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जन्मकुंडली के 12 कालसर्प दोष (भाग 5) के रहस्यों को पढ़ें, रोग, दोष और संकटों से मुक्ति पाएं, श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज के बताए उपायों को अपनाएं जीवन सफल बनायें

 

 

 

 

 

“स्वामी सत्येंद्र जी महाराज जिन उपायों को बता रहे हैं वे आपको न किसी पुस्तक में मिलेंगे और न ही कोई ज्ञानी, विद्धवान आपको इनके बारे में बताएगा। ये ऐसे उपाय हैं जिनको अपनाने से आपका जीवन सफल बन जायेगा।”

 

कालसर्प दोष को हौवा बनाकर जिस तरह से लूटा जाता है आपको डराया जाता है। आज स्वामी जी ने उन सबका पर्दाफाश कर दिया है। स्वामी जी ने जन्मकुंडली के 12 कालसर्प दोषों के बारे में 6 भागों में बताया है यह पांचवां भाग है। स्वामी जी ने न केवल इसके निवारण के उपाय बताए हैं बल्कि जीवन में कैसे मुकाम को हासिल करें? वह सब भी बता दिया है। स्वामी जी के द्वारा दिया गया यह अद्भुत और अमूल्य ज्ञान आपको निशुल्क प्राप्त हो रहा है। आप इन सबको पढ़ें और अपने जीवन में उतारें फिर देखें जीवन में किस तरह तेज़ी से बदलाव आते हैं।

 

 

जन्मकुंडली के 12 कालसर्प दोषों के चमत्कारिक अचूक उपाय जो अपने न पढ़े और न सुने न जाने होंगे,जिन्हें करके आप जीवन के सभी दुखों का निवारण करके समस्त सुखों की प्राप्ति कर सकते हैं :-

(उपाय भाग-5)

-ग्यारहवें घर और विषधर कालसर्प दोष तथा उसका अचूक उपाय:-
-ग्यारहवां घर से मनुष्य की जन्मकुंडली में निम्न लाभ जाने जाते है:-
जीवन में सभी वृ्द्धि प्राप्ति, प्रशंसा,उपाधियाँ,
समस्त प्रकार के मिलने वाले सम्मान,बडी उम्र के दोस्त,सभी प्रकार के लाभ,हर तरह के मित्र ,
समस्त व्यापार से लाभ और हानि, दामाद, पुत्र वधु, आशा या इच्छा पूर्ति, कन्या और संतान और उनसे से लाभ – हानि, समस्त इच्छापूर्ति की संभावना, दया, सलाहकार, अपने पंथ के अनुयायी,हितेषी, शुभ चिन्तक का आंकलन.बड़ा भाई और आपके जीवन में आने वाला या मिलने वाला पथप्रदर्शक या एक प्रकार से गुरु और बांयाँ हाथ, बांयाँ कान, पिण्डलियाँ, टखने इस भाव के अंतर्गत आते हैं | इस भाव के पीड़ित होने पर शरीर के इन भागों में पीडा़ होगी और इन सभी लाभों और व्यक्तियों से हानि होगी।यो ये बहुत महत्त्वपूर्ण घर है।यो जब इस घर में राहु और पांचवे घर में केतु या विपरीत योग बनता है,तब विषधर कालसर्प दोष बन कर इन सभी लाभों को हानि में बदल कर मनुष्य के जीवन को नरक बना देता है।यो अब इस विषधर कालसर्प दोष का अचूक उपाय जाने और जीवन को सुखी बनाये:-

-1-उपाय:-

पहले अपने माता पिता या बड़े बूढ़ों से ये जाने की-आपके पूर्व की तीसरी पीढ़ी में किस देवी या देवता की पूजा से आपका रुका वंश की वृद्धि हुयी थी,यानि की आपके दादा या परदादा का जन्म किसी देवी या देवता की पूजा या जात बोलने और उसके पूरा करने से तो नहीं हुआ था और तब आपकी वर्तमान पीढ़ी चली है,क्योकि उस देवी या देव का ही आशीर्वाद आपके वंश पर होता है और हम उसे भूलकर अपनी मनचाही पूजापाठ करने से उस देव देवी की उपेक्षा से आपके वंश और उसको मिलने वाले सभी लाभों पर अंकुश लग जाने से सभी वर्तमान हानियां कम या ज्यादा रूप में मिलने लगती है।यो ये जानकर फिर उस देवी देव की प्रथम उपासना करनी चाहिए और आप पाएंगे-मनवांछित लाभ!!
जैसे-आपके पूर्वजों की कुलदेवी कुलदेवता-आपके शहर या जिले के अनुरूप भिन्न भिन्न होते है-नगरकोट की देवी की जात लगाने पर आपका वंश चला हो या नाथ पंथ के अनेक सिद्धों के मेले में जाने या किसी सिद्ध महात्मा के आशीर्वाद से वंश चला हो।आदि उदाहरण मानो।
-सबसे पहले केवल उस तीर्थ स्थान पर जाकर दर्शन करके अपनी मनोकामना कहे और उनकी कृपा का परिणाम देखे और नहीं तो उनकी जात आदि पूरी विधि से लगा कर अवश्य मनोकामना पूर्ण होगी।

