श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज आज ऐसी ही एक चीज से अवगत करा रहे हैं जिसको करने से घर में न केवल सुख शांति आएगी बल्कि सारे बिगड़े कार्य अपने आप बनते चले जाएंगे।
अधिकतर लोग अपने घरों में मंदिर स्थापना कर लेते हैं लेकिन वो कई बातों को ध्यान में नहीं रखते, जिसकी वजह से उनके परिवार को सकारात्मक प्रभाव की जगह नकारात्मक प्रभाव झेलना पड़ता है।
तो जानते आइये जानते हैं कि घर में मंदिर निर्माण से पहले किन बातों को खास ध्यान में रखना चाहिए।
घर में पूजाघर रूपी मंदिर है, तो इन बातों का अवश्य ध्यान रखें :-
सभी घर में दो प्रकार की ऊर्जा पायी जाती है – पॉजिटिव या धनात्मक यानि शुभ और नेगेटिव या ऋणात्मक यानि अशुभ।और इन्ही दोनों ऊर्जा का जब भी संतुलन बिगड़ जाता है,ठीक तभी आपके घर में बीमारी और अनावश्यक विवाद तथा कार्यों के नहीं बनने और सभी मंगल कार्यों में बांधाये आती और बढ़ती जाती है,और ऋणात्मक शक्ति के घटने या बढ़ने से परिवार की पुरुष शक्ति की हानि होती है और धनात्मक शक्ति के बढ़ने या घटने से परिवार की स्त्री शक्ति को हानि होती है,यो घर में शुभ ऊर्जा के संचार के लिए मंदिर यानि ईश्वरीय शक्ति का होना आवश्यक है।घर में मंदिर या पूजा का स्थान निश्चित होने से सभी तरह की समस्याएँ अपने आप ही दूर हो जाती हैं।
साथ ही इससे घर में आर्थिक समृद्धि बनी रहती है। घर के लोगों में आपसी तालमेल बना रहता है। मंदिर या पूजा स्थान का पूरा लाभ तभी मिल सकता है, जब इसकी स्थापना में नियमों का पालन किया जाए।यो सही विधि से मंदिर की स्थापना करें, देवी-देवताओं की क्रमबद्धता से स्थापना पर ध्यान दें और जप के क्रम से अपने मंदिर या पूजा स्थल को दिव्य शक्ति से जागृत करें।
अपने मंदिर या पूजा स्थान के रंग और स्थान में किन बातों का ध्यान रखें:-
1-सामान्य रूप से अपने पूजा घर या मंदिर घर को ईशान कोण में बनाना चाहिए।
2-यदि किसी कारण से आप ईशान कोण में ऐसा नहीं कर सकते तो, कम से कम पूर्व दिशा में पूजाघर की स्थापना करें।
3-यदि आप ऊपर के फ्लैट में हैं तो केवल सूर्य के प्रकाश का ध्यान रक्खें,की आपके पूजाघर में सूर्य का प्रकाश अवश्य आये।
4- पूजा का स्थान निश्चित होना चाहिए और उसे बार बार न बदलें।
5- पूजा स्थान का रंग बाहर से गेरुआ रखे और अंदर की और हल्का पीला या श्वेत रक्खें,गाढ़े रंग से बचें।
6-आपका पूजाघर आगे से चोडा और पीछे से छोटा या तिकोना नहीं होना चाहिए,इससे आपकी पूजा नष्ट हो जायेगी।चोकोर पूजाघर या समान होना चाहिए।
अपने मंदिर में देवी देवताओं की स्थापना किस प्रकार से करें:-
1-खरीदा हुआ मंदिर रखने के स्थान पर अपना ही सही से पूजा का स्थान बनाएं।
2-पूजाघर में बहुत ज्यादा देवी देवताओं की मूर्ति और चित्रों की भीड़ नहीं लगाएं।
3- जिस देवी या देवता की मुख्य रूप से आप उपासना करते हैं यानि जो आपके इष्ट हो और गुरु ने उन्हें दीक्षा में बताया है,सबसे पहले उनके चित्र अथवा मूर्ति की स्थापना एक आसन या चौकी पर करें।और उसके सीधे हाथ पर अपने गुरु का चित्र लगाये।
