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हस्तरेखा विज्ञान के अद्भुत रहस्य (भाग 2), हस्तरेखा विज्ञान से कैसे होता है स्वास्थ्य का अध्यन, जाने श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज से

 

 

 

 

 

“हस्तरेखा विज्ञान के पहले भाग में आपने जाना कि कैसे उंगलियों से जीवन के रहस्य को जाना जा सकता है। इस भाग में हस्तरेखा विज्ञान से आपको स्वास्थ्य जीवन के बारे में जानने को मिलेगा।”

 

 

 

 

हस्तरेखा (भाग 1) के इस रहस्य को जानकर चौक जाएंगे आप, क्या हाथ की उंगली भी बता सकती है किसी का व्यक्तित्व : बता रहे हैं श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येंद्र जी महाराज

 

श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज आज हस्तरेखा विज्ञान के द्वारा “स्वास्थ्य जीवन के बारे में कैसे जाने?” बता रहे हैं। इस रहस्य को जानने के बाद आप जीवन में आने वाली कठिनाइयों से सतर्क हो सकते हैं।

 

 

तो पहले जानते हैं “सामुंद्रिक शास्त्र यानि हस्तरेखा शास्त्र” :-

वैदिक काल समय से लेकर वर्तमान समय तक जो भी उपलब्ध हस्त रेखा शास्त्र है,वो हमारी प्राचीन भारतीय संस्कृति की धरोहर और देन है। जिसका जन्म सामुद्रिक शास्त्र से हुआ है। सामुद्रिक शास्त्र के अंतर्गत मानव शरीर का सभी अर्थो में अध्ययन किया जाता है और उसी के एक शाखा के रूप में हस्तरेखा शास्त्र से हाथों, उन पर बनने वाले विशेष चिन्हों, रेखाओं तथा उंगलियों,अंगूठे व नाखूनों तथा मणिबंध का अध्ययन करके व्यक्ति के जीवन के भूतकाल, वर्तमान काल और भविष्य काल के बारे में जानकारी प्राप्त कर उसका सही और समय पर निदान किया जाता है।

 

हस्त रेखा के अंतर्गत भी हाथ के विभिन्न क्षेत्रों में 9 ग्रहों का वास माना जाता है साथ ही उन पर उपस्थित विभिन्न चिन्हों के माध्यम से अच्छे और बुरे समय का अध्ययन किया जाता है।प्रत्येक व्यक्ति के हाथ में मुख्य रूप से जीवन रेखा, हृदय रेखा, मस्तिष्क रेखा, भाग्य रेखा,स्वस्थ रेखा,मंगल रेखा, विवाह रेखा आदि पाई जाती हैं। इसी के साथ-साथ स्वास्थ्य रेखा जिसका एक स्वरूप अंतरदृष्टि रेखा या व्यापार रेखा भी है,उसे भी देखा जाता है। यह रेखा सभी लोगों के हाथों में नहीं पाई जाती, यदि किसी विशेष रेखा का आपके हाथ में नहीं होना किसी प्रकार की कमी नहीं है अर्थात यदि हाथ में यह रेखा नहीं है तो भी कोई चिंता की बात नहीं है।पर ज्ञान के लिए अवश्य उपयोगी है।

 

स्वास्थ्य रेखा का अध्ययन:-

इस स्वास्थ्य रेखा के स्पष्ट या कटी फ़टी या पीलापन लिए होने के माध्यम से किसी भी व्यक्ति के स्वास्थ्य के बारे में सही जानकारी प्राप्त की जा सकती है और उसको होने वाले रोगों को ज्ञात किया जा सकता है। लेकिन जिन हाथों में यह रेखा नहीं पाई जाती उन हाथों में भी अन्य रेखाओं तथा ग्रहों से संबंधित प्रतीक चिन्हों को देखकर शरीर के रोगों के बारे में जाना जा सकता है।

