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अगर केंद्र सरकार शहीदों के बच्चों की शिक्षा का खर्च भी नहीं उठा सकती तो हम तैयार हैं: कैप्टन अमरिंदर सिंह

 

 

 

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है उन्होंने कहा कि क्या सरकार हमारे भारतीय जवानों के बच्चों की शिक्षा का खर्च भी नहीं उठा सकती है। सेना के बहादुर जवान सीमा की रक्षा करते हुए अपनी जान गँवा देते हैं हम बदले में उनको क्या देते हैं?
उन्होंने सरकार से सवाल किया कि क्या हम इतने खुदगर्ज हो गए हैं कि हमारे जवानों के बच्चे हमसे कोई आशा तक नहीं कर सकते हैं? हम किस बात की देशभक्ति दिखाते हैं? क्यों ढकोसला करते हैं देशभक्ति का?

आपको बता दें कि कैप्टन अमरिंदर सिंह ने शहीद और कार्रवाई के दौरान अपंग हुए फौजियों के बच्चों को शिक्षा का पूरा ख़र्च देने की पेशकश की है। उन्होंने यह भी वायदा किया कि अगर केंद्र में कांग्रेस सत्ता में आई तो पूर्व फौजियो के कल्याण के लिए हर संभव यत्न किये जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर मैं स्थिति में हुआ तो आवश्यक रूप से मौजूदा रुझान को बदल दूंगा। उन्होंने कहा कि पूर्व फ़ौजी यह सोचते हैं कि सरकार को उन के लिए जो करना चाहिए, वह नहीं कर रही। उन्होंने कहा कि वह तो शहीद होने वाले फौजियों के लिए छोटी सी मदद मांग रहे हैं।
कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इस महीने के शुरू में रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण को एक पत्र लिखा था और शहीद सैनिकों के बच्चों की पढ़ाई पर खर्च की सीमा लागाने के फ़ैसले को वापिस लेने के लिए अपील की थी। इसको उन्होंने फौजियों के साथ सौतेली मां वाला सलूक बताया था। इस फ़ैसले से परेशान हुए मुख्यमंत्री ने कहा था कि इसके साथ विभिन्न शिक्षा संस्थायों में पढ़ रहे 32000 विद्यार्थियों पर बुरा प्रभाव पड़ेगा। जबकि इस फ़ैसले के साथ सरकार का सिर्फ तीन करोड़ रुपए सालाना बचेगा। उन्होंने इस फ़ैसले को तत्काल वापिस लेने की माँग की थी। इसके साथ ही उन्होंने यह फ़ैसला अनैतिक और ग़ैर-सैद्धांतिक बताया था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर केंद्र शहीद फौजियों के बच्चों की पढ़ाई के लिए यह तुच्छ राशि नहीं दे सकती तो पंजाब सरकार यह देने को तैयार है। उन्होंने कहा कि उन्होंने इस बारे केंद्र सरकार को अवगत करवा दिया है परंतु उन्होंने इस पेशकश को अभी स्वीकृति नहीं भरी। शहीद फौजियों और कार्यवाही दौरान बेकार हुए फौजियों द्वारा देश के लिए दिए जाते महान योगदान के एवज़ में उनके बच्चों की शिक्षा के लिए फीस का तुच्छ भुगतान किया जाता है।

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