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चंद्रशेखर बावनकुले का बड़ा फैसला, सरकारी जमीन पर हाउसिंग सोसायटियों के लिए नई नीति लागू

Maharashtra News | Bureau Report Akash Dhake | Khabar 24 Express


महाराष्ट्र में सरकारी जमीन पर सहकारी गृहनिर्माण संस्थाओं को लेकर राज्य सरकार ने एक अहम फैसला लिया है। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने बुधवार को बताया कि वर्ष 2010 से लागू सरकारी जमीन के आवंटन पर लगी रोक अब हटा दी गई है। इसके साथ ही सरकार ने सरकारी जमीन पर बनने वाली सहकारी गृहनिर्माण संस्थाओं के लिए नई नीति भी तय की है।

नई नीति की सबसे अहम बात यह है कि सरकारी जमीन पाने वाली हर गृहनिर्माण संस्था में कम से कम 20 प्रतिशत सदस्य पिछड़ा वर्ग से और 5 प्रतिशत सदस्य दिव्यांग वर्ग से होना अनिवार्य होगा। सरकार का कहना है कि इससे सरकारी जमीन के आवंटन की प्रक्रिया में सामाजिक समावेशन को बढ़ावा मिलेगा।

राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले के मुताबिक अब सरकारी जमीन के आवंटन की प्रक्रिया पहले की तरह लॉटरी के जरिए नहीं होगी। जिलाधिकारी उपलब्ध सरकारी भूखंडों की सूची तैयार करेंगे और सार्वजनिक जाहिरात के माध्यम से पारदर्शी पद्धतीने लिलाव प्रक्रिया आयोजित की जाएगी। तकनीकी और आर्थिक बोली के आधार पर पात्र संस्था का चयन किया जाएगा।

नई व्यवस्था के तहत मुंबई शहर और उपनगरों में सरकारी जमीन का बेस प्राइस जमीन के बाजार मूल्य का 2.5 प्रतिशत रखा गया है, जबकि महाराष्ट्र के बाकी हिस्सों में यह 5 प्रतिशत होगा। जमीन 30 साल की लीज पर दी जाएगी। लीज की अवधि पूरी होने के बाद ही उसे क्लास-1 ऑक्युपेंसी में बदलने की पात्रता होगी।

सरकार ने अलग-अलग वर्गों के लिए जमीन के आवंटन में भी प्रावधान किए हैं। सामान्य वर्ग के लिए 40 प्रतिशत भूखंड, राज्य सरकार, स्थानीय निकाय और महानगरपालिका के कर्मचारियों के लिए 15 प्रतिशत, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और घुमंतू जनजातियों के लिए 10 प्रतिशत तथा लेखक, कलाकार, खिलाड़ी और पत्रकारों के लिए 10 प्रतिशत भूखंड आरक्षित किए गए हैं।

इसके अलावा केंद्र सरकार के कर्मचारी, सशस्त्र बलों के वर्तमान और पूर्व कर्मचारी, सांसद और विधायक, स्वतंत्रता सेनानी एवं उनके वारिस, दिव्यांग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए भी अलग-अलग प्रावधान किए गए हैं।

राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने बताया कि नई नीति तैयार करने के पीछे कोल्हापुर की संजय गांधी सहकारी गृहनिर्माण संस्था की ओर से दायर याचिका और 25 नवंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों को भी ध्यान में रखा गया है।

नई नीति में सरकारी जमीन पर बनने वाली गृहनिर्माण संस्थाओं में पति-पत्नी की संयुक्त सदस्यता अनिवार्य की गई है। वहीं, जांच में फर्जी या बेनामी फ्लैट पाए जाने पर जिलाधिकारी को ऐसे फ्लैट बिना मुआवजे के सरकार के कब्जे में लेने का अधिकार भी दिया गया है।

फ्लैट के हस्तांतरण, बैंक लोन के लिए मॉर्गेज या पुनर्विकास के लिए जिलाधिकारी की पूर्व अनुमति लेना भी जरूरी होगा।

चंद्रशेखर बावनकुळे ने कहा कि संशोधित नीति से सरकारी कर्मचारी, पत्रकार, कलाकार, पिछड़े वर्गों के सदस्य और अन्य नागरिकों के लिए सरकारी जमीन पर आवास प्राप्त करने का रास्ता आसान होगा।

कुल मिलाकर महाराष्ट्र सरकार की यह नई नीति सरकारी जमीन के आवंटन में पारदर्शिता के साथ-साथ अलग-अलग सामाजिक वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर देखी जा रही है।


Bureau Report Akash Dhake, Jalgaon, Maharashtra


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