
विजय माल्या ने किया बड़ा खुलासा, बोला- ‘अरुण जेटली को बताकर भारत से गया था’, भाजपा पर विपक्ष का तीखा हमला
* विजय माल्या ने कहा – विदेश भागने से पहले अरुण जेटली को दी थी जानकारी
* विपक्ष ने बीजेपी पर साधा निशाना – क्या सरकार ने भगाया विजय माल्या को?
* कुल 9,000 करोड़ रुपये लेकर भागा था माल्या
* बैंक डिफॉल्टर होने के बावजूद देश से निकलने में कैसे मिली अनुमति?
* भाजपा बैकफुट पर, कांग्रेस ने उठाए सवाल
एक समय भारत का ‘किंग ऑफ गुड टाइम्स’ कहलाने वाला उद्योगपति विजय माल्या, आज देश का सबसे बड़ा आर्थिक भगोड़ा बन चुका है। लेकिन अब उसने एक ऐसा बयान दिया है, जिसने भारत की राजनीति को हिला कर रख दिया है।

*“मैं अरुण जेटली को बताकर गया था लंदन” – विजय माल्या का दावा*
विजय माल्या ने अपने एक बयान में कहा है कि वह जब भारत छोड़ने वाला था, उससे पहले उसने तत्कालीन वित्त मंत्री *अरुण जेटली* से मुलाकात की थी और उन्हें अपनी योजना के बारे में बताया था। इस बयान ने जैसे ही तूल पकड़ा, विपक्षी दलों ने बीजेपी पर तीखा हमला बोल दिया।
*कितना पैसा लेकर भागा विजय माल्या?*
विजय माल्या पर भारत के कई बैंकों से लगभग *9,000 करोड़ रुपये* का लोन लेकर धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है। उसने किंगफिशर एयरलाइंस के नाम पर बैंकों से ऋण लिया और उसे कभी चुकाया नहीं।
*वह अभी कहां है?*
विजय माल्या फिलहाल *लंदन (यूके)* में है और भारत सरकार लगातार उसके प्रत्यर्पण की कोशिश कर रही है। ब्रिटेन की अदालतों में कानूनी लड़ाई जारी है, लेकिन अभी तक उसे भारत नहीं लाया जा सका है।
*वह देश से बाहर कैसे गया?*

इस पूरे मामले में बड़ा सवाल यह उठता है – जब उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस था, जब वह डिफॉल्टर घोषित हो चुका था, तब भी उसे देश छोड़ने की अनुमति कैसे मिली?
यहां माल्या का यह बयान महत्वपूर्ण हो जाता है कि उसने *अरुण जेटली* को इस बात की जानकारी दी थी। अगर यह सच है, तो इसका मतलब क्या सरकार को उसकी भागने की योजना पता थी?
*क्या भाजपा ने दी भगाने में मदद?*
विपक्ष, खासकर *कांग्रेस* ने इसे लेकर भाजपा पर हमला तेज कर दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष ने पूछा –
> “क्या भाजपा सरकार ने जानबूझकर माल्या को भगाया? क्या यह एक सोची-समझी साजिश थी?”
*भाजपा का बचाव और प्रतिक्रिया*
भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि माल्या संसद में वित्त मंत्री से टकराया था, और यह ‘बिना बुलाए की मुलाकात’ थी। पार्टी ने दावा किया कि सरकार ने माल्या के खिलाफ सभी कानूनी कार्रवाई की, और उसकी संपत्तियां जब्त की गईं।
वहीं विजय माल्या का यह बयान सिर्फ एक भगोड़े का बयान नहीं है, यह सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल भी उठाता है। क्या एक ताकतवर बिजनेसमैन राजनीतिक संबंधों के बल पर कानून से बच निकला?
यह मामला सिर्फ एक आर्थिक घोटाले तक सीमित नहीं रहा, अब यह भारत की लोकतांत्रिक जवाबदेही और पारदर्शिता की परीक्षा बन चुका है।
*कैप्शन सुझाव (सोशल मीडिया के लिए)*
> *“9,000 करोड़ लेकर भागा और कहा – जेटली को बताया था! क्या विजय माल्या को भगाने में सरकार भी शामिल थी?”*
वहीं बता दें कि विजय माल्या की तरह ही एक और बड़ा नाम सामने आया – ललित मोदी, जो IPL के पूर्व कमिश्नर और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपी हैं।
2015 में यह खुलासा हुआ कि भारत की तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने निजी आधार पर ललित मोदी को ट्रैवल डॉक्युमेंट दिलाने में मदद की थी, जिससे वे पुर्तगाल में अपनी बीमार पत्नी का इलाज कराने जा सकें।
सुषमा स्वराज की बेटी बंसुरी स्वराज, जो एक सुप्रीम कोर्ट की वकील हैं, ललित मोदी के केस में उनकी कानूनी प्रतिनिधि थीं।
विपक्ष ने इस बात पर सवाल उठाए कि क्या यह ‘कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट’ नहीं है कि एक भगोड़े को विदेश मंत्री की बेटी कानूनी सलाह दे रही हैं, और विदेश मंत्री स्वयं उसके ट्रैवल दस्तावेजों के लिए दखल दे रही हैं?
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