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होलिका दहन 2 मार्च, रंग 4 मार्च! इस बार होली में एक दिन का गैप क्यों?

    इस बार होली के त्योहार को लेकर लोगों के मन में बड़ा सवाल है। होलिका दहन 2 मार्च को हो रहा है, लेकिन रंग 4 मार्च को खेलने की बात कही जा रही है।

    आखिर ऐसा क्यों? आमतौर पर होलिका दहन के अगले ही दिन रंगों वाली होली खेली जाती है। तो इस बार एक दिन का अंतर क्यों आ गया? क्या है इसके पीछे का धार्मिक और ज्योतिषीय कारण? आइए विस्तार से समझते हैं।

    सबसे पहले समझते हैं कि होली का त्योहार दो प्रमुख हिस्सों में मनाया जाता है। पहला होता है होलिका दहन, जो फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि की रात को किया जाता है। इसके अगले दिन चैत्र कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा को रंगों वाली होली खेली जाती है, जिसे धुलेंडी या रंगवाली होली भी कहा जाता है।

    इस बार पंचांग के अनुसार फाल्गुन पूर्णिमा तिथि 2 मार्च को पड़ रही है और उसी दिन होलिका दहन किया जाएगा। लेकिन समस्या यहां आई तिथि के समय और भद्रा काल को लेकर।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार होलिका दहन भद्रा काल में नहीं किया जाता। भद्रा को अशुभ समय माना गया है। इस वर्ष पूर्णिमा तिथि के दौरान भद्रा का प्रभाव कुछ समय तक रहने के कारण शुभ मुहूर्त का विशेष ध्यान रखना जरूरी हो गया है।

    2 मार्च को होलिका दहन का शुभ मुहूर्त रात के समय भद्रा समाप्त होने के बाद माना जा रहा है। इसलिए लोग उसी दिन विधि-विधान से होलिका दहन करेंगे।

    अब बात करते हैं रंग खेलने की। चूंकि होलिका दहन देर रात में होगा और प्रतिपदा तिथि का प्रभाव अगले दिन के हिसाब से बदल रहा है, इसलिए कई स्थानों पर 3 मार्च की जगह 4 मार्च को रंग खेलने का निर्णय लिया गया है। कुछ क्षेत्रों में स्थानीय परंपराओं और पंचांग के अनुसार तारीख में अंतर देखने को मिल सकता है।

    यानी इस बार तिथि, भद्रा काल और शुभ मुहूर्त के कारण होलिका दहन और रंग खेलने के दिन में अंतर आ गया है। हालांकि अलग-अलग राज्यों और परंपराओं के अनुसार एक दिन का फर्क संभव है।

    होलिका दहन का शुभ मुहूर्त 2 मार्च, भद्रा समाप्ति के बाद रात्रि में।
    रंग खेलने का शुभ समय 4 मार्च, सुबह से दोपहर तक विशेष रूप से शुभ माना जा रहा है।

    ध्यान रहे, अपने स्थानीय पंचांग या मंदिर से मुहूर्त की पुष्टि जरूर कर लें, क्योंकि क्षेत्र के अनुसार समय में बदलाव हो सकता है।

    तो इस बार होली में एक दिन का अंतर तिथियों और भद्रा काल की वजह से है। आप सभी को होली की अग्रिम शुभकामनाएं। सुरक्षित रहें, प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल करें और त्योहार को प्रेम और भाईचारे के साथ मनाएं।

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