कासगंज के बवाल की हकीकत जानने के लिए ये वीडियो देखें
दंगों के देश में आपका स्वागत है। यहां पर जरा सी एक चिंगारी शोला बन जाती है। यहां अब बात-बात और लोगों की भावनाएं भड़क जाती हैं। उनकी भावनाएं इस कदर कमजोर हो गयी हैं कि सोचने का मौका भी नहीं मिलता और तब तक सब कुछ जल चुका होता है।

सोशल मीडिया में आग में घी डालने का काम कर रहे लोग…
यहां पर जैसे ही दंगों की शुरुआत हुई उसी पल समझ लीजिए कि चुनाव बेहद नज़दीक हैं। अभी करणी सेना का तांडव खत्म भी नहीं हुआ था कि एक और शुरू हो गया।
मैं बात कर रहा हूँ यूपी के एक छोटे से जिले कासगंज की जहां पर 26 जनवरी को एक ऐसी आग भड़की कि इस आग ने 1 लड़के की बलि ले ली। इसके अलावा इस आग ने न जाने कितनों के रोजगार छीन लिए।

लेकिन ये दंगा हुआ कैसे? कासगंज में जो कुछ बवाल हुआ मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सोची समझी साजिश के तहत हुआ है। चुनाव नजदीक हैं… हिन्दू मुस्लिम कार्ड खेलना बेहद जरूरी है वरना जनता काम की रिपोर्ट मांगेगी। और ऐसे में काम की रिपोर्ट देना संभव नहीं है। चुनाव तो जीतना ही है। और वो भी लोकसभा चुनाव।
जो बेहद कीमती होते हैं और 5 साल में एक बार आते हैं। तो इन कीमती चुनावों के लिए किसी की मौत हो जाये या कुछ लोग मर भी जाएं तो कोई गम नहीं। क्योंकि इंसान की कीमत चुनाव जीतने से ज्यादा नहीं हो सकती है।
इन्हीं चुनावों के चलते करणी सेना ने देशभर में तांडव मचाया हुआ था, राजस्थान में चुनाव आने वाले हैं और जल्दी से अपना नाम करना है तो दंगे करा दो… बस फिर देखो कैसे जल्दी से नेता बनते हैं।
क्योंकि जिस बात को लेकर करणी सेना ने राजस्थान में ताडंव किया उसकी आग देशभर में तो लगी लेकिन… लेकिन निकला कुछ नहीं। वैसे ही अब ये कासगंज दंगे हैं। यहां पर जिस चंदन की मौत हुई है असल में वो दंगे की भेंट नहीं चढ़ा। बल्कि उस बच्चे की हत्या कराई गई है, ताकि चुनाव जीतने में आसानी हो। यानि चुनाव जीतने के लिए एक बच्चे की बलि ले ली गयी।
कासगंज में जिस जगह इन दंगों की शुरुआत हुई वहां सीसीटीवी के कुछ वीडियो फुटेज मिले जिन्हें देखकर साफ लग रहा है कि वहाँ पर मुसलमान झंडा फहराने की तैयारी कर रहे थे और ठीक उसी जगह से एक हिन्दू संगठन के युवा बाइक रैली निकालना चाह रहे थे। अब चूंकि वह इलाका मुस्लिम बहुल इलाका है और वहां चौराहे पर पहले से ही मुस्लिम संगठन के लोग झंडा फहराने की तैयारी कर रहे थे। इसीलिए उन्होंने 26 जनवरी के उपलक्ष्य में रास्ते में कुर्सियां बिछाई हुई थीं और वो सब मिलकर झंडा फहराने की तैयारी में थे। रास्ता बंद देखकर ऐसे में ये सभी नौजवान भड़क गए, और नारेबाजी शुरू कर दी।.. बस फिर क्या था… दोनों पक्षों को खून की गर्मी दिखानी थी.. आगे आप सब समझदार हैं।
दंगा हुआ है। एक बच्चे की मौत हुई है। हिन्दू बच्चे की मौत। तो एक मुसलमान बच्चे को भी गोली लगी है। मरे किसी भी तरफ से फायदा सिर्फ राजनीतिक होता है। और कोक माँ की सूनी होती है।
जब मामले की गहनता से छानबीन हुई, तो देखा कि यह दंगा भी बोगस निकला। और नेता दंगे की आग में बस घी डालते नज़र आये। यह हम नहीं बल्कि पुलिस रिपोर्ट और उस इलाके से मिली सीसीटीवी फुटेज गवाही दे रही है। और हां सबसे विशेष बात। ABVP से जुड़े युवा बाइक पर तिरंगा यात्रा नहीं बल्कि भगवा यात्रा निकाल रहे थे क्योंकि तिरंगा यात्रा में भगवा झंडे का क्या काम?
इसके अलावा कासगंज में जो दंगा हुआ वो तिरंगे या भारत माता के नारों को लेकर नहीं बल्कि “मुल्लों का एक ही स्थान-पाकिस्तान या कब्रिस्तान” तथा ” हिंदुस्तान में रहना होगा तो जय श्रीराम कहना होगा” जैसे नारे थे। इसमें एक गैर हिन्दू को पकड़ कर ABVP के कार्यकर्ताओं ने जबरदस्ती “जय श्री राम” के नारे लगाने के लिए पीटा भी गया जिसका विरोध करने पर दंगा हुया। इस पर पुलिस द्वारा फायरिंग करने से एक हिन्दू लड़का मारा गया तथा दो मुसलमान लड़के घायल हुए। यह जुलूस VHP और ABVP द्वारा निकाला जा रहा था।
कासगंज फुकता गया। जलता गया। और नेताओं ने उस भाईचारे को आग लगा दी जिस भाईचारे की कसमें हमारे पूर्वज खाया करते थे।
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#मनीष_कुमार
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