-2-उपाय:-
*महालक्ष्मी धनपति योग उपाय की “दिव्य कलश”साधना:-*

जिन भक्तो को ये लगता है की हमे कुछ अलग से सिद्धिदायक अनुष्ठान करने चाहिए उन भक्तों के लिए ये सहज सरल सभी प्रकार की तन मन धन की निरन्तर वृद्धि के लिए “”दिव्य कलश स्थापन”” विधि बताई जा रही है, जिसे कोई भी भक्त अपने घर परिवार के कल्याण के लिए *”किसी भी शुभ महुर्त दिवस”* प्रत्येक माह में जो सर्वार्थ सिद्धि योग बनते है उस पर भी किया जा सकता है-और विशेषकर धन तेरस पर तो अति उत्तम समय होता है, इसमें निम्न सामग्री की आवश्यकता पड़ेगी जिसे बाजार से ले ले:–

*-1-7 कौड़ियां साफ और सफेद रंग की हो।

*-2-एक चाँदी का सिक्का जिस पर आपके इष्ट देव की मूरत छपी हो या एक चाँदी के दुकडे या पत्र पर आपका गुरु मंत्र लिखा हो ऐसा सुनार से बनवा ले ।

*-3-“7 लोहे की कीलें छोटी वाली।

*-4-एक श्री यंत्र छोटा वाला ।

*-5-एक तांबे का चूड़ीदार ढक्कन वाला मध्यम साइज का लोटा जिसमे ये सब वस्तुएं बन्द करनी है।

*-6-गाय का घी और ये नही मिले तो सफेद तिल का तेल वो लौटे में पूरा भर जाये इतना होना चाहिए।

👉अब इन सारी वस्तुओं को गंगा जल से धो कर उन पर रोली का टीका सीधे हाथ की अनामिका ऊँगली से लगा कर एक एक करके अपना गुरु मंत्र का जप करते हुए लोटे में सीधे रखते जाये और घी या तेल भरें और अब अपने गुरु मंत्र का कम से कम 11 माला और मध्यम 21माला और जिनके पास अधिक समय और जपने की सामर्थ्य है वे 51 या 108 माला का जाप उस लोटे में रखी घी या तेल सहित सभी वस्तुओं का मन ही मन ध्यान करें यो इन सभी वस्तुओं में गुरुदेव व् मन्त्र के इष्ट की सम्पूर्ण कृपा शक्ति उस लोटे में आ जायेगी यो अति ही उत्तम और सम्पूर्ण सिद्धि देने वाला लाभ मिलेगा और जिनके पास गुरु मन्त्र नही लिया है वे इस सिद्धासिद्ध महामंत्र “”सत्य ॐ सिद्धायै नमः ईं फट् स्वाहा”” का श्रद्धा पूर्वक जप सहित ध्यान कर सकते है उन्हें भी अवश्य ही सम्पूर्ण लाभ मिलेगा और अब मंत्र जप करके उस लोटे में अपनी जो भी मनोकामना हो उसमे से पहली एक मनोकामना कहते हुए फूँक मारे ऐसे 7 बार कोई एक ही या अलग अलग 7 मनोकामना कहते हुए फूँक मारें और अब लौटे को ढक्कन से बन्द कर दे और लौटे को कलावे से 7 बार लपेट कर बांध दे यहाँ कलावे को लोटे के मुँह वाले भाग की और से चारों और 7 बार लपेटना है न की लौटे को खड़ा करके, केवल सात बार ही लपेटे यो कलावा लपेटते में अपना गुरु मंत्र जपे अपनी मनोकामना भी कहे।अब आपका सभी मनोरथ पूर्ण करने वाला सात्विक ऊर्जा से अभिमन्त्रित सर्व रक्षक सिद्ध “”दिव्य कलश”” तैयार है।।
अब इस “अभिमन्त्रित दिव्य कलश” को अपने पूजाघर में अपने सीधे हाथ की और स्थापित यानि रख दे और प्रत्येक 7 वे माह यानि अगर ये “दिव्य कलश” दीपावली पर तैयार किया है तो होली पर इसे पुनः खोल कर इन्ही वस्तुओं को फिर से गंगाजल से स्नान करा कर नया घी या तेल भरकर ऐसे ही विधिवत तैयार कर अपने पूजाघर में रखें और नित्य ज्योत व् धुप करते रहे तो “दिव्य कलश” की दिव्य शक्ति निरन्तर बढ़ती जायेगी और नित्य संकटों को काट कर घर परिवार में शुभता लाभदायक कल्याण करेगीं।
*-और जिनका नवीन मकान बन रहा है तो वे चाहे तो अपने नवीन मकान में जहाँ पूजाघर का स्थान बनाये उस स्थान पर इस “दिव्य कलश” को जमीन में एक छोटा सा पाँच ईंटो का एक कुण्ड बना कर उसके अंदर सीधा रख दे और उस कुण्ड को ईंटो से चिन कर ढक दे तो ये आपकी सभी भूमि और वास्तु दोषो का सम्पूर्ण निराकरण करेगा ये अनुभूत प्रयोग है।।करें और लाभ पाये इसके करने व् स्थापन में किसी भी प्रकार का भय और त्रुटि आदि का दोष नही होता है।

