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राजस्थान में किसी भी वक़्त गिर सकती है कांग्रेस की गहलोत सरकार? बीजेपी लॉकडाउन में भी विधायकों को खरीदने में रही सफल?

राजनीति एक खेल की तरह है, कब पाशा पलट जाए ये किसी को नहीं पता होता है। मध्यप्रदेश के बाद अब राजस्थान में एक स्थिर सरकार अस्थिर होने जा रही है। या यूँ कहे कि लगभग हो चुकी है। बस औपचारिक ऐलान बाकी है। मतलब एक बार फिर लोकतंत्र की हत्या होते देश देखेंगा। बिहार, अरुणाचल प्रदेश, गोवा, कर्नाटक और मध्यप्रदेश के बाद अब राजस्थान में लोकतंत्र की हत्या होने जा रही है। बीजेपी ने जो राजनीतिक चाल राजस्थान में चली वो उसमें जीतती नज़र आ रही है। मतलब साफ है, बीजेपी को भले समर्थन न मिला हो, चुनावों में जीत न मिली हो लेकिन बीजेपी किसी भी कीमत पर अपनी सरकार बना सकती है ये उसने 2014 के बाद कई बार साबित किया है।

मध्यप्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया के बाद राजस्थान में सचिन पायलट अपनी पार्टी से बगावत करते नज़र आ रहे हैं। उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट की मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से नाराजगी कई बार साफ़ तौर पर देखने को मिली। बीजेपी काफी वक्त से सचिन पायलट पर डोरे डाल रही थी लेकिन इस बार वो सफल होती नजर आ रही है।

बता दें कि ज्योतिरादित्य सिंधिया और सचिन पायलट कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के सबसे करीबियों में से हैं। यानि ये दोनों राहुल गांधी के अच्छे मित्र भी माने जाते हैं। पहले सिंधिया ने राहुल को अलविदा कहा और अब सचिन पायलट अपने विमान को बीजेपी की तरफ लेकर जा रहे हैं। राहुल गांधी एक बार फिर आपने दोस्तों और नेताओं को मनाने में असफल होते दिख रहे हैं।

कर्नाटक में कांग्रेस के कद्दावर नेता बीजेपी को अपने एमएलए खरीदने से रोकने में असफल हो चुके हैं वहीं मध्यप्रदेश में राजनीति के बड़े जानकर व कद्दावर नेता कमलनाथ इसी खेल का शिकार हो चुके हैं। राजस्थान में गहलोत अपनी सरकार बचाने में सफल होते हैं कि नहीं, यह देखना दिलचस्प रहेगा।

अशोक गहलोत अपने नेताओं मंत्रियों की नाराजगी दूर नहीं कर पाए या यूँ कहें कि वो कर्नाटक और मध्यप्रदेश से सबक नहीं ले पाए। अशोक गहलोत को सचिन पायलट से बात करनी चाहिए थी। अपने रूठे नेताओं को मनाना चाहिए था।

ख़ैर गिद्ध से मास की रखवाली बड़ी मुश्किल से होती है…. बीजेपी के पास धन, बल, बाहुबल सब कुछ है। इन सबमें जो सबसे बड़ी बात है तो वो है राहुल और सोनिया गांधी की चुप्पी, जो कहीं न कहीं कांग्रेस की कमजोरी को साबित करती है।

बता दें कि राजस्थान विधानसभा की 200 सीटों में से फिलहाल कांग्रेस के अपने 107 विधायक हैं। इसके अलावा उनके पास निर्दलीय और कुछ अन्य छोटे दलों के विधायकों का समर्थन मिलाकर यह नंबर 120 तक पहुंचता है। वहीं बीजेपी के 72 विधायक हैं। इसके अलावा उन्हें 3 अन्य छोटे दलों के विधायक का समर्थन है। यानि बीजेपी के पास महज़ 75 विधायक ही हैं। कांग्रेस राजस्थान में अपने बलबूते व पूर्ण समर्थन के साथ सत्ता में है। लेकिन राजस्थान में मध्यप्रदेश की तरह होता दिख रहा है।

राजस्थान की राजनीति में मध्यप्रदेश जैसे हालात बनते हुए दिख रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के समर्थक विधायक रविवार देर रात को ही इस्तीफा दे सकते हैं। बताया जा रहा है कि सचिन पायलट के समर्थक विधायकों ने कहा है कि वह रविवार देर रात में ही राजस्थान विधानसभा के स्पीकर सीपी जोशी को इस्तीफा सौंप देंगे।

सूत्रों का कहना है कि सचिन पायलट के समर्थन में कांग्रेस के करीब 30 विधायक हैं। इसके अलावा कुछ निर्दलीय विधायक भी उनके समर्थन में आ सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि 30 में से करीब 12-15 विधायक रात में ही इस्तीफा दे सकते हैं।

उधर, वरिष्ठ कांग्रेस नेता अजय माकन, पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला और राजस्थान कांग्रेस के प्रभारी अविनाश पांडेय दिल्ली से जयपुर पहुंच गए हैं। तीनों नेता डैमेज कंट्रोल में जुट गए हैं। ये लोग मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ बैठक कर रहे हैं। दिल्ली एयरपोर्ट पर अविनाश पांडेय ने कहा था कि उनकी राजस्थान में कांग्रेस की सरकार को कोई खतरा नहीं है, लेकिन जयपुर इसी दौरान उन्होंने ये भी कहा था कि सचिन पायलट से उनकी बात नहीं हो पा रही है। जयपुर पहुंचने के बाद अविनाश पांडेय के बयान में बदलाव दिखा। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने कांग्रेस पर आक्रमण कर दिया है। इस मुश्किल वक्त में हमें आपसी बातचीत से बातों को सुलझाना होगा।

राजनीतिक गहमागहमी के बीच सूत्रों के हवाले से खबर आई कि दिल्ली में सचिन पायलट और ज्योतिरादित्य सिंधिया की मुलाकात हुई है। दोनों नेताओं के बीच करीब 30 मिनट तक बातचीत हुई है। हालांकि इसपर आधिकारिक बयान नहीं आया है। इस मुलाकात के बाद सिंधिया ने ट्वीट में कहा है कि उन्हें अपने दोस्त की हालत पर तरस आ रहा है। पायलट को सीएम गहलोत दबाने की कोशिश कर रहे हैं। इससे पता चलता है कि कांग्रेस में टैलेंट और क्षमता का कोई महत्व नहीं है।

सचिन पायलट का गहलोत के खिलाफ हल्ला बोल
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोमवार सुबह 10:30 बजे विधायकों और मंत्रियों की बैठक बुलाई है। उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने इस बैठक में आने से मना कर दिया है। उनके इस फैसले के बाद से ही माना जा रहा है कि सचिन पायलट ने ज्योतिरादित्य सिंधिया की तरह बगावती सुर अपना लिया है।

रिपोर्ट : जगदीश जी तेली
ब्यूरो चीफ : राजस्थान, खबर24 एक्सप्रेस


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