
भारत में आदमखोर कितने बढ़ते जा रहे हैं इसको शायद बताने की जरुरत नहीं है। यहाँ हैवान बेफिक्र होकर मासूम बच्चियों को निशाना बनाते हैं। इन हैवानों को न तो पुलिस का कोई डर है ना किसी सजा का।
भारत में आये दिन न जाने कितने असंख्यक रेप होते हैं लेकिन सबसे ज्यादा शर्मसार कर देने वाली घटना छोटी मासूम बच्चियों के साथ होती है। वो बच्चियां जिन्हें ये तक नहीं पता कि अच्छा क्या है और बुरा क्या होता है। भारत में किसी लड़की का जन्म लेना और इसके बाद उसका सुरक्षित रहना माँ बाप की चिंता का सबसे बड़ा विषय होता है।
एक ऐसी ही इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटना महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित प्रदेश हरियाणा से आई। हैवानों ने हैवानियत की सभी हदें पार करते हुए हिसार में 5 साल की नन्ही मासूम के साथ निर्भया जैसी दरिंदगी की। बच्ची शुक्रवार रात साढ़े नौ बजे मां और बड़ी बहन के साथ सोई थी। सुबह उसका शव घर से 250 मीटर दूर गली में नग्न हालत में खून से लथपथ मिला। इस कांड ने 16 दिसंबर 2012 को दिल्ली में हुए इंसानियत को झकझोर देने वाले ‘निर्भया कांड’ की यादें ताजा कर दी हैं। घटना के विरोध में गुस्साए लोगों ने बाजार बंद करवाकर पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की।
डॉक्टरों के अनुसार बच्ची के प्राइवेट पार्ट में दो फीट की लकड़ी डालने की वजह से गहरे जख्म थे। दुष्कर्म की पुष्टि के लिए करनाल के मधुबन स्थित फॉरेंसिक लैब में सैंपल भेजे गए हैं। बच्ची के कंधे, माथे और पीठ पर खरोंचे थीं। वहीं, जमीन पर पटकने की वजह से नाक से भी खून बह रहा था। आरोपी की गिरफ्तारी के लिए सीएम ने पुलिस की स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) गठित करने के निर्देश दिए। एसपी मनीषा चौधरी ने डीएसपी बरवाला जयपाल सिंह के नेतृत्व में 4 सदस्यीय एसआईटी गठित की है। पुलिस ने संदेह के आधार पर तीन लोगों को हिरासत में लिया है।
दो महिला चिकित्सकों डॉ. ऋतु गुप्ता और डॉ. मीना मलिक ने बच्ची के शव का पोस्टमार्टम किया। दो घंटे तक चले पोस्टमार्टम के बाद रिपोर्ट तैयार की गई। इसमें बच्ची की मौत दरिंदगी के दौरान लगे शॉक से होना बताया है।फॉरेंसिक एक्सपर्ट की टीम ने भी घटनास्थल पर जांच की। झुग्गी के बाहर पैरों के निशान मिले हैं। साथ ही डॉग स्क्वायड भी मौके पर बुलाया गया। डॉग स्क्वायड झुग्गी से घटनास्थल तक ही गया।
बच्ची के परिजनों ने बताया कि उनका परिवार 10-12 साल से यहां रह रहा है। वे मेहनत मजदूरी कर गुजारा करते हैं। बच्ची की मां ने बताया कि रात में उन्हें कोई आहट या शोर नहीं सुनाई दिया। सुबह चाय देने के लिए जब बच्चियों को बुलाया तो एक बच्ची गायब मिली। खोजबीन शुरू की गई।
किसी बने बताया कि पास ही गली में बच्ची की लाश पड़ी है।
अब सबसे बड़ा सवाल उठता है कि भारत में बच्चियों से कब तक ऐसी हैवानियत होती रहेगी? मासूम कब तक यूँ अपनी जान गँवाती रहेंगी और हमारी सरकार सोती रहेगी। नेता वायदे तो बड़े-बड़े करते हैं लेकिन जब हैवान पकड़ में आते हैं तो उन्हें बचाने के लिए भी वही सबसे आगे होते हैं।
हम बड़ी शान से भारत को अपनी माता कहते हैं और यही भारत का सबसे बड़ा दुर्भाग्य है।
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खबर 24 एक्सप्रेस
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