श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज आज एक मंदिर के इतिहास के बारे में बता रहे हैं जो बुलंदशहर में स्थित है। मंदिर काफी प्राचीन है और इस मंदिर का नाम राजराजेश्वर मंदिर पड़ा।
इस मंदिर के इतिहास और बुलंदशहर के इतिहास के बारे में स्वामी सत्येंद्र सत्यसाहिब जी महाराज बता रहे हैं।
बुलंदशहर:- राजराजेश्वर मंदिर जनपद ही नहीं, बल्कि सदूर के जनपदों में भी प्रसिद्ध है। सावन और महाशिवरात्रि आदि पर्व पर दूर-दूर से आए शिवभक्त गंगा जी स्व कांवड़ लाकर यहां चढ़ाते हैं। कहा जाता है कि जो भी सच्चे मन से बाबा के दरबार में मन्नत मांगता है। उसकी सभी मुरादें पूरी होती हैं। श्रावण मास में प्रतिदिन”राजराजेश्वर महादेव शिवलिंग” पर हजारों श्रद्धालु जलाभिषेक करने के लिए पहुंचते हैं।
-इतिहास:-
यह सैकड़ों वर्ष पुराना मंदिर है। बताया जाता है कि यह नागाओं ने ही इस मंदिर की स्थापना की थी। हालांकि इसकी प्रमाणिक जानकारी नहीं है कि शिव¨लग को स्थापित किया गया या शिवलिंग स्वयं प्रकट हुआ है। मंदिर की मुख्य पुजारी का कहना है कि जो भी यहां सच्चे मन से “राजराजेश्वर महादेव शिवलिंग” पर शिव मंत्र जपते हुए दूध की धार व फल चढ़ाता है। उसकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। शिवलिंग पर चढ़ने वाले दूध की खीर बनाकर भक्तों में वितरित किया जाता है।
गंगा और यमुना नदी के मध्य स्थित बुलन्दशहर का इतिहास लगभग 1200 वर्ष पुराना है। बुलन्दशहर की स्थापना राजा अहिबरन ने की थी। बुलन्दशहर पर उन्होंने बरान टॉवर की नींव रखी थी। हस्तिनापुर के पतन के पश्चात् अहर जो कि बुलन्दशहर के उत्तर-पूर्व पर स्थित है पाण्डवों के लिए महत्त्वपूर्ण जगह रही है। कुछ समय बिताने के बाद पांडव वंशज राजा परम ने इस क्षेत्र में एक क़िले का निर्माण किया था।
अन्य ऐतिहासिक साक्ष्यों के आधार पर यह प्रमाण भी मिलता है कि ‘अहार’ तोमर सरदार परमाल ने बुलन्दशहर को बसाया था।और यहाँ अनेक मन्दिरों भूतेश्वर,काली आदि की स्थापना और राजराजेश्वर मंदिर आदि का जीर्णोद्धार कराया था। पहले यह स्थान ‘वनछटी’ यानि वरनावर्त क्षेत्र भी कहलाता था।यहीं पांडवो ने यक्ष से प्रश्न किये और युधिष्ठर महाराज के सही उत्तर पाकर उन्होंने उन्हें वरदान दिया, और यमराज ने उन्हें उनके भाग्य के अभी अवरोधों को मिटाने के लिए शनिदेव की उपासना करने का आदेश दिया,जो पण्डवों ने जहाँ आज भगवान शनिदेव का मंदिर कचहरी में बना है और साथ ही पांडवों ने यहाँ एक ऊँचे टीले पर महादेव के शिवलिंग की स्थापना करके उनकी पूजाकर उन्हें प्रसन्न करके राजाधिराज होने का वरदान पाया था। उनके द्धारा पूज्य ये महादेव शिवलिंग ही राजराजेश्वर के नाम से विख्यात हुआ। उत्तर कालांतर में नागों के राज्यकाल में इसका नाम ‘अहिवरण’ भी रहा।