
32 बच्चों समेत 63 की दर्दनाक मौत का जिम्मेदार कौन? आखिर इन सब मासूमों की मौत की जिम्मेदारी किसकी बनती है? ये एक बड़ा सवाल है और इन सवालों के घेरे में है यूपी की सरकार।
हर टीवी चैनल पर ये खबर चलती है कि गोरखपुर के सरकारी अस्पताल में के बच्चों की मौत भी हो गयी है। इसके अलावा जो ऑक्सीजन सिलेंडर की सप्लाई करने वाली कंपनी है वो अस्पताल को पहले ही नोटिस दे देती है कि अगर उसका बकाया नहीं चुकाया गया तो वो गैस की सप्लाई बंद कर देंगे। लेकिन अस्पताल प्रशासन इसके बाद भी नहीं चेताया। महज़ 69 लाख का बकाया ना चुका पाने की वजह से सप्लायर ने गैस की सप्लाई बंद कर दी।
कमीशन के इस खेल में 63 मासूमों की हत्या कर दी गयी और ये सारा मामला यूपी के सीएम योगी के शहर में हुआ लेकिन सूबे के मुख्यमंत्री को मामले पर बोलने के लिए 5 दिन लग गए। तो क्या योगी भी उन मासूमों की मौत का इंतजार करते रहे। ये बच्चों की मौत का मामला नहीं बल्कि सीधे-सीधे हत्या का मामला है लेकिन इसकी जिम्मेदारी कोई लेने के लिए तैयार नहीं है।
ये भी एक आतंकवादी जैसा ही हमला है, आतंकवादियों का काम सिर्फ पैसों के लिए लोगों को मारना है और वही अस्पताल प्रशासन ने किया। यहां साफ-साफ कमीशन खोरी का मामला है। ऐसी जगह कमीशन खोरी जहां पर मासूमों की जिंदगी पर बन आयी हो तो क्या ये एक तरह का आतंकवाद नहीं है। ऐसे दोषियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए कि नहीं? ये भी अपने आप में एक आतंकवाद है और मामला 63 बच्चों और बड़ों की मौतों का है, उन मासूमों की मौतों का है जिन्होंने अभी तक ठीक से जीना भी नहीं सीखा था। इन मौतों की जिम्मेदारी किसी एक कि या उस अस्पताल की ही नहीं बनती बल्कि यूपी के स्वास्थ्यमंत्री से लेकर यूपी के मुख्यमंत्री तक इन मौतों की जिम्मेदारी बनती है।
इसका जबाव सीएम को सबके सामने आकर देना चाहिए या नैतिकता के आधार पर अपनी कुर्सी का त्याग कर देना चाहिए।
गोरखपुर के मेडिकल कॉलेज में 32 बच्चों समेत 63 की मौत पर सीएम योगी अदित्यनाथ ने जांच करने और कड़ी कार्रवाई करने के आदेश जारी कर दिए हैं। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री से कहा है कि दोषियों को किसी भी तरह से बख्शा न जाए और जल्दी से रिपोर्ट बनाकर के उनको दंडित किया जाए।
महज 69 लाख रुपये के बकाए को लेकर बीआरडी मेडिकल कॉलेज को ऑक्सीजन की सप्लाई देने वाली फर्म ने हाथ खड़े कर दिए थे। इसके चलते लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट में गुरुवार को गैस खत्म हो गई तो जंबो सिलेंडरों और अम्बू बैग से मरीजों की जान बचाने की कोशिश होती रही लेकिन शुक्रवार की शाम तक 24 मासूम जान से हाथ धो बैठे।
गौरतलब है कि पूर्वांचल में इंसेफेलाइटिस का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस वर्ष अब तक मेडिकल कॉलेज में इंसेफेलाइटिस के 504 मरीज भर्ती हुए हैं। और अब आक्सीजन सप्लाई ठप होने के चलते महज 48 घंटों में 30 नौनिहालों की मौत से गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं
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मनीष कुमार
ख़बर 24 एक्सप्रेस
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