
क्या नीतीश सरकार इस वक़्त संकट में है? तो सूत्रों पर यकीन किया जाए तो “हाँ” है। इस वक़्त नीतीश सरकार संकट में है और अगर जल्दी ही कुछ नही किया गया तो अल्पमत में भी होगी।
इस वक़्त नीतीश कुमार को 131 विधायकों का समर्थन प्राप्त है जो बहुमत से 9 ज्यादा है। लेकिन जेडीयू के बड़े और वरिष्ठ नेता शरद यादव की नाराजगी की वजह से ये संख्या घट सकती है और नीतीश की सरकार को अल्पमत में ला सकती है।
ख़बर 24 एक्सप्रेस ने इस ख़बर की भविष्यवाणी उसी वक़्त कर दी थी जब नीतीश महागठबंधन से अलग हुए थे। वरिष्ठ पत्रकार एस.एन. विनोद जी ने भी कहा था कि शरद यादव राजनीतिक बेइज्जती बर्दास्त नहीं कर सकते हैं। वो कुछ न कुछ ऐसा कदम उठा सकते हैं जो शरद यादव की राजनीतिक साख को बचाये रखे।
गठबंधन टूटने की भविष्यवाणी, इस वीडियो में जरूर देखें
नीतीश कुमार के द्वारा महागठबंधन तोड़ने और भाजपा के साथ जाने पर ख़बर 24 एक्सप्रेस ने कई बार कहा कि बिहार में जनता दल यूनाइटेड दो हिस्सों में बँट सकती है क्योंकि एक बड़ा धड़ा गठबंधन टूटने से नाराज था और इससे भी ज्यादा नाराजगी नीतीश की भाजपा के साथ जाने से हुई है।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और जेडीयू के वरिष्ठ नेता शरद यादव के बीच ‘मतभेद ‘ की खबरों के बीच समाजवादी नेता विजय वर्मा ने शरद के एक नई पार्टी बनाने के संकेत दिए हैं। शरद यादव के विश्वस्त माने जाने वाले और दो बार बिहार विधान परिषद सदस्य रहे विजय वर्मा ने शरद के महागठबंधन में बने रहने के लिए एक नई पार्टी बनाने के संकेत दिए हैं।
आपको बता दें कि बिहार के कई नेता जेडीयू के बड़े और वरिष्ठ नेता शरद यादव से संपर्क बनाए हुए थे और सभी विकल्पों पर चर्चा कर रहे थे। सूत्रों के मुताबिक शरद यादव महागठबंधन का हिस्सा बना रहना चाहते हैं और इसीलिए वे दूसरी पार्टी का गठन कर रहे हैं जिससे कि राजनीति की गिरती साख को बचाया का सके।

सूत्रों के मुताबिक शरद यादव पुराने साथियों के संपर्क में हैं और राजनीतिक हालात पर विचार कर रहे हैं। शरद यादव के एक करीबी नेता ने कहा कि नए दल का गठन एक विकल्प है और उस पर संजीदगी से विचार किया जा रहा है।उन्होंने दावा किया कि शरद यादव ने जोर देकर कहा है कि वह धर्मनिरपेक्ष शक्ति वाले महागठबंधन में बने रहेंगे।
उन्होंने कहा कि शरद ने एनडीए सरकार में मंत्री के तौर पर शामिल होने से इनकार कर दिया है। यह पूछे जाने पर कि अन्य किन-किन लोगों से शरद यादव की बातचीत हुई है, लेकिन जेडीयू के इस नेता ने नाम का खुलासा करने से इनकार करते हुए कहा कि उनका सोशल नेटवर्क बहुत बड़ा है।
31 जुलाई को संसद के बाहर शरद ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा था कि जनादेश इसके लिए नहीं था और महागठबंधन के बिखरने को अप्रिय और दुर्भाग्यपूर्ण बताया था।
जेडीयू के दो सांसदों अली अनवर और वीरेंद्र कुमार ने शरद से मुलाकात की थी। दोनों ने बीजेपी के साथ जाने के निर्णय का विरोध किया था। जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार से उनकी पार्टी के बीजेपी के साथ मिलने के बाद शरद के अशांत होने के बारे में पूछे जाने पर गत सोमवार को कहा था कि यह जरूरी नहीं सभी मुद्दे पर हर कोई राजी हो। किसी की अलग राय हो सकती है। महागठबंधन से अलग होने का निर्णय जेडीयू की प्रदेश इकाई ने लिया है, जिसका उन्हें पालन करना था।
आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद ने महागठबंधन बिखराव के लिए नीतीश पर प्रहार करते हुए एक बार फिर शरद यादव से कमान संभालने के लिए बोला है। लालू ने शरद से अपील की है कि वो आगामी 27 अगस्त को पटना में आयोजित ‘बीजेपी हटाओ, देश बचाओ ‘ रैली में शामिल हों और साथ मिलकर सांप्रदायिक शक्तियों को परास्त करने के लिए देश भ्रमण करें।
ख़बर 24 एक्सप्रेस
Manish Kumar

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