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गोंदिया भंडारा लोकसभा चुनाव 2019 एनसीपी के उम्मीदवार नाना पंचबुद्धे की जीत की राह हो रही है आसान, जानें कैसे

गोंदिया भंडारा लोकसभा सीट इस वक़्त काफी चर्चा का विषय बनी हुई है। चर्चा भी इसलिए क्योंकि इस सीट पर मुकाबला कड़ा है। एनसीपी के बड़े नेता छगन भुजबल ने अपने प्रत्याशी के पक्ष में वोट अपील की।

भंडारा-गोंदिया में लोकसभा चुनाव के लिए 11 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। इस सीट पर एनसीपी की ओर से पंचबुद्धे नाना जयराम मैदान में हैं तो बीजेपी ने सुनील बाबूराव मेढे को टिकट दिया है। बहुजन समाज पार्टी ने यहां से डॉ. विजया राजेश नंदुरकर को उतारा है। यहां मुकाबला एनसीपी कांग्रेस के संयुक्त उम्मीदवार नाना पंचबुद्धे और बीजेपी के उम्मीदवार सुनील बाबूराव मेढे के बीच है। इस सीट की सबसे खास बात यह है कि इस सीट पर 2014 में बीजेपी ने कब्जा किया था लेकिन बीजेपी के सांसद नाना भाऊ पटोले ने इस्तीफा दे दिया और वो कांग्रेस में शामिल हो गए। इसके बाद इस सीट पर उपचुनाव हुआ, और उपचुनाव में एनसीपी ने सीट वापस अपने नाम कर ली।
इस सीट पर भाजपा के लिए फिर से मुसीबत हो सकती है क्योंकि पिछली बार एनसीपी के उम्मीदवार ने उपचुनाव में बाजी मार ली थी। दूसरा भाजपा के बड़े नेता जिनकी छवि किसान नेता के रूप में हैं वे भाजपा से अलग होकर निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। राजेन्द्र पटले की जीत की डगर तो मुश्किल है लेकिन ऐसे में वे भाजपा के अच्छे खासे वोट काट देंगे। ऐसा होने पर इसका सीधा फायदा एनसीपी को मिलेगा।

एनसीपी के गोंदिया भंडारा से उम्मीदवार नाना पंचबुद्धे की जीत की राह आसान दिखाई पड़ रही हैं। गोंदिया भंडारा की पब्लिक से जब हमारे संवाददाता अनमोल पटले ने पूंछा तो वहां के लोगों की राय भी यही है कि नाना पंचबुद्धे की जीत आसान हो सकती है।

इस सीट का इतिहास जान लें :
2014 के लोकसभा चुनाव में यहां से बीजेपी की टिकट पर नाना पटोले जीते थे, उन्होंने राष्ट्रवादी कांग्रेस (एनसीपी) के दिग्गज नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रफुल्ल पटेल को हराया था। लेकिन पार्टी आलाकमान से नाराजगी के चलते नाना पटोले ने पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया था।

उनके इस्तीफे के बाद यहां हुए उपचुनाव में राष्ट्रवादी कांग्रेस (एनसीपी) के मधुकर राव कुकड़े चुनाव जीते। उन्होंने बीजेपी के हेमंत पटेल को हराया। वहीं, अब नाना पटोले इस्तीफा देकर कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं।

यहां 2009 में बाजी पलट गई. एनसीपी के उम्मीदवार प्रफुल्ल पटेल ने बाजी मारी और उनके प्रतिद्वंदी निर्दलीय उम्मीदवार नाना पटोले को चुनाव हराया।
दिलचस्प बात यह है कि 2009 के लोकसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार होने के बावजूद नाना पटोले यहां दूसरे स्थान पर रहे जबकि बीजेपी के शिशुपाल तीसरे स्थान पर रहे।


रिपोर्ट : अनमोल पटले, (गोंदिया ब्यूरो – खबर 24 एक्सप्रेस)


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