4- अन्य देवी देवताओं को उनके सीधे और उलटे हाथ की दिशा में स्थापित कर सकते हैं।
5-यदि किसी विशेष देव या देवी की मूर्ति की स्थापना करनी है, तो यह 12 अंगुल या इंच से ज्यादा बड़ी नहीं होनी चाहिए,चित्र चाहे कितना भी बड़ा हो सकता है।
6- पूजा स्थान पर देवता के सीधे हाथ की और शंख, गोमती चक्र और एक पात्र में गंगा जल भरकर अवश्य रक्खें।
अब अपने मंदिर या पूजा स्थान को जागृत कैसे करे:-
1-प्रातः और साय की वेला में एक ही समय पूजा उपासना का नियम बनाएँ।जैसे-4 या 5 या 9 बजे तो शाम को भी यही समय होना चाहिए।
2- प्रातः और विशेषकर सायंकाल की पूजा में दीपक जरूर जलाएँ , दीपक पूजा स्थान के ठीक मध्य में रखें।
3- पूजा के पहले थोडा सा ॐ नाँद और गुरु या इष्ट नाम से कीर्तन या उच्चारण सहित मंत्र जाप करने से पूरे घर को सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है।इसके उपरांत पूजा करते रहे।
4- मंदिर सदा साफ़ सुथरा करके मूर्तियों को स्नान कराकर रक्खें,और वहां पर एक लोटे में नित्य स्वच्छ जल भरकर अवश्य रक्खें।
5- आप चाहे कोई भी पूजा करते हों , यदि आपको अभी गुरु मंत्र नहीं मिला या नही लिया है तो,सबसे पहले ॐ श्री गुरुवै नमः का और उसके बाद 21 बार गायत्री मन्त्र का जाप अवश्य करें।
6- पूजा के बाद अर्पित किया हुआ जल प्रसाद के रूप में ग्रहण करें। और साथ ही सभी परिजनों को मिश्री का प्रसाद भी दें।
अपने घर के मंदिर में या पूजा स्थान पर किस प्रकार की सावधानियों का ध्यान रखें:-
1- पूजा स्थान पर गंदगी न रखें।
2- रोज वहां पर साफ़ सफाई जरूर करें।
3- पूजा स्थान पर पूर्वजों के चिंत्र न रखें।उन्हें अलग स्थान पर रखें।
4- शनि देव का चित्र या मूर्ति पूजाघर में नहीं रखें।इनकी पूजा प्रतिष्ठित मन्दिर में ही करनी श्रेष्ठ होती है।
5- जहाँ तक हो सके पूजा स्थान पर अगरबत्तियां न जलाएं।धुप बत्ती जलाये।
6- पूजा स्थान का दरवाजा बंद करके न रखें।उसे गुलाबी या पीले रंग के पर्दे से ढके।
7- पूजा स्थान को कभी भी स्टोर रूम या रसोई में या सीढ़ियों के नीचे नहीं बनाएं।
8-शंख बजाने का अभ्यास अवश्य करें और नित्य पूजा समय पहले और अंत में बजाए।
विशेष:- अष्टमी और अमावस और पूर्णिमां के दिन और ग्रहण के समय अपने पूजाघर में यज्ञ अवश्य किया करें और स्थान कम हो तो कंडे में धुना सुलगा कर उसपर आहुति अवश्य दिया करें।
सप्ताह में एक दिन अवश्य अपने पूजाघर से ज्योति और धुप जलाकर उसका प्रकाश और अपने हाथ से आशीर्वाद को अपने सारे घर में देते हुए,वापस आकर पूजाघर में रखें।यो सारे घर में ईश्वर का दिव्य आशीर्वाद फेलता है और सभी नकारात्मक शक्ति नष्ट होती है।
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श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज
जय सत्य ॐ सिद्धायै नमः
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