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Bihar Election Result: प्रशांत किशोर का बड़ा बयान, राजनीति छोड़ने की नई शर्त और मौन व्रत का एलान

देश के सबसे बड़े PR, सबसे बड़े रणनीतिकार, पीएम मोदी को चुनाव जिताने वाले, उन्हें पीएम बनाने वाले देश के नंबर वन प्रशांत किशोर की हम बात कर रहे हैं।

बिहार चुनाव को लेकर उन्होंने क्या क्या दावा नहीं किया। रिजल्ट के बाद उनके दावे खोखले ही नहीं निकले बल्कि वो अपने कई उम्मीदवारों की जमानत तक नहीं बचा पाए।

इसके अलावा प्रशांत किशोर ने खुद भी चुनाव लड़ने से मना कर दिया था वो भी यह कहते हुए कि वो अपने कंडीटेड्स को मजबूत करने के लिए खुद चुनाव नहीं लड़ रहे हैं।

लेकिन अब बिहार चुनाव नतीजों के बाद प्रशांत किशोर आखिरकार सामने आए हैं। पाँच साल की मेहनत, लगातार जनता के बीच रहने के बाद भी जन सुराज पार्टी एक भी सीट नहीं जीत सकी।

नतीजों के बाद पीके ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि इस हार की पूरी जिम्मेदारी उनकी है और इसी कारण वे अब मौन उपवास रखेंगे। साथ ही राजनीति छोड़ने के लिए नई शर्त भी सामने रख दी है। पूरी बात आपको बताते हैं।

बिहार विधानसभा चुनाव में शून्य पर सिमटी जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर हार की पूरी जिम्मेदारी ली।

उन्होंने कहा कि जनता ने उन पर भरोसा नहीं किया और वे जनता की अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतर पाए। इसी कारण वे गांधी आश्रम में एक दिन का मौन उपवास करेंगे, और सभी कार्यकर्ताओं से भी साथ में उपवास रखने की अपील की है।

प्रशांत किशोर ने कहा कि हमने गलती की हो सकती है, लेकिन गुनाह नहीं किया। हमने न जाति का जहर फैलाया, न वोट खरीदने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि चुनाव में कई तरह की अनियमितताएँ हुईं और सरकारी सिस्टम का इस्तेमाल कर वोटों को प्रभावित किया गया।

पीके ने चुनाव में पैसों के इस्तेमाल पर भी बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार ने डेढ़ करोड़ लोगों में दस-दस हजार रुपये बांटे। उन्होंने चुनौती दी कि यदि सरकार अगले छह महीने में इन महिलाओं को दो लाख रुपये नहीं देती, तो लोग उनके जारी नंबर पर संपर्क करें और वे लड़ाई लड़ने को तैयार रहेंगे।

इतना ही नहीं, प्रशांत किशोर ने राजनीति छोड़ने की अपनी पिछली शर्त को दोहराते हुए कहा कि अगर एनडीए सरकार छह महीने में दो लाख रुपये दे देती है, तो वह राजनीति छोड़ देंगे।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें बिहार की राजनीति की वैसी समझ नहीं है जैसी कई बड़े नेताओं को है, क्योंकि उन्होंने न भ्रष्टाचार किया और न जाति-धर्म की राजनीति की। उन्होंने पाकिस्तान के इमरान खान का उदाहरण देते हुए कहा कि पहला चुनाव हारने के बाद भी इमरान खान टिके रहे और आगे बढ़े। जन सुराज भी इसी रास्ते पर चलेगा।

तो बिहार में नतीजे जन सुराज के खिलाफ रहे, लेकिन प्रशांत किशोर ने साफ कर दिया है कि वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। मौन उपवास, नई शर्त और चुनावी अनियमितताओं के आरोपों ने बिहार की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में इस विवाद के और भी बड़े राजनीतिक असर देखने को मिल सकते हैं।

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