अहिवरण ने भी इस स्थान पर तपस्या करके भगवान शिव से वरदान पाये और सहस्त्रों वर्ष राज्य किया।यो इस स्थान पर बसे इस नगर को ‘ऊँचनगर’ कहा जाने लगा, क्योंकि यह एक ऊँचे टीले पर बसा था।बाद के काल में इस ऊँचे टीले को बुलंद टीले पर बसे शहर को मुस्लिम शासन काल में इसी का पर्याय बुलन्दशहर नाम प्रचलित कर दिया गया। यहाँ यवन राजा ‘अलक्षेंद्र’ (सिकन्दर) के सिक्के भी मिले थे। 400 से 800 ई० तक बुलन्दशहर के क्षेत्र में कई बौद्ध बस्तियाँ थीं। 1018 ई० में महमूद ग़ज़नवी ने यहाँ आक्रमण किया था। उस समय यहाँ का राजा ‘हरदत्त’ था।हरिदत्त ने भी राजराजेश्वर का जीर्णोद्धार कराया।बहुत पहले मछंदरनाथ और उनके शिष्य गोरक्षनाथ ने भी यहाँ बुलन्दशहर में तपस्या की और यहाँ राजराजेश्वर शिवलिंग और अन्य स्थलों पर धूनी लगा तपस्या की थी,जो उस कालांतर से अब वर्तमान में अपने नवीन भक्तों के मध्यम से पुनः जाग्रत होकर अनगिनत भक्तों का कल्याण कर रहे है,जिनमें आचार्य मंजीत धर्मध्वज द्धारा प्रतिष्ठित 100 फिट से कुछ कम प्रदेश प्रसिद्ध द्धादश शिवलिंग धाम भी सम्मलित है।आगे चलकर

कालांतर में बुलंदशहर के अनेक मन्दिरों को मुस्लिम शासकों ने इसे छति पहुंचाई और पुनः ये वर्तमान में स्व.चौधरी ब्रह्मसिंह एड.की अध्यक्षता में अनेको प्रतिष्ठित लोगों में मिलकर कमेटी बनाकर इसका पुनः जीर्णोद्धार होकर अपनी बुलन्दियों को प्राप्त है।
राजराजेश्वर महादेव का महामंत्र है:-
ॐ राजराजेश्वर देवाय नमः
बुलंदशहर श्री राजराजेश्वर महादेव का प्रसिद्ध सिद्ध गायत्री मंत्र:-
!! ॐ राजेश्वर विद्यमहे श्री राजेश्वरी धीमही गणेशाये तन्नौ हरि शिवे नमो प्रचोदयात्!!
!!राजराजेश्वर की आरती!!
ॐ जय राजेश्वर देव,स्वामी जय राजेश्वर देव !!
पांडव इष्ट परम् तुम-2,बुलंदशहर के खेव !! ॐ जय राजेश्वर देव..
द्धापर प्रकट ऊँचे टीले,राजा बरनदेव-2..
सावन मास में जल जो चढ़ता,मनवांछित फल पाये-2.,
जो चौदस घी दीप जलाये-2,खोया सब कुछ पाय!! ॐ जय राजेश्वर देव..
पार्वती यहीं सदा विराजे,राजेश्वरी जिनका नाम-2..
करती इच्छा की पूरी-2,राजेश्वर के धाम!! ॐ जय राजेश्वर देव..
गोरख और मछंदर पूजे,कृपा आठों पहर-2..
बुलंद महान महिमा तेरी-2..
तुम्ही बुलंद नाम बुलंदशहर !! ॐ जय राजेश्वर देव..
पंचदेव भैरव बजरंगी,सेवक चोसठ देव-2..
जो करता ये नित्य आरती-2,वर पाता तुम महादेव!!ॐ जय राजेश्वर देव…
[स्वामी सत्येंद्र सत्यसाहिब रचित भगवान राजराजेश्वर देव की आरती व् राजराजेश्वर गायत्री मंत्र सम्पूर्ण]
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जय सत्य ॐ सिद्धायै नमः
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