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Nithari Kand का काला सच: Moninder Singh Pandher–Surendra Koli बरी, तो 19 बच्चों की मौत का असली गुनहगार कौन?

Manish Kumar Ankur Exclusive Report: नोएडा का निठारी कांड एक बार फिर सुर्खियों में है।

भारत के सबसे चर्चित और भयावह अपराध मामलों में गिने जाने वाले इस केस में कोर्ट ने “मोनिंदर सिंह पंढेर और सुरेंद्र कोली” को बरी कर दिया है।

लेकिन बड़ा सवाल यह है कि नाले से मिली 19 बच्चों की हड्डियाँ आखिर किसकी थीं? और उन मासूमों की मौत का जिम्मेदार कौन है?

निठारी की D-5 कोठी से शुरू हुआ यह मामला आज भी देश के सबसे रहस्यमय और भयावह अपराधों में गिना जाता है।

2005–2006 के बीच अचानक बच्चे गायब होने लगे कोई बाजार गया और लौटकर नहीं आया, कोई गली से खेलते-खेलते गायब हो गया। परिवारों की शिकायतों के बावजूद उस समय जांच ने इस पर गंभीरता नहीं दिखाई।

स्थिति तब बदल गई जब निठारी नाले की सफाई के दौरान इंसानी हड्डियाँ, खोपड़ियाँ, कपड़ों के टुकड़े और बच्चों के अवशेष मिले। पूरा देश दहल उठा।

जांच के बाद पुलिस ने D-5 कोठी के मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर और उसके कर्मचारी सुरेंद्र कोली को गिरफ्तार किया। मामला धीरे-धीरे “सीरियल किलिंग” की शक्ल लेता गया।

लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, नए सवाल उठते गए:

  • क्या यह बच्चों को निशाना बनाने वाला सीरियल किलर था?
  • क्या घर के अंदर कुछ ऐसा हो रहा था जिसे छिपाया गया
  • नाले में अवशेष किसने डाले?
  • क्या इसमें organ trafficking गैंग की भूमिका थी?
  • या फिर यह पूरा मामला किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा था?
  • पुलिस ने किस आधार पर मोनिंदर सिंह पंढेर और सुरेंद्र कोली को आरोपी बनाया?
  • पुलिस की जांच में आखिर ऐसी क्या कमी रह गई जिससे मासूमों को न्याय नहीं मिल पाया?
  • आखिर इस मामले की CBI जांच या उच्चस्तरीय जांच क्यों नहीं की गई?
  • यूपी सरकार ने इस मामले में दखल क्यों नहीं दिया?
  • केया गरीब के बच्चों की कोई अहमियत नहीं? उन्हें कोई मारकर खा जाए या उनके ऑर्गन बेच दे.. कोई जांच नहीं?
  • क्या इस मामले पर लीपापोती नहीं हुई?

आखिर सवाल तो बहुत हैं, हम सवाल भी पूछ रहे हैं, लेकिन जबाव कौन देगा? मीडिया ऐसे मामलों में ट्रायल नहीं करता है…. खबर 2005-06 की है तो इस मामले में मीडिया की भूमिका पर भी सवाल हैं। आखिर उन बच्चों की आवाज कौन बनेगा?

वहीं बता दें कि इस मामले में कई विशेषज्ञों ने संदेह जताया कि यह सिर्फ सीरियल किलिंग नहीं बल्कि ऑर्गन सप्लाई नेटवर्क जैसा लग रहा है। कुछ ने इसे नरभक्षण जैसी थ्योरी से भी जोड़ा। लेकिन कोई भी निष्कर्ष आज तक स्पष्ट नहीं हुआ।

लंबी सुनवाई के बाद कोर्ट ने सबूतों के अभाव में पंढेर और कोली को बरी कर दिया। लेकिन कानून के इस फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल आज भी वहीं खड़ा है

“अगर मोनिंदर सिंह पंढेर और सुरेंद्र कोली दोषी नहीं…
तो फिर 19 बच्चों की मौत का सच क्या है?”

“उन मासूमों की हड्डियाँ नाले में कैसे पहुँचीं?”

“क्या भारत का यह सबसे बड़ा रहस्य हमेशा दफन रहेगा?”

निठारी की D5 कोठी के सामने आज भी लोगों को डर लगता है।आज उस सड़क पर भले गाड़ियों की या लोगों की आवाजाही हो लेकिन वो सड़क अब शांत है, लेकिन उस शांति के पीछे डर और सवालों की गूंज अब भी सुनाई देती है। परिवार आज भी न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं, और देश यह जवाब चाहता है कि इतने बड़े अपराध की सच्चाई आखिर कब सामने आएगी।

निठारी कांड सिर्फ एक केस नहीं, बल्कि सिस्टम, जांच एजेंसियों और हमारी न्याय व्यवस्था पर एक गहरा प्रश्नचिन्ह है।

हम बस आपसे इतनी गुजारिश करेंगे कि इस खबर को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि किसी जिम्मेदार के कान पर जूं रेंगे और उन मासूम बच्चों को न्याय मिल सके। जो पिछले 20 सालों से न्याय की बाट जोह रहे हैं।

Exclusive Report Manish Kumar Ankur


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