CBSE Answer Sheet Mix Up | Exclusive Report Manish Kumar Ankur | Khabar 24 Express
- CBSE Answer Sheet Mix Up: OSM सिस्टम में बड़ी गड़बड़ी, छात्रों की कॉपियां बदलीं
- शिक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
- CBSE की नई On-Screen Marking (OSM) व्यवस्था में कॉपियों की अदला-बदली के करीब 20 मामले सामने आए हैं।
- छात्रों और अभिभावकों में भारी नाराजगी है।
- शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने गलती स्वीकार की,
- लेकिन क्या इससे छात्रों का भविष्य सुरक्षित हो पाएगा?

देश की सबसे बड़ी शिक्षा संस्था कही जाने वाली CBSE इस समय ऐसे विवाद के केंद्र में खड़ी है जिसने लाखों छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों को चिंता में डाल दिया है।
जिस शिक्षा व्यवस्था पर देश का भविष्य टिका हुआ है, उसी व्यवस्था की विश्वसनीयता अब सवालों के घेरे में आ गई है। मामला सिर्फ एक तकनीकी गलती का नहीं है, बल्कि उन लाखों छात्रों के सपनों का है जो दिन-रात मेहनत करके बोर्ड परीक्षाओं में अच्छे अंक लाने का प्रयास करते हैं।
इस बार केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी CBSE ने उत्तर पुस्तिकाओं की जांच के लिए On-Screen Marking (OSM) सिस्टम लागू किया। दावा किया गया था कि यह व्यवस्था अधिक पारदर्शी, तेज और आधुनिक होगी। लेकिन अब जो तथ्य सामने आ रहे हैं, उन्होंने पूरे सिस्टम की पोल खोलकर रख दी है।
कॉपियों की अदला-बदली से मचा हड़कंप
जानकारी के अनुसार CBSE की नई डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली में उत्तर पुस्तिकाओं की अदला-बदली के करीब 20 मामले सामने आए हैं। कई छात्रों ने जब अपने उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी पोर्टल पर देखी तो उनके होश उड़ गए। जिन कॉपियों को उनकी बताकर दिखाया जा रहा था, वे वास्तव में किसी दूसरे छात्र की उत्तर पुस्तिकाएं थीं।
यह सिर्फ तकनीकी त्रुटि नहीं, बल्कि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ जैसा गंभीर मामला बन गया है।
जैसे ही छात्रों ने इस गड़बड़ी के स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर साझा करने शुरू किए, मामला तेजी से वायरल हो गया। कई अभिभावकों ने सवाल उठाया कि यदि कॉपियां ही बदल गईं तो फिर छात्रों को मिले अंक कितने विश्वसनीय हैं?
लोगों ने पूछा कि जब देश की सबसे बड़ी परीक्षा प्रणाली में ही इस तरह की चूक हो सकती है तो छात्रों को न्याय कैसे मिलेगा?
सोशल मीडिया पर हजारों प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई लोगों ने इसे शिक्षा व्यवस्था का सबसे बड़ा डिजिटल फेलियर बताया तो कुछ ने इसे छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर हमला करार दिया।
क्या सिर्फ 20 मामले ही सामने आए हैं?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि बोर्ड जिन 20 मामलों की बात कर रहा है, क्या वास्तव में गड़बड़ी सिर्फ इतनी ही सीमित है?
विशेषज्ञों का मानना है कि जिन छात्रों ने अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की जांच की और शिकायत दर्ज कराई, उन्हीं मामलों का खुलासा हो पाया है। लेकिन ऐसे कितने छात्र होंगे जिन्होंने कॉपी देखने की प्रक्रिया नहीं अपनाई या जिन्हें यह गड़बड़ी समझ ही नहीं आई?