*-स्वास्तिक :-*
इस उपाय का प्रारम्भ किसी भी आने वाली पूर्णिमा की प्रातः से करें और तब नियमित रूप से अपनी पूजापाठ करने के उपरांत पूजाघर से चलकर रोली या हलदी से अपने घर के मुख्य दरवाजे के दोनों और स्वास्तिक बनाया करें तथा स्मरण रहे की-इस स्वास्तिक के प्रारम्भ में और चारों खाने में बिंदी लगाकर उसमें चावल भी लगाये चाहे वे चिपके नहीं या कम चिपके कोई बात नहीं पर लगाये अवश्य। और प्रतिदिन उस बने स्वस्तिक पर ही स्वास्तिक बनाया करें और फिर प्रत्येक पूर्णिमा को उस स्वास्तिक वाले भाग या दीवार को सदा जल में गंगा जल मिलाकर उसे अच्छी तरहां से घोकर कुछ देर सूखने के बाद वहीं फिर से नया स्वस्तिक बनाकर एक वर्ष करते रहने पर अवश्य ही चमत्कारिक रूप से सभी हानियों पर अंकुश लगता चला जायेगा और पूर्णतया लाभ और शांति की प्राप्ति होगी।

*-तुलसी लाभ वशीकरण चमत्कार:-*
किसी पूर्णिमासी के दिन में एक छोटा चूड़ीदार ढक्कन वाला पीतल का लोटा जिसे बन्द किया जा सके लाये और अब पहले पूजाघर में जाकर ज्योत और धूपबत्ती जलाये और उस ज्योत पर अपनी मनोकामना लिखने वाले एक भोजपत्र या भोजपत्र नहीं मिले तो लिखने वाला केवल सफेद कागज लेकर उसे पवित्र होने की भावना करते हुए घुमाए और अब उस पर लाल स्याही से-अपने सारे परिवार का नाम पता गोत्र लिख कर अपनी जो भी परेशानी और मनोकामना हो वो भी लिख कर उसे फिर से ज्योत पर घुमाकर उसमें रोली हल्दी और जितने परिवार में सदस्य यानि मैम्बर हो और आप जिन भी व्यक्ति को अपने अनुकूल करना चाहते है,उनका भी नाम लिखे और यदि उनका गोत्र पता हो तो उत्तम नही तो कोई बात नहीं है।अब जितने लोग इस कागज में लिखे है,उतने ही जोड़े चावल के यानि जैसे-10 व्यक्ति है तो 20 चावल के स्वच्छ और पुरे चावल के दाने होने चाहिए,वो कागज में रखे और उसे सही से मोड़ ले और उसे चारों और से गुरु या इष्ट मन्त्र जपते हुए कलावे से बांध ले।और इस कागज को पन्नी में बांध ले और अब एक छोटा सा नवग्रह यन्त्र और लक्ष्मी गणेश का चांदी का सिक्का और 7 कोडी और एक छोटा त्रिशूल व् चांदी के दो सर्प तथा गाय का घी जो भी उपलब्ध हो,इन सबको अपना गुरु या इष्ट मंत्र जपते हुए उस लौटे में डालते जाये और उसे बन्द करके अब एक गमले में नीचे रखे और उसके ऊपर कुछ मट्टी भरकर अब उसके ऊपर तुलसी का पौधा लगाये और गुरु मन्त्र जपते रहे और जल डाल कर अपने घर के किसी भी पवित्र स्थान पर रख दे और नियमित उसके नीचे प्रातः और साय घी का दीपक जलाएंगे तो ज्यो ज्यो तुलसी का पौधा बढ़ता जायेगा,त्यों त्यों आपकी दरिद्रता मिटटी जायेगी और जो भी ग्यारहवें घर के लाभ है,वे सब के सब आपको प्राप्त होने लगेंगे।
*-विशेष:-*
इस उपाय को आप अपने बगीचे में अनार के पेड़ लगा कर भी पूर्णमासी को कर सकते है।तो बहुत ही उत्तम चमत्कारिक परिणाम प्राप्त होंगे।
यदि आपका पौधा सुख जाये तो कोई बात नहीं,क्योकि आपका दोष और आप पर किया तन्त्र अभी ऐसा करने नहीं देगा,तो आप केवल पोधे को ही नया लगाये,बाकि लोटा ज्यों का त्यों ही उपयोगी रहेगा।

 

शेष बारहवें घर का शेषनाग कालसर्प दोष का चमत्कारिक अचूक उपाय भाग-6 आगामी लेख में कहूँगा…

 

 

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श्री सत्यसाहिब
स्वामी सत्येंद्र जी महाराज

जय सत्य ॐ सिद्धायै नमः

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