आपकी हथेली के आधार यानि नीचे की और से यानि चंद्र पर्वत से कनिष्ठिका उंगली यानि बुध पर्वत तक पहुंचने वाली रेखा को स्वास्थ्य रेखा कहते हैं, इसे बुध रेखा भी कहा जाता है।तभी इसे व्यापार रेखा या अतिरिक्त बुद्धि की रेखा भी कहा जाता है।यो इस रेखा के माध्यम से विशेष रुप से व्यक्ति के स्वास्थ्य, उसकी शक्ति, अमाशय तथा यकृत आदि के बारे में जाना जाता है। इस रेखा का उद्गम हथेली के आधार पर किसी भी स्थान से हो सकता है और उसी के आधार पर स्वास्थ्य के बारे में जाना जाता है। मुख्यतोर पर यदि यह रेखा जीवन रेखा अथवा भाग्य रेखा से दूर हो तो ज्यादा शुभता प्रदान करती है।

 

स्वास्थ्य रेखा के अध्ययन से जानें अपना स्वस्थ:-

ये रेखा यदि गहरी और स्पष्ट है तो ये आपके अच्छे पाचन तंत्र को बताती है। ऐसे व्यक्ति अंदर से बहुत स्वस्थ होते हैं और उनमें रोगों से लड़ने की क्षमता अधिक व अच्छी होती है। ऐसे व्यक्तियों की स्मृति और बुद्धि भी तेज होती है और वे अपने व्यवसाय या किसी भी योजना के सभी पहलुओं को जानकर उससे उच्चतम लाभ पाते है।

यदि स्वास्थ्य रेखा आड़ी-तिरछी रेखाओं द्वारा कट रही हो तो आयु के अनुसार स्वास्थ्य संबंधित परेशानियां उत्पन्न करती हैं। यदि यह रेखा जंजीर नुमा है तो जीवन भर पेट से संबंधित बीमारियों का कारण बनती है। विशेष रूप से यदि बुध रेखा पर द्वीप हों या काला धब्बा हो, तो अधिक गंभीर स्वास्थ्य समस्या हो सकती है। ऐसे में आंतों में संक्रमण की बीमारी बनती है।

 

 

“यदि बुध रेखा कट कर लहरदार है तो ऐसे व्यक्तियों को यकृत अथवा पित्त और पथरी संबंधित रोग होने की संभावना अधिक होती है। साथ ही मलेरिया अथवा ज्वर या पीलिया जैसे रोग व्यक्ति को कष्ट देते हैं। यदि इस रेखा पर पीलापन अधिक दिखाई दे तो पीलिया अथवा गुप्त रोग की पूरी संभावना हो सकती है।”

 

 

यदि किसी व्यक्ति की स्वास्थ्य रेखा स्पष्ट हो परंतु जीवन रेखा पतली हो या कहीं से कटी-फटी हो तो ऐसी स्थिति में स्वस्थ रेखा साहयक बनकर व्यक्ति के स्वास्थ्य में सुधार को बताता है। इसी प्रकार यदि मस्तिष्क रेखा कमजोर हो और स्वास्थ्य रेखा अच्छी हो तो स्वास्थ्य रेखा मस्तिष्क संबंधित बीमारियों में भी शुभ फल प्रदान करती है। यदि इसके विपरीत हो तो स्वास्थ्य अधिक खराब रहने की संभावना होती है। विशेष रूप से मस्तिष्क में रुक रुक कर दर्द रहना तथा पेट संबंधी समस्याएं होने की संभावना बढ़ जाती है।

इसी प्रकार ह्रदय रेखा यदि स्वच्छ और स्पष्ट है लेकिन स्वास्थ्य रेखा टूटी-फूटी है तो ह्रदय और जिगर संबंधित समस्याएँ व्यक्ति को परेशान कर सकती हैं।

 

हस्तरेखा शास्त्र में 9 ग्रहों का संबंध हथेली में दिखाया गया है। उनके माध्यम से भी जीवन में होने वाले रोगों के बारे में जाना जा सकता है। आइये जाने की- किन-किन कारणों से कौन-कौन से रोग हो सकते हैं:-

-यदि स्वास्थ्य रेखा पर क्रॉस का चिन्ह हो तो व्यक्ति को मंदाग्नि की पीड़ा रहती है।

