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बैकफुट पर सीएम योगी? शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को मनाने में जुटे अफसर, रख दी चार बड़ी शर्तें

CM Yogi Vs Swami Shankaracharya Avimukteshwaranand | Bureau Report Zishan Alam | Khabar 24 Express

प्रयागराज संगम… आस्था का केंद्र… लेकिन इसी संगम पर हुआ ऐसा टकराव, जिसने यूपी की राजनीति और प्रशासन दोनों को कटघरे में खड़ा कर दिया। मौनी अमावस्या पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के साथ हुई कथित अभद्रता के बाद अब तस्वीर बदलती दिख रही है।

खबर है कि योगी सरकार बैकफुट पर है और लखनऊ से अधिकारी शंकराचार्य को मनाने में जुट गए हैं। लेकिन सवाल ये है… क्या सरकार शंकराचार्य की शर्तें मानेगी या ये टकराव और बड़ा होने वाला है?

ज्योतिर्मठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। माघी पूर्णिमा पर संगम में स्नान को लेकर प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक लखनऊ के कई वरिष्ठ अधिकारी सीधे शंकराचार्य से संपर्क कर रहे हैं और उन्हें ससम्मान संगम स्नान के लिए मनाने की कोशिश चल रही है।

दरअसल पूरा विवाद मौनी अमावस्या के दिन से शुरू हुआ, जब शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने रथ और जुलूस के साथ संगम स्नान के लिए निकले थे। आरोप है कि पुलिस और प्रशासन ने उनका रथ रोक दिया और पैदल स्नान का दबाव बनाया। इसी दौरान साधु-संतों और पुलिस के बीच तीखी नोक झोंक हुई, हालात तनावपूर्ण हो गए और पूरा इलाका पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया।

शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि संन्यासियों, बटुकों, ब्राह्मणों और साधु-संतों के साथ मारपीट की गई, उनकी चोटी पकड़कर घसीटा गया और अपमानित किया गया। इस घटना से आहत होकर शंकराचार्य 11 दिनों तक धरने पर बैठे रहे।

18 जनवरी से 27 जनवरी तक माघ मेले में बद्रिकाश्रम शिविर के सामने उनका धरना चलता रहा, लेकिन किसी वरिष्ठ अधिकारी ने माफी तक नहीं मांगी। आखिरकार 28 जनवरी को वे प्रयागराज छोड़कर वाराणसी चले गए।

विवाद यहीं नहीं रुका। मेला प्रशासन ने शंकराचार्य को नोटिस जारी कर उनसे यह तक कह दिया कि साबित करें आप शंकराचार्य हैं। इसके बाद भूमि आवंटन रद्द करने और आजीवन मेला प्रवेश पर रोक की चेतावनी भी दी गई। इस पर सियासत गरमा गई। अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेताओं ने सरकार पर हमला बोला और शंकराचार्य के समर्थन में खड़े हो गए।

अब माघी पूर्णिमा से पहले तस्वीर बदलती नजर आ रही है। शंकराचार्य ने साफ कर दिया है कि वे तभी संगम स्नान करेंगे जब उनकी चार मांगें मानी जाएंगी। पहली, मौनी अमावस्या पर अभद्रता करने वाले अधिकारी लिखित में माफी मांगें।

दूसरी, साधु-संतों, बटुकों और ब्राह्मणों की पिटाई करने वाले पुलिसकर्मियों पर एफआईआर और सख्त कार्रवाई हो। तीसरी, गाय माता को राज्यमाता घोषित किया जाए। चौथी, चारों शंकराचार्यों के स्नान के लिए स्थायी प्रोटोकॉल बनाया जाए।

इन मांगों की पुष्टि खुद शंकराचार्य के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी शैलेंद्र योगीराज सरकार ने की है। अब बड़ा सवाल यही है कि क्या योगी सरकार इन शर्तों को मानेगी या ये मामला और बड़ा राजनीतिक और धार्मिक विवाद बनेगा।

माघी पूर्णिमा से पहले प्रयागराज से लेकर लखनऊ तक हलचल तेज है। ये सिर्फ एक स्नान का मामला नहीं, बल्कि सम्मान, आस्था और सत्ता के टकराव की कहानी बन चुका है।

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