2019 की महाजंग के महज कुछ ही दिन बचे हैं।
आचारसंहिता लगी हुई है। बैनर पोस्टर उतर चुके हैं। समाचार पत्रों से काम का बखान खत्म हो चुका है।
नेता अब बस रैलियां करके अपने झूंठे-सच्चे कार्यों का बखान चीख-चीखकर कर रहे हैं। तो उधर कुछ विशेष न्यूज़ टीवी चैनल भी उनके इस कार्य में हाथ बटा रहे हैं।

एक तरफ भाजपाई मोदी की जीत के प्रति आश्वस्त होकर इस बार की जीत को महाजीत यानि बम्पर जीत बता रहे हैं। हर कोई कह रहा है कि “आएगा तो मोदी ही।” उधर नरेंद्र मोदी भी कह रहे हैं कि वे एक बार फिर देश की चौकीदारी के लिए तैयार हैं। उन्होंने वाकायदा अपने नाम से पहले #चौकीदारनरेंद्रमोदी लगा लिया है।
खैर ये तो बात हुई मोदी समर्थकों के सपनों की…. अब हम बात करते हैं राजनीतिक पंडितों की।
तो आपको बता दें कि इस बार राजनीतिक पंडितों की सोच भी बंटी हुई है। कोई कह रहा है कि भाजपा 400 के पार जाएगी, कोई 240-250 के बीच में रोक रहा है, कोई 250-300 बताकर फिर से नरेंद्र मोदी को पीएम बना रहा है।
लेकिन राजनीतिक पंडितों का एक धड़ा ऐसा भी है जो भाजपा को 200 के पार नहीं पहुंचा रहा है। राजनीतिक पंडितों का कहना है कि अगर मतदान से ठीक पहले विपक्ष ने मिलकर अपने कार्यकर्ताओं को मजबूत कर दिया और पंजाब, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, राजस्थान की तरह उन्हें बूथों पर मजबूती से देखभाल के लिए छोड़ दिया तो भाजपा ही नहीं बल्कि एनडीए मिलकर भी 200 का आंकड़ा पार नहीं कर पायेगी।
राजनीतिक पंडितों का मानना है कि विपक्ष का बूथ मैनेजमेंट कमजोर रहा है। लेकिन इस बार विपक्ष बूथ मैनेजमेंट पर मजबूती के साथ काम कर रहा है। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, बसपा, टीएमसी इत्यादि पार्टियों ने तो अपने कार्यकर्ताओं को ट्रेनिंग देनी शुरू कर दी है। उधर कांग्रेस में प्रियंका गांधी के जॉइन करने से भी भाजपा को तगड़ा झटका लगा है, खुद पीएम मोदी इस बात को मानते हैं और कई मौकों पर कांग्रेस को इस बात के लिए निशाने पर ले चुके हैं।
लोकसभा चुनाव जैसे-जैसे करीब आ रहे हैं, करोड़ों लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि क्या नरेंद्र मोदी दूसरी बार प्रधानमंत्री बनेंगे? 6 महीने पहले यह बात पक्की लग रही थी, लेकिन अब इस पर बहुत धुंधला सा सवालिया निशान लग गया है।
सवालिया निशान की वजह हैं खुद पार्टी के नेता जिनका भाजपा ने टिकट काटा है। 40 % मौजूदा सांसदों के टिकट भाजपा ने काट दिए हैं। उधर सहयोगी दलों को खुश करने के चक्कर में भाजपा ने अपनों को नाराज कर दिया है। उधर सहयोगी दल अब भी सन्तुष्ट नहीं हैं।
यह खबर भी पक्की है कि मोदी-शाह की जोड़ी से आरएसएस भी खुश नहीं है। कुछ दिन पहले तक आरएसएस के इशारे पर नितिन गडकरी मोदी के बारे में खुलकर बोलते नज़र आये थे। लेकिन सब कुछ सुलझा लेने का दावा करने वाले अमित शाह की असली चुनौती अपने खुद तो विपक्ष का मजबूत बूथ मैनेजमेंट भी बन रहा है।
हालिया दिनों में देखा गया था कि कांग्रेस के पास धन की कमी हो गयी थी लेकिन सुना है अब वह भी दूर हो गयी है और कांग्रेस भी भाजपा की तरह लोकसभा चुनाव 2019 के चुनावों में पैसा बहा रही है।
लेकिन फिर भी हमारी भविष्यवाणी कहती है कि एनडीए 340-350 सीटें भी हासिल कर सकता है। इसकी वजह लोगों में मोदी के प्रति दीवानगी।
जो भी हो “कौन बनेगा प्रधानमंत्री” की इस बार की जंग दिलचस्प होगी और इस महायुद्ध का फैसला 23 मई को हो जाएगा।
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