-यदि बुध रेखा पर स्पष्ट त्रिभुज का चिन्ह हो तो यह उत्तम स्वास्थ्य का और उच्च पद प्रतिष्ठा का प्रतीक होता है।
यदि मंगल ग्रह के पर्वत पर अधिक रेखाएं हैं तो परिवारिक और सामाजिक कारणों से उत्पन्न तनाव से पेट संबंधित अथवा रक्त संबंधित और शुगर रोग होने की आशंका रहती है।
यदि मंगल पर्वत से निकली हुई रेखाएं जीवन रेखा और मस्तक व् ह्रदय रेखा को काटती हुई शनि पर्वत तक जाए तो व्यक्ति को विधुत, अग्नि कांड अथवा एक्सीडेंट और ऑपरेशन का प्रबल योग रहता है।
यदि उर्ध्व मंगल पर्वत यानि अंगूठे के नीचे भाग पर काले या लाल तिल का चिन्ह हो तो नेत्रों में पीड़ा और मित्र से धन हानि होने की संभावना बढ़ जाती है।
आपकी मस्तिष्क रेखा चंद्र पर्वत पर जाए और अन्य रेखाओं की तुलना में अधिक पतली हो तो आपको बुरे अद्रश्य दर्शन से कष्ट व् उच्च रक्तचाप अथवा पेट संबंधित समस्या होने की संभावना रहती है।
यदि शनि पर्वत पर कटी-फटी रेखाएं उपस्थित हों तो दांतों से संबंधित रोग जैसे पायरिया अथवा गैस वृद्धि की समस्या हो सकती है।आपके धार्मिक कार्यों में विध्न और पितृदोष बनता है।
शनि पर्वत पर जंजीर नुमा रेखाएं हों और मंगल पर्वत पर भी अधिक रेखाएं हो तो व्यक्ति को गठिया जैसी समस्या घेर सकती है।शराब या किसी व्यसन से कष्ट होता है।
मंगल पर्वत पर क्रॉस होना बवासीर का कारण बन सकता है। यदि शनि पर्वत पर भी क्रॉस का चिह्न हो तो यह समस्या और बड़ी हो सकती है।और धोखे से आप पर आरोप लगते है।
यदि जीवन रेखा और मस्तिष्क रेखा आपस में मिलती हो और गुरु पर्वत अविकसित या दबा हो तो गले से संबंधित रोग हो सकते हैं।शिक्षा में विध्न और विवाह संतान होने में निरन्तर बांधाये आती है।
यदि हथेली की स्वास्थ्य रेखा पर नक्षत्र का चिन्ह बना है तो ऐसा जातक संतान प्राप्ति में बाधा उठाता है।और सन्तान के कारण अपयश पाता है।
यदि मस्तिष्क रेखा और स्वास्थ्य रेखा पूर्ण रुप से स्पष्ट हो तो व्यक्ति तीव्र स्मरण शक्ति व् कल्पना शक्ति व् दार्शनिक ज्ञान का स्वामी होता है।
यदि स्वास्थ्य रेखा से कई शाखाएं ऊपर की ओर निकल कर जाएं तो ऐसे व्यक्ति उत्तम स्वास्थ्य व् उसके प्रदर्शन से धन यश का लाभ लेता है।

 

