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नागपुर में दिल दहला देने वाली घटना: पति की किचिन में गिरकर मौत, इंतजार में बिस्तर पर पड़ी पत्नी ने भूख-प्यास से थोड़ा दम

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नागपुर: कभी-कभी जिंदगी ऐसी कहानी लिख देती है जिसे पढ़कर आंखें नम हो जाती हैं। नागपुर से सामने आई एक ऐसी ही दर्दनाक घटना ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। यह सिर्फ दो बुजुर्गों की मौत की खबर नहीं, बल्कि उस अकेलेपन की भयावह तस्वीर है जिससे आज देश के हजारों बुजुर्ग गुजर रहे हैं।

नागपुर के वाड़ी थाना क्षेत्र में रहने वाले 77 वर्षीय गंगाधर भोंगाडे और उनकी 75 वर्षीय पत्नी कौशल्या भोंगाडे की मौत ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। सबसे दर्दनाक बात यह रही कि पति की मौत के बाद बिस्तर पर पड़ी पत्नी कई दिनों तक मदद का इंतजार करती रही, लेकिन कोई नहीं आया। आखिरकार भूख, प्यास और अकेलेपन से जूझते हुए उसने भी दम तोड़ दिया।

एक-दूसरे का सहारा था यह बुजुर्ग दंपती

जानकारी के अनुसार गंगाधर भोंगाडे सेवानिवृत्त रक्षा कर्मचारी थे। बढ़ती उम्र के बावजूद वह अपनी पत्नी कौशल्या की पूरी देखभाल करते थे। कौशल्या लंबे समय से बीमार थीं और बिस्तर पर ही रहती थीं। वह बिना सहारे उठ-बैठ भी नहीं सकती थीं।

पड़ोसियों के अनुसार दोनों का जीवन बेहद साधारण था, लेकिन उनके रिश्ते में गहरा अपनापन था। गंगाधर ही पत्नी के लिए खाना बनाते, दवाइयां देते और उनकी हर जरूरत का ख्याल रखते थे।

रसोई में गिरने से चली गई पति की जान

पुलिस के अनुसार 26 मई की रात गंगाधर रसोई में गए थे। आशंका है कि उनका पैर फिसल गया और वह जोर से गिर पड़े। चोट इतनी गंभीर थी कि वह दोबारा उठ नहीं सके। घटनास्थल पर ही उनकी मौत हो गई।

जिस व्यक्ति ने पूरी जिंदगी अपनी पत्नी का सहारा बनकर साथ निभाया, उसकी सांसें अचानक रसोई के फर्श पर थम गईं।

लेकिन असली त्रासदी इसके बाद शुरू हुई।

दूसरे कमरे में पत्नी करती रही इंतजार

घर के दूसरे कमरे में बिस्तर पर पड़ी कौशल्या को शायद यह एहसास हो गया होगा कि कुछ गड़बड़ है। उन्होंने अपने पति को आवाज दी होगी। इंतजार किया होगा कि वह हमेशा की तरह पानी लेकर आएंगे, खाना खिलाएंगे या दवा देंगे।

लेकिन इस बार कोई जवाब नहीं मिला।

घंटे बीतते गए। फिर एक दिन और फिर कई दिन गुजर गए। कौशल्या न तो बिस्तर से उठ सकती थीं और न ही बाहर जाकर किसी को मदद के लिए बुला सकती थीं।

भीषण गर्मी, भूख, प्यास और अकेलापन… यही उनके आखिरी दिनों के साथी बन गए।

कई दिनों तक मौत का करती रहीं इंतजार

पुलिस का अनुमान है कि पति की मौत के बाद कौशल्या कुछ दिनों तक जीवित रहीं। शायद उन्हें उम्मीद रही होगी कि कोई रिश्तेदार आएगा, कोई पड़ोसी दरवाजा खटखटाएगा या कोई उनकी आवाज सुन लेगा।

लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

दिन गुजरते रहे और घर के भीतर एक महिला जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करती रही।

यह कल्पना करना भी मुश्किल है कि किसी इंसान के लिए अपने जीवनसाथी की मौत के बाद उसी घर में अकेले पड़े रहना कितना दर्दनाक रहा होगा।

दुर्गंध आने पर खुला मौत का राज

कई दिनों तक घर का दरवाजा नहीं खुला। बाहर 27, 28 और 29 मई के अखबार पड़े रहे, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया।

जब घर से तेज दुर्गंध आने लगी तब लोगों को शक हुआ। सूचना मिलने पर कौशल्या के दामाद मोहम्मद गौस वहां पहुंचे। पड़ोसियों की मदद से दरवाजा तोड़ा गया।

दरवाजा खुलते ही सामने जो दृश्य था, उसे देखकर हर कोई सन्न रह गया।

रसोई में गंगाधर भोंगाडे का शव पड़ा था, जबकि दूसरे कमरे में बिस्तर पर कौशल्या की निर्जीव देह मिली।

कोई संतान नहीं थी, पत्नी के बच्चों को अपनाया था

बताया जाता है कि इस दंपती की अपनी कोई संतान नहीं थी। गंगाधर भोंगाडे ने पत्नी की पहली शादी से हुए बच्चों को अपनाया था और वर्षों तक पूरे परिवार का साथ निभाया।

जानकारी के मुताबिक उन्होंने अपनी बेटी को फोन कर तबीयत खराब होने की जानकारी भी दी थी। उन्होंने अस्पताल जाने और पत्नी की देखभाल के लिए किसी को भेजने का अनुरोध किया था। हालांकि बेटी ने जून के पहले सप्ताह में आने की बात कही थी।

लेकिन नियति को शायद कुछ और ही मंजूर था।

समाज के लिए एक बड़ा सवाल

नागपुर की यह घटना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं है। यह हमारे समाज के सामने खड़ा एक बड़ा सवाल भी है।

क्या हम अपने बुजुर्गों का हालचाल लेने के लिए भी समय नहीं निकाल पा रहे हैं?

क्या हमारे आसपास ऐसे लोग हैं जो अकेले रह रहे हैं और मदद की जरूरत में हैं?

कई बार मौत से भी ज्यादा दर्दनाक होता है किसी का इंतजार करते रहना। शायद कौशल्या भोंगाडे ने भी अपने आखिरी पलों में यही उम्मीद की होगी कि कोई आएगा, उनका हाथ थामेगा और कहेगा कि वह अकेली नहीं हैं।

लेकिन अफसोस, वह इंतजार कभी पूरा नहीं हुआ।

निष्कर्ष

नागपुर की यह हृदयविदारक घटना हर किसी को सोचने पर मजबूर करती है। यदि आपके आसपास कोई बुजुर्ग अकेले रहते हैं, तो आज ही उनका हालचाल जरूर पूछिए। आपका एक फोन कॉल, एक मुलाकात या कुछ मिनटों की बातचीत किसी की जिंदगी में उम्मीद की नई किरण बन सकती है।

क्योंकि कभी-कभी किसी को सिर्फ मदद नहीं, बल्कि यह एहसास चाहिए होता है कि वह अकेला नहीं है।


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