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डॉ॰ भीमराव आम्बेडकर के पौत्र प्रकाश आंबेडकर का मुकाबला भाजपा से नहीं बल्कि कांग्रेस-एनसीपी से, महाराष्ट्र में भाजपा का फायदा तो कांग्रेस एनसीपी की बढ़ीं मुश्किलें

महाराष्ट्र लोकसभा सीटों में देश का दूसरा बड़ा राज्य माना जाता है। यूपी के बाद महाराष्ट्र में लोकसभा की सबसे ज्यादा सीटें हैं। महाराष्ट्र में लोकसभा की 48 सीटें हैं। और इस लिहाज से सभी राजनीतिक पार्टियों की नज़र महाराष्ट्र की सीटों पर भी होती है।

महाराष्ट्र में शिवसेना, भाजपा, एनसीपी और कांग्रेस को मजबूत माना जाता है वहीं ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम भी सेंधमारी करने में कामयाब रही है।

एआईएमआईएम की महाराष्ट्र में एक और बड़ी कामयाबी मानी जा रही है क्योंकि एआईएमआईएम ने महाराष्ट्र में भारत रत्न बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के पोते प्रकाश आंबेडकर को मना लिया है और ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम प्रकाश आंबेडकर के साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं।

बता दें कि कांग्रेस-एनसीपी ने प्रकाश आंबेडकर को मनाने की खूब कोशिश की थी लेकिन बात नहीं बनी और बाजी मार ले गए ओवैसी।
प्रकाश आंबेडकर ने औवेसी का साथ देकर कांग्रेस एनसीपी की मुश्किलें बढ़ा दीं। इससे भाजपा का तो नहीं बल्कि कांग्रेस एनसीपी गठबंधन का अच्छा खासा नुकसान करा दिया है।
मुस्लिम और पिछड़ी जातियों के वोट बंट जाएंगे लेकिन भाजपा का वोट प्रतिशत बढ़ जाएगा। भले भाजपा को थोड़ा बहुत नुकसान हो लेकिन जितना नुकसान कांग्रेस एनसीपी को होगा इतना भाजपा को होता नजर नहीं आ रहा है।

नेता दबी जुबान में इसको भाजपा, एआईएमआईएम और प्रकाश आंबेडकर का आपसी गुपचुप (Hidden) गठबंधन बता रहे हैं।

बता दें कि प्रकाश आंबेडकर अपनी वंचित बहुजन आघाडी के 37 उम्मीदवारों की घोषणा कर कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन को बड़ा झटका दे दिया है। प्रकाश आंबेडकर ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के साथ मिलकर महाराष्ट्र में चुनाव लड़ रहे हैं। इन दोनों ने पिछड़ी जातियां धनगर, कुनबी, माली, बौद्ध, मातंग, कोली, आगरी, भील आदि को शामिल कर कांग्रेस-एनसीपी की चिंता बढ़ा दी है। क्योंकि ये वर्ग सबसे ज्यादा कांग्रेस-एनसीपी का वोटर रहा है।

भले आंबेडकर और औवेसी की पार्टी लोकसभा चुनाव में ज्यादा सफलता हासिल न करे, बेशक 1-2 सीटें जीतने में सफल हों लेकिन वह कांग्रेस और एनसीपी का गणित बिगाड़ कर रख सकते हैं। ये दोनों मिलकर कांग्रेस-एनसीपी के प्रत्याशियों के वोट जरूर काटेंगे। आंबेडकर ने सूची में उम्मीदवारों के नाम के साथ उनकी जातियां के नाम भी अंकित किए हैं। वंचित बहुजन आघाडी की पहली सूची में प्रकाश आंबेडकर का नाम नहीं आया है।

आंबेडकर खुद सोलापुर या अकोला लोकसभा सीट से चुनाव लड सकते हैं। आंबेडकर बाकी सीटों के लिए प्रत्याशियों की सूची 4 दिन के अंदर जारी कर सकते हैं।

प्रकाश आंबडेकर ने प्रत्याशियों के नामों का ऐलान करने के बाद कहा कि हम परिवारवाद और जातीय वर्चस्व को तोडने का प्रयास कर रहे हैं। यदि यह सफल हो जाएगा तो आने वाले समय में भारत में राजनीति दल इस नीति पर आगे चलेंगे। आंबेडकर ने बताया कि भाजपा विरोधी गठबंधन में शामिल होने के लिए कांग्रेस के साथ कोई बातचीत नहीं की जाएगी।

वहीं कांग्रेस ने प्रकाश आंबेडकर पर चुप्पी साध ली है तो भाजपा नेता चुटकी लेने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
लेकिन एनसीपी के कुछ नेता दबी जुबान में इसको भाजपा, एआईएमआईएम और प्रकाश आंबेडकर का गुपचुप गठबंधन करार दे रहे हैं।
जो भी हो 23 मई को सब स्पष्ट हो जाएगा कि भाजपा को फायदा मिल रहा है या कांग्रेस-एनसीपी का नुकसान हो रहा है।

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वनिता ठाकरे, महाराष्ट्र
खबर 24 एक्सप्रेस


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