क्षण भर में खत्म हो जाएगी।
माता पूर्णिमाँ देवी की चमत्कारी प्रतिमा या बीज मंत्र मंगाने के लिए, श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज से जुड़ने के लिए या किसी प्रकार की सलाह के लिए संपर्क करें +918923316611

ज्ञान लाभ के लिए श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज के यूटीयूब

https://www.youtube.com/channel/UCOKliI3Eh_7RF1LPpzg7ghA से तुरंत जुड़े।

 

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श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येंद्र जी महाराज

जय सत्य ॐ सिद्धायै नमः


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