इसके विपरीत यदि शाखाएं नीचे की ओर जाए तो स्वास्थ्य संबंधित परेशानियां लगी रहती हैं।
यदि किसी महिला की जीवन रेखा टूटी-फूटी हो विशेषकर जीवन रेखा के अंत में बिखराव हो तो उसको मासिक धर्म तथा गर्भाशय संबंधित रोग होने की संभावना अधिक होती है।
शनि पर्वत पर क्रॉस का चिन्ह बांझपन जैसी समस्याएं दे सकता है। यदि जाल बना हुआ हो तो व्यक्ति में आत्महत्या की प्रवृत्ति बढ़ाती है तथा यदि वृत्त बना हुआ है तो किसी ज़हर से कष्ट अथवा सांप के काटने की संभावना बढ़ जाती है।और वहाँ अर्द्ध चन्द्र रेखा हो,तो व्यक्ति अपने पद प्रतिष्ठा को व्यर्थ की योजना और नीच पुरुष या स्त्री की संगत के कारण बार बार हानि पहुँचाता है।
सूर्य पर्वत पर जाल का निशान मानसिक विकास तथा मानहानि देता है।और संतान व् बड़े अधिकारी से हानि पाता है।
बुध पर्वत पर तारे का चिन्ह अच्छे स्वास्थ्य का प्रतीक होता है। वहीं दूसरी ओर क्रॉस का चिन्ह त्वचा रोग, जाल तथा तिल का होना भी त्वचा रोग दे सकता है।और वहां खड़ी अनेक रेखाएं धन लाभ देती है और बुध पर्वत पर द्वीप होना बुरे स्वास्थ्य का द्योतक है लेकिन यदि वृत्त बना है तो उत्तम स्वास्थ और किसी बड़ी योजना से लाभ देने में सक्षम होता है।
चंद्र पर्वत पर क्रॉस का चिन्ह भुत प्रेत,गुप्त शत्रु से अज्ञात भय, जल से भय, मूत्र अंडकोष संबंधित रोग के संकेत देता है।
चंद्र पर्वत पर बिंदु पथरी व् जाल मिर्गी रोग, दीप आत्महत्या की प्रवृत्ति, भय और निराशावादी, नींद में चलना, डिप्रेशन आदि परेशानियों को बना देता है।
मंगल पर्वत पर क्रॉस का चिन्ह चोर से और छत्त से गिरकर शारीरिक चोट, जाल का चिन्ह परिवारिक कलह से अशांति, बार बार दवाई खाकर आत्महत्या की कोशिश तथा काला या लाल तिल का चिन्ह रक्तचाप संबंधित अनियमितता, अंग-भंग, झगड़े में अस्त्र से चोट लगने जैसे कारण बनाता है।
शुक्र पर्वत पर क्रॉस का चिन्ह गुप्त सम्बंधों से गुप्त रोग, जाल का चिन्ह जादू टोन या बिन देखे दवाई खाने से फ़ूड पॉइजनिंग से स्वास्थ्य हानि, तिल का चिन्ह सुजाक, गुप्त रोग, जल से भय, वृत्त का चिन्ह दुर्घटना में अंग-भंग, शुक्राणुओं की कमी संबंधी रोग तथा बच्चेदानी के रोगों को जन्म देता है।
राहु पर्वत जो मस्तिष्क और ह्रदय रेखा के बीच के क्षेत्र में क्रॉस का चिन्ह से जादू टोन टोटके से दीर्घ कालिक बीमारी, जाल का चिन्ह अवसाद व उन्माद, मस्तिष्क रोग, मतिभ्रम, तिल का चिह्न हो तो रक्त-विकार जैसी समस्याएं देता है।
केतु पर्वत यानि चन्द्र पर्वत से ऊपर के भाग में क्रॉस का चिन्ह से माता के गर्भ से और बचपन में बीमारियां, जाल का चिन्ह अनेक प्रकार के बुखार से उत्पन्न बीमारियां, लाल तिल का चिन्ह चेचक जैसे रोग तथा द्वीप का चिन्ह लम्बी जेल होनी व शारीरिक कमजोरी तथा बीमारियों का द्योतक है।
अत्यधिक विकसित गुरु पर्वत से अहंकार व्रद्धि और आलस्य से मोटापे की समस्या उत्पन्न हो सकती है। घबराहट से अपच और मधुमेह जैसी बीमारियां और प्रेम सम्बंधों में धोखे और पुरुष लिंग या स्त्री योनि में निर्बलता गुरु पर्वत के दबे होने या वहां पहुँच कर ह्रदय रेखा मस्तिष्क रेखा की और गिरती जाने के कारण होती हैं। इसके अतिरिक्त गुरु पर्वत के द्वारा लिवर में गड़बड़ी से शरीर पर आने वाली सूजन का भी जाना जाता है।
यदि आपके हाथों के नाखून साफ सुथरे और स्पष्ट हैं तो यह अच्छे स्वास्थ्य की ओर इंगित करते हैं।
उन पर चन्द्र के चिन्ह बने है,तो बहुत ही शुभ होता है।ये रोग प्रतिरोधक शक्ति और अतिरिक्त विद्या बल,गुण को बताते है।
यदि शनि पर्वत दबा हुआ अविकसित हो और गुरु पर्वत भी उन्नत ना हो तो व्यक्ति को गर्मी सर्दी से गठिया तथा जोड़ों के दर्द की समस्या या फिर गर्म ठंडे खाने से गैस से संबंधित समस्या उत्पन्न होती है।

इस संछिप्त लेख के माध्यम से आपके शरीर में होने वाले विभिन्न प्रकार के रोगों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं और उन कारणों को जानकर संबंधित उपाय करके उन रोगों से बचाव कर सकते हैं।

 

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श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येंद्र जी महाराज

जय सत्य ॐ सिद्धायै नमः

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