Breaking News
BigRoz Big Roz
Home / Breaking News / महाराष्ट्र में किसानों के जख्म पर नमक: मुआवजे के नाम पर मजाक, किसानों के खाते में पहुंचे 2, 3 और 11 रुपये

महाराष्ट्र में किसानों के जख्म पर नमक: मुआवजे के नाम पर मजाक, किसानों के खाते में पहुंचे 2, 3 और 11 रुपये

Report Akash Dhake : महाराष्ट्र के किसानों के साथ जो हुआ है, वह किसी दर्दनाक मजाक से कम नहीं। 11 एकड़ की फसल बर्बाद हुई, पूरा परिवार संकट में आ गया और सरकार की ओर से मुआवजे के नाम पर मिला सिर्फ ढाई रुपये! जी हां, दो रुपये तीस पैसे। सवाल उठता है – क्या यही है किसानों के साथ सरकार की संवेदनशीलता? क्या यही है प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की सच्चाई?

बेमौसम बारिश ने इस बार महाराष्ट्र के किसानों की कमर तोड़ दी। पालघर जिले के वाडा तालुका के शिलोत्तर गांव के किसान मधुकर बाबुराव पाटिल की कहानी आज पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन गई है। उनकी 11 एकड़ की पूरी धान की फसल पानी में डूब गई। खेत बर्बाद हो गए, चारा तक सड़ गया। लेकिन जब राहत की उम्मीद थी, तब मिला ‘कागज पर मुआवजा’ — मात्र 2 रुपये 30 पैसे।

मधुकर पाटिल ने कहा “हमारा सब कुछ चला गया… अब अगर सरकार भी मजाक उड़ाएगी तो जिएंगे कैसे?” उनकी ये बात सिर्फ एक किसान की पीड़ा नहीं, बल्कि हजारों किसानों के दर्द की गूंज है।

अकोला, बुलढाणा और नांदेड़ में भी वही कहानी

पालघर ही नहीं, अकोला जिले के किसानों ने भी दिवाली से पहले यही ‘राहत’ पाई। किसी को मिला तीन रुपये, किसी को बारह रुपये, और किसी को पूरे 21 रुपये का मुआवजा। किसानों ने इसे “राहत नहीं, अपमान” बताया और जिला कलेक्टर कार्यालय में जाकर चेक लौटाए। किसानों ने कहा, “हम भीख नहीं, न्याय चाहते हैं।”

भारी बारिश से बर्बाद फसलें, राहत के नाम पर अपमान

सितंबर महीने में महाराष्ट्र के कई जिलों में बेमौसम बारिश से सोयाबीन, कपास और मूंग की फसलें बर्बाद हो गईं। सरकार ने घोषणा की थी कि दिवाली से पहले राहत मिलेगी। लेकिन जब भुगतान हुआ, तो किसानों को मिला सिर्फ निराशा और बेइज्जती।

किसानों का आरोप है कि राजस्व अधिकारी लापरवाह हैं, बीमा कंपनियां पैसा खा रही हैं और सरकार केवल “डेटा और घोषणाओं” में व्यस्त है। पैसा मौजूद है, लेकिन किसानों तक पहुंचता नहीं।

क्या यही है प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का सच?

11 एकड़ फसल के बदले 2 रुपये 30 पैसे – ये आंकड़ा केवल मजाक नहीं, बल्कि सिस्टम की संवेदनहीनता का सबूत है। सवाल उठता है कि आखिर किसानों के नाम पर आने वाला पैसा बीच में कौन हड़प रहा है? क्यों नहीं होती इसकी जांच? और क्यों हर बार किसान ही ठगा जाता है?

सरकार को जवाब देना होगा क्या यही है ‘डबल इंजन सरकार’ का किसान हितैषी चेहरा?

और अंत में

महाराष्ट्र के इन किसानों का दर्द अब पूरे देश का सवाल बन गया है। अगर देश का अन्नदाता इस तरह से अपमानित होता रहेगा, तो किसान आंदोलन और नाराज़गी दोनों बढ़ेंगे। अब वक्त है कि सरकार आंकड़ों से बाहर निकलकर ज़मीन पर उतरकर किसानों की सच्ची मदद करे।


Khabar 24 Express नई सोच, नया भारत
अगर आप भी मानते हैं कि किसानों के साथ ऐसा मजाक नहीं होना चाहिए, तो इस खबर को शेयर करें और सरकार से जवाब मांगें।


ब्यूरो रिपोर्ट : आकाश ढाके, महाराष्ट्र


Discover more from Khabar 24 Express | India's Leading Hindi News Network

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Check Also

राष्ट्रकुल पदक विजेत्या खेळाडूंची पंतप्रधान नरेंद्र मोदींसोबत भेट ; केंद्रीय राज्यमंत्री रक्षा खडसे यांची उपस्थिती

राष्ट्रकुल पदक विजेत्या खेळाडूंची पंतप्रधान नरेंद्र मोदींसोबत भेट ; केंद्रीय राज्यमंत्री रक्षा खडसे यांची उपस्थिती

Leave a Reply

Discover more from Khabar 24 Express | India's Leading Hindi News Network

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading