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गाजियाबाद में हर्षवर्धन जैन चला रहा था नकली दूतावास, लक्जरी गाड़ियों का बेड़ा, कई नकली देश, नकली डिप्लोमेट

गाज़ियाबाद के पॉश इलाके में एक आलीशान कोठी… बाहर डिप्लोमैटिक नंबर प्लेट लगी लग्जरी गाड़ियां… और अंदर चल रहा था एक पूरा फर्जी दूतावास!
हैरानी की बात ये है कि ये दूतावास उस देश का था… जो इस धरती पर है ही नहीं!

देश की राजधानी से सटे गाजियाबाद में मिला एक फर्जी देश!
कोठी के अंदर चल रहा था नकली दूतावास, और बाहर खड़ी थीं डिप्लोमैटिक नंबर प्लेट वाली लग्जरी गाड़ियां!”
“एक शातिर दिमाग… जिसने बनाए ऐसे देश, जिनका कोई वजूद ही नहीं!”


“पासपोर्ट नकली, मुहरें नकली, पद नकली… लेकिन ठगी असली – और वो भी करोड़ों की!”
“यूपी एसटीएफ के छापे में खुली देश की अब तक की सबसे बड़ी ‘डिप्लोमैटिक धोखाधड़ी’!”
मास्टरमाइंड निकला हर्षवर्धन जैन, जिसने न केवल लोगों को धोखा दिया बल्कि केंद्र की मोदी सरकार तक को धोखा दे दिया।

गाजियाबाद में यूपी एसटीएफ ने एक ऐसे गैंग का भंडाफोड़ किया है जो खुद को विदेशों का राजदूत बताकर लोगों को ठग रहा था। ये मामला जितना चौंकाने वाला है, उतना ही बड़ा एक इंटरनेशनल फ्रॉड भी लगता है।
यूपी एसटीएफ नोएडा यूनिट ने गाजियाबाद के कविनगर इलाके में स्थित एक आलीशान कोठी पर छापा मारा। यहां से मिला एक फर्जी दूतावास! इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड है हर्षवर्धन जैन, जो खुद को वेस्ट आर्कटिका, लॉडोनिया, पॉल्विया जैसे काल्पनिक देशों का राजदूत बताता था।

लेकिन असली खुलासा तब हुआ जब पुलिस को उसके पास से ये सामान मिला:

  • 4 लग्जरी गाड़ियां, जिन पर डिप्लोमैटिक नंबर प्लेट लगी थीं
  • 12 नकली डिप्लोमैटिक पासपोर्ट
  • विदेश मंत्रालय की जाली मुहरें
  • फर्जी प्रेस कार्ड और पैन कार्ड
  • 44 लाख 70 हजार रुपये कैश
  • कई देशों की विदेशी मुद्रा
  • 34 अलग-अलग फर्जी मुहरें
  • और 18 डिप्लोमैटिक नंबर प्लेट

हर्षवर्धन का नेटवर्क सिर्फ दिखावे तक सीमित नहीं था। जांच में सामने आया है कि उसका संपर्क इंटरनेशनल आर्म्स डीलर अदनान खगोशी और विवादित चंद्रास्वामी से भी रहा है।

इतना ही नहीं, वो प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के साथ मॉर्फ की हुई तस्वीरें दिखाकर लोगों को विदेश में नौकरी दिलाने का झांसा देता था। फर्जी दूतावास की आड़ में करोड़ों का खेल चल रहा था।

अब सवाल ये है कि इतने सालों तक ये खेल कैसे चलता रहा? क्या इसके तार किसी बड़े नेटवर्क से जुड़े हैं? और क्या हर्षवर्धन जैन अकेला ही इस पूरे रैकेट को चला रहा था?

आपको क्या लगता है – क्या ये मामला सिर्फ ठगी का है या इसके पीछे कोई और बड़ा राज छिपा है?
अपनी राय हमें कॉमेंट में जरूर बताएं, वीडियो को शेयर करें और चैनल Khabar 24 Express को सब्सक्राइब करना न भूलें।

ब्यूरो रिपोर्ट : खबर 24 एक्सप्रेस


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