
8 अगस्त 2025 | खबर 24 एक्सप्रेस ब्यूरो : राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के बीच नजदीकियां अब जल्द ही एक पार्टनरशिप में बदलने वाली हैं। राजनीतिक पार्टनरशिप। राज ठाकरे MVA का हिस्सा बन सकते हैं।
हाइलाइट्स:
- राज ठाकरे की मनसे अब MVA में हो सकती है शामिल
- BMC और महाराष्ट्र निकाय चुनाव मिलकर लड़ने की रणनीति
- अनिल देशमुख का बड़ा दावा: “ठाकरे ब्रदर्स साथ आए तो जीत तय”
- कांग्रेस, एनसीपी, शिवसेना (UBT) और अब मनसे — एक मंच पर?
राजनीति में नई हलचल: क्या ठाकरे ब्रदर्स फिर साथ?
महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ी सियासी सरगर्मी देखी जा रही है।
पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख ने बयान दिया है कि राज ठाकरे महाविकास आघाड़ी (MVA) का हिस्सा बनने वाले हैं, और उनकी पार्टी मनसे, मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव के साथ-साथ महाराष्ट्र के अन्य निकाय चुनाव भी MVA के साथ मिलकर लड़ने की तैयारी कर रही है।
यह पहला मौका होगा जब मनसे कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना (UBT) के साथ मंच साझा करेगी।
उद्धव-राज फिर एक साथ?
देशमुख ने साफ कहा है कि ठाकरे ब्रदर्स यानी उद्धव और राज जल्द ही गठबंधन कर सकते हैं।
हाल ही में राज ठाकरे ‘मातोश्री’ पहुंचे, उद्धव ठाकरे के जन्मदिन पर उनसे सार्वजनिक मुलाकात की।
कुछ समय पहले राज ठाकरे ने एक मंच पर कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना (UBT) के नेताओं के साथ मौजूदगी दर्ज कराई थी।
राजनीतिक संकेत अब बहुत साफ हैं — मनसे MVA में शामिल होने की औपचारिक प्रक्रिया की ओर बढ़ रही है।
BMC में 100% कब्जे का दावा
अनिल देशमुख का कहना है कि अगर ठाकरे ब्रदर्स साथ आए, तो बीएमसी में महाविकास आघाड़ी का 100% कब्जा हो सकता है।
इस गठबंधन का असर केवल बीएमसी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह पूरे महाराष्ट्र में निकाय और विधानसभा चुनावों की रणनीति को भी नया आकार देगा।
इंडिया गठबंधन में MNS की एंट्री?
अब बड़ा सवाल ये है कि क्या उद्धव ठाकरे इंडिया अलायंस में राज ठाकरे को भी शामिल करवाएंगे?
संजय राउत पहले ही बता चुके हैं कि उद्धव ठाकरे दिल्ली में होने वाली इंडिया गठबंधन की मीटिंग में हिस्सा लेने वाले हैं।
अगर ऐसा होता है, तो ये न केवल बीजेपी के लिए एक चुनौतीपूर्ण मोड़ होगा, बल्कि विपक्ष को एक मजबूत मोर्चा भी मिल सकता है।
राज ठाकरे का बदला रुख
2024 लोकसभा चुनावों में राज ठाकरे की पार्टी ने नरेंद्र मोदी को समर्थन दिया, लेकिन खुद चुनाव नहीं लड़ा।
अब विधानसभा में खराब प्रदर्शन के बाद, राज ठाकरे फिर से उद्धव के करीब आते दिख रहे हैं, और अब औपचारिक रूप से MVA का हिस्सा बनने की कगार पर हैं।
हिंदी-मराठी विवाद पर भी बयान
देशमुख ने कहा कि मराठी भाषा का सम्मान अनिवार्य है और जो लोग महाराष्ट्र में रहते हैं, उन्हें मराठी भाषा अपनानी चाहिए।
उन्होंने हिंसा की घटनाओं का कारण संवाद और समझौते की कमी बताया।
बड़े सवाल जो अब उठ खड़े हुए हैं:
- क्या मनसे अब महाविकास आघाड़ी का स्थायी हिस्सा बनेगी?
- क्या कांग्रेस और एनसीपी इस नई साझेदारी को खुले दिल से स्वीकार करेंगी?
- क्या ठाकरे ब्रदर्स का गठबंधन BJP को BMC में पीछे छोड़ देगा?
- क्या MVA एक नया राजनीतिक मॉडल बन सकता है महाराष्ट्र में?
निष्कर्ष:
राज ठाकरे का MVA में शामिल होना अब लगभग तय माना जा रहा है।
BMC के साथ-साथ महाराष्ट्र के सभी निकाय चुनाव एकजुट होकर लड़ने की तैयारी तेज़।
अनिल देशमुख के बयान ने महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा बदल दी है।
अब देखना यह है कि ठाकरे ब्रदर्स की जोड़ी महाराष्ट्र की सत्ता में क्या नया इतिहास रचती है?
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