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महाराष्ट्र में बड़ा भ्रष्टाचार: किसानों का पैसा खा गए सरकारी बाबू, 22 पटवारी और 5 तहसील कर्मचारी गिरफ्तार

Jalna News | Maharashtra Crime Story | Bureau Report Akash Dhake | Khabar 24 Express


महाराष्ट्र के जालना जिले से सामने आई यह खबर न सिर्फ चौंकाने वाली है, बल्कि सिस्टम पर एक बड़ा सवाल भी खड़ा करती है। जिन सरकारी बाबुओं पर किसानों तक राहत पहुंचाने की जिम्मेदारी थी, वही बाबू किसानों का हक डकार गए।

अतिवृष्टि मुआवजे के नाम पर करीब 25 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया है, जिसमें 31 सरकारी कर्मचारी अब सलाखों के पीछे हैं। यह पूरा मामला सुनकर हर किसान का खून खौल जाएगा।

यह सनसनीखेज घोटाला जालना जिले के अंबड और घनसावंगी तालुका से जुड़ा है। जांच में खुलासा हुआ कि भारी बारिश से प्रभावित किसानों के लिए सरकार द्वारा भेजे गए मुआवजे को हड़पने के लिए एक संगठित साजिश रची गई।

अधिकारियों और कर्मचारियों ने मिलकर फर्जी किसानों के नाम सिस्टम में डाले और करीब 24 करोड़ 90 लाख 77 हजार 811 रुपये सरकारी खजाने से निकाल लिए।

सबसे हैरानी की बात यह है कि जिन लोगों के नाम पर एक गुंठा जमीन तक नहीं थी, उन्हें भी लाभार्थी बना दिया गया। इसके लिए तहसीलदारों के लॉगिन और पासवर्ड का दुरुपयोग किया गया। सरकारी पोर्टल में जानबूझकर हेरफेर किया गया ताकि असली किसानों का पैसा फर्जी खातों में पहुंच जाए।

जब जिला कलेक्टर की समिति ने इस गड़बड़ी की पुष्टि की, तो मामला सीधे पुलिस तक पहुंचा। इसके बाद आर्थिक अपराध शाखा ने जांच शुरू की।

जैसे ही शिकंजा कसा गया, आरोपी मोबाइल बंद कर फरार होने लगे, लेकिन तकनीक ने उनका साथ नहीं दिया। तकनीकी विश्लेषण के आधार पर 31 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें 22 पटवारी, 5 तहसील कर्मचारी, कलेक्टर कार्यालय का एक कर्मचारी और कंप्यूटर ऑपरेटर व नेटवर्क इंजीनियर शामिल हैं।

जांच एजेंसियों के अनुसार, कंप्यूटर ऑपरेटरों और नेटवर्क इंजीनियरों की मदद से सिस्टम में इस तरह के बदलाव किए गए कि घोटाला लंबे समय तक छिपा रहे। लेकिन डिजिटल सबूतों ने पूरी साजिश को बेनकाब कर दिया।

आरोपियों ने राहत पाने के लिए पहले जिला सत्र न्यायालय और फिर बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन अदालत ने घोटाले की गंभीरता को देखते हुए सभी की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं।

अब प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। आरोपियों के बैंक खाते फ्रीज कर दिए गए हैं, संपत्तियों पर सरकारी चार्ज लगाया गया है और डिजिटल सबूतों के लिए मोबाइल और लैपटॉप जब्त किए गए हैं।

यह मामला सिर्फ पैसों की लूट नहीं है, यह किसानों के भरोसे के साथ किया गया धोखा है। सवाल यह है कि जिन हाथों में सिस्टम की चाबी थी, वही हाथ अगर चोरी करने लगें, तो किसान न्याय की उम्मीद किससे करें? अब देखना होगा कि क्या दोषियों से पूरा पैसा वसूल हो पाता है या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

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