इस वक्त की सबसे बड़ी सियासी खबर यवतमाल से सामने आ रही है, जहां वणी के युवा नेता और एडवोकेट कुणाल चोरड़िया ने बीजेपी को बड़ा झटका देते हुए शिवसेना शिंदे गुट ज्वाइन कर लिया है।
यह ज्वाइनिंग खुद महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की मौजूदगी में हुई, जहां शिंदे ने कुणाल चोरड़िया को शिवसेना का शाफा पहनाकर पार्टी में उनका जोरदार स्वागत किया।
खास बात यह है कि इससे पहले उनके पिता विजय चोरड़िया भी बीजेपी छोड़कर शिवसेना में शामिल हो चुके हैं और अब पिता-पुत्र दोनों एक साथ शिवसेना की मजबूती बनते नजर आ रहे हैं।
इस राजनीतिक घटनाक्रम के बाद वणी नगर परिषद चुनाव की तस्वीर भी पूरी तरह बदलती दिखाई दे रही है।
दरअसल यवतमाल जिले के वणी में राजनीति उस वक्त पूरी तरह गरमा गई जब जिले के युवा और तेजतर्रार नेता कुणाल चोरड़िया ने आधिकारिक रूप से बीजेपी को अलविदा कहकर शिवसेना शिंदे गुट में प्रवेश कर लिया। इस मौके पर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे खुद मौजूद रहे, जिन्होंने कुणाल चोरड़िया को शिवसेना का शाफा पहनाकर पार्टी में शामिल कराया और उनके उज्ज्वल राजनीतिक भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
कुणाल चोरड़िया पेशे से एडवोकेट हैं और लंबे समय से सामाजिक कार्यों से जुड़े हुए हैं, लेकिन उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि बीजेपी में उन्हें और उनके पिता विजय चोरड़िया को वह सम्मान नहीं मिल रहा था जिसके वे हकदार थे, और जहां सम्मान न हो वहां से चले जाना ही बेहतर होता है।
यही कारण है कि उन्होंने शिवसेना शिंदे गुट का दामन थामा। बातचीत के दौरान कुणाल चोरड़िया ने यह भी साफ कहा कि अब उनका पूरा ध्यान वणी नगर परिषद चुनाव पर है और वे शिवसेना की उम्मीदवार पायल तोड़साम को जिताने के लिए पूरी ताकत लगा देंगे। उन्होंने कहा कि वणी का विकास सिर्फ शिवसेना ही कर सकती है और पायल तोड़साम एक पढ़ी-लिखी, संस्कारी और ऊर्जावान महिला हैं, जो अगर नगराध्यक्ष बनती हैं तो यह पूरे वणी शहर के लिए गर्व की बात होगी।
कुणाल के इस फैसले को वणी की राजनीति में एक बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है और इसका सीधा असर आने वाले चुनाव पर पड़ता नजर आ रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम बात यह है कि कुणाल चोरड़िया के पिता विजय चोरड़िया पहले ही बीजेपी छोड़कर शिवसेना में शामिल हो चुके हैं और अब पिता-पुत्र दोनों शिवसेना के लिए वणी में मजबूती से काम कर रहे हैं।
विजय चोरड़िया लंबे समय से वणी की राजनीति में सक्रिय रहे हैं और उनकी पकड़ जमीनी स्तर पर बेहद मजबूत मानी जाती है, वहीं कुणाल चोरड़िया युवा वर्ग की पहली पसंद बनते जा रहे हैं।
दूसरी ओर पायल तोड़साम को लेकर भी दोनों का साफ कहना है कि वे एक शिक्षित, संस्कारी और कर्मठ महिला हैं, जिन्होंने खेल के क्षेत्र में महाराष्ट्र का नाम रोशन किया है और अब राजनीति में भी वे वणी को एक नई दिशा देने का माद्दा रखती हैं। ऐसे में विजय चोरड़िया, कुणाल चोरड़िया और पायल तोड़साम की यह तिकड़ी वणी की सियासत में एक नई ताकत बनकर उभरती दिखाई दे रही है।
बीजेपी छोड़कर शिवसेना में कुणाल चोरड़िया की एंट्री को वणी ही नहीं बल्कि पूरे यवतमाल जिले की राजनीति में एक बड़े संकेत के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में इसका असर नगर परिषद चुनाव के नतीजों पर क्या पड़ता है, यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन इतना तय है कि इस राजनीतिक बदलाव ने चुनावी मुकाबले को और भी दिलचस्प बना दिया है।
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