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दिव्यांगों को कमजोर समझने की न करें भूल, कानून तोड़ने वालों को हो सकती है जेल : Ammol Dewaji Walkke

दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 पर समाजसेवी अमोल वालके का बड़ा संदेश, भेदभाव और उत्पीड़न करने वालों को भुगतने पड़ सकते हैं कानूनी परिणाम

समाजसेवी अमोल वालके ने दिव्यांगों के अधिकारों को लेकर बड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के तहत भेदभाव, अपमान और उत्पीड़न करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और जेल तक की सजा हो सकती है।


भारत में दिव्यांग व्यक्तियों को लेकर समाज की सोच तेजी से बदल रही है। आज दिव्यांगजन केवल अपने अधिकारों के प्रति जागरूक ही नहीं हैं, बल्कि शिक्षा, रोजगार, खेल, राजनीति और सामाजिक क्षेत्र में भी अपनी अलग पहचान बना रहे हैं।

बावजूद इसके, समाज में अब भी कुछ लोग दिव्यांग व्यक्तियों को कमजोर समझने की गलती करते हैं और उनके साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार करते हैं। ऐसे लोगों को चेतावनी देते हुए भाजपा नेता एवं समाजसेवी अमोल वालके ने कहा है कि दिव्यांगों के अधिकारों का उल्लंघन केवल नैतिक रूप से गलत नहीं बल्कि कानूनन अपराध भी हो सकता है।

अमोल वालके ने कहा कि आज का दिव्यांग व्यक्ति आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। शारीरिक चुनौतियों के बावजूद उनका साहस, आत्मविश्वास और संघर्ष उन्हें समाज के लिए प्रेरणास्रोत बनाता है।

कई दिव्यांगजन ऐसे क्षेत्रों में सफलता हासिल कर रहे हैं जहां सामान्य व्यक्ति भी पहुंचने का सपना देखते हैं। इसके बावजूद कुछ लोग उनका मजाक उड़ाते हैं, उनका अपमान करते हैं या उन्हें कमतर आंकने की कोशिश करते हैं, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि सरकारी कार्यालयों, निजी संस्थानों और सार्वजनिक स्थानों पर कई बार दिव्यांग व्यक्तियों के साथ ऐसा व्यवहार किया जाता है जो उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाता है। ऐसे मामलों को केवल सामाजिक संवेदनशीलता की कमी नहीं माना जा सकता, बल्कि कई परिस्थितियों में यह कानून का उल्लंघन भी हो सकता है।

दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 क्या कहता है?

अमोल वालके ने लोगों को याद दिलाया कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 (Rights of Persons with Disabilities Act, 2016) दिव्यांग नागरिकों को समान अवसर, सम्मान और सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से बनाया गया है।

यह कानून सुनिश्चित करता है कि किसी भी दिव्यांग व्यक्ति के साथ भेदभाव न हो और उसे समाज के अन्य नागरिकों के समान अधिकार प्राप्त हों।

इस कानून के तहत किसी दिव्यांग व्यक्ति का अपमान करना, उसके साथ भेदभाव करना, उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित करना, उसके अधिकारों को बाधित करना या उसकी शिकायतों को जानबूझकर नजरअंदाज करना गंभीर मामला माना जा सकता है।

दोषी पाए जाने पर हो सकती है कानूनी कार्रवाई

अमोल वालके ने स्पष्ट कहा कि यदि कोई अधिकारी, कर्मचारी या अन्य व्यक्ति किसी दिव्यांग नागरिक के साथ अनुचित व्यवहार करता है, तो पीड़ित व्यक्ति कानून का सहारा ले सकता है।

शिकायत की जांच के बाद दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। कई मामलों में आर्थिक दंड के साथ-साथ जेल की सजा का भी प्रावधान मौजूद है।

उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन किसी की दया के पात्र नहीं हैं बल्कि वे इस देश के समान अधिकार वाले नागरिक हैं। उन्हें शिक्षा, रोजगार, सरकारी योजनाओं, सार्वजनिक सुविधाओं और सम्मानजनक जीवन का पूरा अधिकार प्राप्त है।

यदि कोई व्यक्ति इन अधिकारों को छीनने या बाधित करने का प्रयास करता है, तो उसे कानून का सामना करना पड़ सकता है।

दिव्यांगों के प्रति संवेदनशीलता समाज की जिम्मेदारी

अमोल वालके ने समाज से अपील करते हुए कहा कि दिव्यांगों के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता का व्यवहार अपनाना केवल सामाजिक जिम्मेदारी नहीं बल्कि कानूनी और नैतिक कर्तव्य भी है। एक विकसित और समावेशी समाज वही होता है जहां हर व्यक्ति को समान अवसर और सम्मान मिले।

उन्होंने कहा कि दिव्यांग व्यक्तियों को कमजोर समझने की मानसिकता बदलने की जरूरत है। आज वे अपने अधिकारों के लिए जागरूक हैं और आवश्यकता पड़ने पर कानूनी लड़ाई लड़ने में भी सक्षम हैं।

निष्कर्ष

दिव्यांग व्यक्ति को कमजोर समझना, उसका अपमान करना या उसके अधिकारों का हनन करना केवल सामाजिक अपराध नहीं बल्कि कानूनन भी गंभीर मामला हो सकता है।

दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 ऐसे नागरिकों को सुरक्षा और न्याय प्रदान करता है। इसलिए प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि वह दिव्यांगों का सम्मान करे और उनके अधिकारों की रक्षा में सहयोग दे।

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