
Exclusive Report | Manish Kumar Ankur : क्या नागपुर किसी बड़ी दुर्घटना की ओर बढ़ रहा है?
नागपुर आज देश के सबसे तेजी से विकसित हो रहे शहरों में गिना जाता है। यहां इंटरनेशनल एयरपोर्ट है, देश का बड़ा रेलवे स्टेशन है, हर बड़े शहर के लिए सीधी बस और ट्रेन कनेक्टिविटी है। साफ-सुथरी सड़कें, बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर और तेजी से बढ़ता कारोबार नागपुर को मेट्रो सिटी की ओर ले जा रहा है।
लेकिन इसी बीच एक ऐसा ट्रेंड शुरू हो गया है जो आने वाले समय में नागपुर के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
छोटी जमीन पर 6-10 मंजिला इमारतें!
शहर के कई इलाकों में सिर्फ 1000 से 1500 स्क्वायर फीट की जमीन पर 6 से 10 मंजिला इमारतें खड़ी की जा रही हैं। हर फ्लोर पर दो-दो फ्लैट बनाए जा रहे हैं। सुनने में भले ही ये कमाल लगे, लेकिन हकीकत बेहद डरावनी है।
इन इमारतों में न पार्किंग की जगह है, न सुरक्षा के इंतजाम। सवाल उठता है कि यहां रहने वाले लोग अपनी गाड़ियां कहां खड़ी करेंगे? क्या पहले से ही भीड़-भाड़ वाली सड़कों को पार्किंग बना दिया जाएगा?
बिल्डिंग बायलॉज और नियमों का मजाक
नागपुर नगर निगम (NMC) और महाराष्ट्र सरकार ने बिल्डर्स के लिए कई मानक तय किए हैं।
- नगर निगम की मंजूरी
- महाराष्ट्र राज्य विद्युत बोर्ड की अनुमति
- अग्निशमन विभाग से एनओसी
- जल विभाग और सीवेज विभाग की मंजूरी
- पर्यावरण विभाग से एनओसी
- नागपुर सुधार ट्रस्ट की अनुमति
ये सभी अनिवार्य हैं। लेकिन हकीकत ये है कि कई जगहों पर बिल्डर्स इन नियमों को ताक पर रखकर इमारतें खड़ी कर रहे हैं।
गरीबों की जमीन पर बिल्डर्स का कब्जा
सबसे बड़ा खेल हो रहा है गरीबों की जमीन पर। गरीब परिवारों को मामूली रकम और एक फ्लैट का लालच देकर उनकी जमीन हड़प ली जाती है। इसके बाद वहां पर ऊंची-ऊंची इमारतें खड़ी कर दी जाती हैं। ये तरीका दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों में पहले से चल रहा है, लेकिन नागपुर में अब तेजी से पांव पसार रहा है।
क्या नागपुर किसी बड़ी दुर्घटना की ओर बढ़ रहा है?
इतनी तंग गलियों और छोटी-सी जमीन पर जब 6 से 10 मंजिला इमारतें खड़ी होंगी तो सोचिए, अगर आग लगी तो क्या होगा? क्या फायर ब्रिगेड गाड़ियां अंदर तक पहुंच पाएंगी? क्या बिजली और पानी का प्रेशर वहां तक पर्याप्त होगा? क्या सीवेज व्यवस्था इसे झेल पाएगी?
ये सारे सवाल नागपुर की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा करते हैं।
NMC और महाराष्ट्र सरकार पर सवाल
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या नागपुर नगर निगम और महाराष्ट्र सरकार आंखें मूंदकर बैठे हैं? क्या बिल्डर्स की मनमानी जारी रहने दी जाएगी? क्या लोगों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है?
निष्कर्ष
एक्सक्लूसिव रिपोर्ट : मनीष कुमार अंकुर, नागपुर
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