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Maharashtra: CM देवेंद्र फडणवीस को झूठे केस में Jail भेजने की साजिश का भंडाफोड़, पूर्व DGP समेत 3 पर FIR की सिफारिश

Crime News | Bureau Report Akash Dhake | CM Devendra Fadnavis | Khabar 24 Express

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा धमाका हुआ है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को झूठे केस में फंसाने की कथित साजिश सामने आई है। SIT की रिपोर्ट में इस साजिश के लिए पूर्व डीजीपी संजय पांडे समेत तीन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर आपराधिक मामला दर्ज करने की सिफारिश की गई है।

ये पूरा मामला 2016 के एक पुराने केस से जुड़ा है, जिसे कथित तौर पर राजनीतिक दबाव में दोबारा खोला गया। सवाल बड़ा है क्या सत्ता के खेल में कानून का गलत इस्तेमाल हुआ?

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आया है। ठाणे नगर पुलिस थाने में साल 2016 में दर्ज एक पुराने मामले को दोबारा खोलकर तत्कालीन विपक्ष नेता और मौजूदा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को झूठे केस में फंसाने की कथित साजिश का खुलासा हुआ है।

इस मामले की जांच कर रही SIT ने अपनी रिपोर्ट में पूर्व डीजीपी संजय पांडे सहित तीन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक केस दर्ज करने की सिफारिश की है। ये रिपोर्ट राज्य की पूर्व पुलिस महानिदेशक रश्मी शुक्ला ने अपनी रिटायरमेंट से ठीक पांच दिन पहले गृह विभाग को सौंपी थी।

SIT रिपोर्ट के मुताबिक, महाविकास आघाड़ी सरकार के कार्यकाल में फडणवीस को कानूनी पचड़े में फंसाने की कोशिशें तेज हुईं। जब संजय पांडे मुंबई पुलिस कमिश्नर बने और बाद में डीजीपी बने, तो इन प्रयासों को और हवा मिली।

जांच में सामने आया कि 2016 में ठाणे नगर पुलिस थाने में श्यामसुंदर अग्रवाल के खिलाफ एक मामला दर्ज हुआ था, जो बिल्डर संजय पुनमिया और अग्रवाल के बीच साझेदारी विवाद से जुड़ा था।


2017 में इस केस में चार्जशीट भी दाखिल हो चुकी थी। इसके बावजूद संजय पांडे के निर्देश पर इस केस की दोबारा जांच शुरू कराई गई, जिसे SIT ने संदिग्ध माना।

सूत्रों के अनुसार, ठाणे और मुंबई साइबर पुलिस थानों में दर्ज मामलों में फडणवीस को आरोपी बनाने के लिए अधिकारियों पर भारी दबाव डाला गया।

तत्कालीन उपायुक्त लक्ष्मीकांत पाटील और सहायक आयुक्त सरदार पाटील पर गवाहों से बयान बदलवाने और नाम जोड़ने के आरोप भी लगे हैं। यहां तक कि अधिकार क्षेत्र न होने के बावजूद पूछताछ और धमकाने की बात भी सामने आई है।

इस पूरे मामले में बिल्डर संजय पुनमिया ने आरोप लगाया कि 2021 से जून 2024 तक पुराने केस की जांच के नाम पर उनका उत्पीड़न हुआ और उनसे एक्सटॉर्शन मांगी गई। उनकी शिकायत के आधार पर संजय पांडे समेत सात लोगों पर एक्सटॉर्शन का मामला दर्ज किया गया।

SIT ने ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग की फॉरेंसिक जांच कराई, जिसमें सरदार पाटील, पूर्व नगर रचनाकार दिलीप घेवारे और पुनमिया के बीच बातचीत की पुष्टि हुई।

सबसे गंभीर आरोप यह है कि 5 मई से 21 मई 2021 के बीच इस्तेमाल की गई सरकारी गाड़ी की लॉगबुक के पन्ने गायब पाए गए, जिसे सबूत मिटाने की कोशिश माना गया।

यह भी सामने आया कि संजय पांडे ने पूछा था कि फडणवीस और शिंदे को अब तक गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया।

यह मामला विधान परिषद सदस्य प्रविण दरेकर ने सदन में उठाया था, जिसके बाद SIT का गठन हुआ। अब SIT की सिफारिशों के बाद राज्य सरकार की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।

इस पूरे मामले ने महाराष्ट्र की राजनीति, पुलिस तंत्र और सत्ता के रिश्तों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी या मामला फाइलों में दब जाएगा जवाब आने वाला वक्त देगा।

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