यही वजह है कि अब इस पूरे मामले की स्वतंत्र और व्यापक जांच की मांग उठ रही है।
धर्मेंद्र प्रधान ने स्वीकारी गलती
मामले ने जब राष्ट्रीय स्तर पर तूल पकड़ लिया और सरकार की आलोचना शुरू हुई तो केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी इस गड़बड़ी को स्वीकार किया।
गलती स्वीकार करना एक सकारात्मक कदम माना जा सकता है, लेकिन सवाल यह है कि क्या केवल गलती स्वीकार लेने से उन छात्रों का नुकसान पूरा हो जाएगा जिनके अंक प्रभावित हुए हो सकते हैं?
क्या उन छात्रों को वापस उनका मानसिक संतुलन, उनका आत्मविश्वास और उनकी मेहनत लौटाई जा सकती है जो इस गड़बड़ी से प्रभावित हुए हैं?
यही वह प्रश्न है जिसका जवाब देश के लाखों अभिभावक और छात्र जानना चाहते हैं।
CBSE ने On-Screen Marking सिस्टम को आधुनिक शिक्षा व्यवस्था की दिशा में बड़ा कदम बताया था। उद्देश्य था कि उत्तर पुस्तिकाओं की जांच में मानवीय त्रुटियां कम हों और प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बने।
लेकिन अब वही सिस्टम विवादों के घेरे में है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि स्कैनिंग, डेटा टैगिंग, अपलोडिंग या डिजिटल मैपिंग के दौरान थोड़ी सी भी चूक होती है तो पूरी मूल्यांकन प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या OSM प्रणाली को बिना पर्याप्त परीक्षण के लागू कर दिया गया?
क्या छात्रों को प्रयोगशाला का विषय बना दिया गया?
सबसे दुखद पहलू यह है कि शिक्षा व्यवस्था में किए गए किसी भी प्रयोग का सबसे बड़ा असर छात्रों पर पड़ता है।
एक छात्र की बोर्ड परीक्षा केवल एक परीक्षा नहीं होती, बल्कि उसके करियर, कॉलेज एडमिशन, स्कॉलरशिप और भविष्य की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण पड़ाव होती है।
यदि ऐसी परीक्षाओं में तकनीकी गड़बड़ियां होने लगें तो छात्रों का भरोसा पूरी व्यवस्था से उठ सकता है।
देश के लाखों परिवारों ने बच्चों की शिक्षा के लिए वर्षों तक मेहनत की होती है। ऐसे में यदि उत्तर पुस्तिकाओं की अदला-बदली जैसी घटनाएं सामने आएं तो यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं बल्कि विश्वास का संकट बन जाता है।
CBSE ने मामले की जांच शुरू करने और गड़बड़ियों को सुधारने का आश्वासन दिया है। बोर्ड का कहना है कि जिन मामलों की शिकायत मिली है, उनकी समीक्षा की जा रही है और जिम्मेदार कारणों की पहचान की जाएगी।
हालांकि छात्रों और अभिभावकों की मांग है कि केवल प्रभावित मामलों की नहीं, बल्कि पूरी डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया का ऑडिट कराया जाए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आखिर यह गड़बड़ी हुई कैसे और इसका दायरा कितना बड़ा है।
CBSE की नई On-Screen Marking व्यवस्था को शिक्षा में डिजिटल क्रांति का कदम बताया गया था, लेकिन उत्तर पुस्तिकाओं की अदला-बदली के मामलों ने इस दावे पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह विवाद सिर्फ 20 कॉपियों का नहीं है, बल्कि उस भरोसे का है जो करोड़ों भारतीय परिवार देश की शिक्षा व्यवस्था पर करते हैं।
अब देश यह देख रहा है कि क्या इस मामले में केवल सफाई दी जाएगी या फिर ऐसी ठोस कार्रवाई होगी जिससे भविष्य में किसी भी छात्र के सपनों के साथ इस तरह का खिलवाड़ दोबारा न हो सके।
क्योंकि गलती स्वीकार करना महत्वपूर्ण है, लेकिन उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है यह सुनिश्चित करना कि छात्रों का भविष्य किसी तकनीकी प्रयोग की कीमत न बने।
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