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मरता अन्नदाता, राजनीति करते राजनेता

 

 

 

 

भाजपा की मोदी सरकार जिन मुद्दों पर चुनाव जीती थी उसमें सबसे एहम मुद्दा था भारत का किसान, वही किसान जिसको मोदी जी ने अन्नदाता का नाम दिया था। मोदी जी ने चुनाव जीतने से पहले कहा था कि हमारे यहाँ अन्नदाता की वो हालत है जो दूसरों का पेट तो भरता है लेकिन खुद भूँखा सोता है। अपना अपने बच्चों का पेट काटकर दूसरों के लिए जीवनदाता बनता है।

लेकिन वही किसान मोदी सरकार में भी दम तोड़ा रहा है। आये दिन किसान आत्महत्या कर रहे हैं, किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है और ऊपर से सरकार की दलीलें अज़ब गज़ब। भाजपा के प्रवक्ता संबित पात्रा का कहना है कि इस बार बम्पर फसल हुई जिस वजह से किसान की फसल के खरीदार नहीं मिल पा रहे हैं। आपको बता दें कि एमपी में गेंहूँ, प्याज की इस बार बम्पर फसल हुई है लेकिन खरीदार न मिलने की वजह से किसान को गेंहूँ कम दामों में बेचना पड़ा। इतना ही नहीं लागत ना निकलने की वजह से प्याज को तो कुंओं में फैंकना पड़ा। ये हालत है हमारे यहाँ भारतीय किसान की। फाइव स्टार फैसिलिटी पाने वाले नेताओं को किसान की ना महनत मालूम है ना उसके त्याग। वो रात दिन महनत करके फसल उगाता है और सरकार की उदासीनता की वजह से मौत को गले लगा लेता है।
सरकारें जाती गयीं आती गयीं लेकिन वोट बैंक किसान की हालत नहीं बदली। बदहाली की जिंदगी जीते किसान की हालत उसके गांवों में ही जाकर देखी जा सकती है। लेकिन नेता भाषणबाजी के सिवाय कुछ कर भी तो नहीं सकते हैं और सबसे अचंभित बात है उन चंद लोगों की जो सरकार की हाँ में हाँ मिलाते रहतें हैं और चापलूस बनकर दूसरों को बोलने से रोकते हैं।
हम खाने पीने के सामान इत्यदि को इम्पोर्ट तो कर सकते हैं लेकिन अपने घर में पैदा हुई चीज को सड़ा देते हैं।
बड़े व्यापारी किसान से कौड़ियों के भाव में उसका सामान खरीदकर उसको बाहर भेजकर दोबारा इम्पोर्ट करके डबल पैसे कमा सकते हैं, लेकिन किसान को उसकी महनत देने में वो गरीब हो जाते हैं। एफसीआई व्यापारियों से समर्थन मूल्य में उसका अनाज तो खरीद लेता है लेकिन किसान से लेने में उसका मान घटता है।
इस दुर्दशा का जिम्मेदार कौन है?

आपको बता दें कि मध्यप्रदेश में 24 घंटे में 3 किसानों ने कर्ज, बदहाली से आत्महत्या कर ली। लेकिन पूरे भारतवर्ष में अगर 3 साल के आंकड़े बताये तो इन तीन सालों में लगभग 5700 किसानों ने अपनी जान दी है। किसानों की खुदकुशी करने के मामले में महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और तमिलनाडु सबसे आगे हैं।

हमारे देश में किसानों को लेकर बड़ी गज़ब की राजनीति होती आयी है। पुलिस की गोली से जो किसान मरें उनके लिए सरकार की तरफ से कहा गया कि वो किसान ही नहीं थे, उन्होंने जींस शर्ट पहने हुए था, कोई कह रहा है वो मजदूर थे, कोई कह रहा है उनके पास तो जमीन ही नहीं थी। ऐसे ही तमिलनाडु के किसानों का हाल हुआ था उन्होंने जंतर मंतर पर धरना क्या दिया उन किसानों को तो भाजपा के लोगों ने देशद्रोही तक करार दे दिया।
यानि कि इस सरकार में जो भी अपनी मांगों के लिए अपने हक़ के लिए आवाज उठाएगा या सरकार की आलोचना करेगा उसको देशद्रोही, देशविरोधी करार दे दिया जायेगा।

सरकार की गलत नीतियों का विरोध देशद्रोह, देशविरोधी आखिर कैसे?
मध्यप्रदेश में चुनाव समीप हैं लेकिन शिवराज सरकार को अपने यहाँ किसानों की बदहाली नहीं दिखती है। उनको और उनके मंत्रियों के मुताबिक मध्यप्रदेश के किसान संपन्न हैं, पैसे वाले हैं, अमीर हैं।

अब जब चुनाव नजदीक हैं और किसानों की आत्महत्या को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पूरे देश के निशाने पर आ गए हैं तो अब वो अपना वोटबैंक साधने के लिए किसानों की सुध लेने में लगे हुए हैं।
मुख्यमंत्री शिवराज आज मंदसौर पहुंच गए । जिन किसानों ने आत्महत्या की उनको वो मुआवजा देकर मरहम लगाएंगे। इसके अलावा सीएम चौहान किसान आंदोलन में पुलिस की फायरिंग में मारे गए 6 किसानों के परिवार से भी मिलेंगे।
एक खबर के मुताबिक शिवराज सबसे पहले बड़वन गांव पहुंचे हैं और उन्होंने मृत किसान के परिवार से मुलाकात की है। इसके साथ कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया भी आज भोपाल जाएंगे।

सिंधिया भोपाल में सरकार के खिलाफ 72 घंटे के लिए सत्याग्रह करेंगे। इससे पहले पाटीदार नेता हार्दिक पटेल और कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया मंगलवार को किसानों के परिवार से मिलने मंदसौर पहुंचे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। किसानों से मिलने मध्यप्रदेश के मंदसौर जा रहे कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को पुलिस ने धारा 151 के तहत गिरफ्तार किया था।

मंदसौर में धारा 144 लागू होने के बावजूद सिंधिया मंदसौर जा रहे थे। पुलिस ने उन्हें समर्थकों के साथ गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी से पहले स‌िंधिया ने कहा कि ‘चाहे सरकार 144 धारा लगा ले मैं जाकर ही रहूंगा और मुझे जाने से कौन रोक सकता है। उन्होंने कहा कि वे किसानों की समस्याओं को जानने की कोशिश करेंगे।

सब राजनीति करेंगे लेकिन किसानों की बदहाली को ये नहीं देख पाएंगे। पूरे देश को दिखाने के लिये वो किसानों और दलितों के यहाँ होटल से मंगाया खान खा लेंगे और बिसलरी का पानी पी तो लेंगे लेकिन किसानों और दलितों के जो दुःख दर्द हैं वो उससे अंजान रहेंगे या अंजान बनने की कोशिश करते रहेंगे। यही है हमारे देश की राजनीति।
यहाँ मरता किसान है और उसकी लाश पर राजनीति करता राजनेता है।

 

मनीष कुमार

 

 

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