नोएडा में पुलिस ने एक ऐसे “नोट डबल” ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसने अपराध की दुनिया में पढ़ाई-लिखाई, टेक्नोलॉजी और प्लानिंग को खतरनाक तरीके से जोड़ दिया था।
इस गिरोह में कोई अनपढ़ अपराधी नहीं, बल्कि इंजीनियर, एमकॉम पास, बीबीए छात्र, होटल संचालक और एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट व्यापारी शामिल थे।
लालच सिर्फ एक था आसान पैसा।
और इसी लालच के सहारे यह गिरोह लोगों से मिनटों में लाखों रुपये ठग लेता था।
पैसे दोगुना करने का झांसा, 16.50 लाख की ठगी
मामले की शुरुआत नोएडा की रहने वाली दीपिका अग्रवाल की शिकायत से हुई। दीपिका के मुताबिक, उनके जीजा के जरिए उनकी पहचान एक व्यक्ति से कराई गई, जिसने पैसे दोगुना करने की स्कीम का भरोसा दिलाया।
दीपिका 16.50 लाख रुपये लेकर गौड़ सिटी मॉल पहुंचीं, जहां सोनू यादव नाम का शख्स अपने साथियों के साथ उन्हें एक फ्लैट में ले गया। फ्लैट में पहले से दो युवक मौजूद थे।
दिखावे का खेल: ऊपर असली नोट, नीचे कागज
फ्लैट में आरोपियों ने नोट गिनने की मशीन से गड्डियां गिनीं और दीपिका को दो गुना रकम से भरा एक बैग सौंप दिया। सब कुछ इतना प्रोफेशनल लग रहा था कि किसी को शक की गुंजाइश नहीं थी।
लेकिन असली सच्चाई तब सामने आई, जब दीपिका ने बैग खोलकर देखा ऊपर सिर्फ एक असली नोट, और नीचे कागज की गड्डियां।
जब तक वह वापस फ्लैट पहुंचतीं, पूरा गैंग फरार हो चुका था।
टेक्निकल सर्विलांस से गिरफ्तारी, 6 आरोपी दबोचे गए
शिकायत के बाद बिसरख पुलिस ने तुरंत टेक्निकल सर्विलांस लगाया। तेज़ कार्रवाई करते हुए पुलिस ने सेक्टर-16बी की एक निर्माणाधीन सोसाइटी से छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार आरोपियों में बिहार और उत्तर प्रदेश के रहने वाले पढ़े-लिखे युवक शामिल हैं।
हाई-टेक ठगी का तरीका: लकड़ी का तख्त, छेद और इंसानी जाल
पुलिस जांच में जो तरीका सामने आया, वो किसी थ्रिलर फिल्म से कम नहीं है।
- किराए के फ्लैट में लकड़ी का एक बड़ा तख्त लगाया जाता था
- तख्त में एक छेद और दीवार में दूसरा छेद बनाया जाता था
- तख्त के नीचे एक सदस्य छुपकर बैठता था
- ऊपर दो लोग ग्राहक का ध्यान भटकाते थे
जैसे ही ग्राहक मुड़ता, नीचे बैठा सदस्य बैग से असली गड्डियां निकालकर उनकी जगह कागज की गड्डियां डाल देता था।
फिर बैग लॉक कर दिया जाता, ग्राहक को कार में बैठाकर सुनसान जगह छोड़ दिया जाता और गिरोह फरार हो जाता।
कौन-कौन शामिल था इस गैंग में?
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी अलग-अलग प्रोफेशन से जुड़े थे:
- इंजीनियर
- बीबीए छात्र
- एमकॉम पास
- होटल संचालक
- एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट व्यापारी
- पॉलीटेक्निक डिप्लोमा होल्डर
सब पढ़े-लिखे, लेकिन सबका रास्ता एक — ठगी से पैसा कमाना।
कई राज्यों में दर्ज हैं मामले, लंबे समय से एक्टिव था गिरोह
पुलिस का कहना है कि यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और देश के कई राज्यों में इनके खिलाफ धोखाधड़ी के केस दर्ज हैं। सोशल मीडिया, पहचान वालों और फर्जी कॉल्स के जरिए ये लोग मोटे मुनाफे का लालच देते थे।
पुलिस की चेतावनी: आसान पैसे का लालच सबसे खतरनाक
नोएडा पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि:
- पैसा दोगुना-तिगुना करने वाली किसी भी स्कीम पर भरोसा न करें
- किसी भी संदिग्ध ऑफर की तुरंत पुलिस को सूचना दें
- याद रखें, बिना मेहनत पैसा बढ़ाने का दावा अक्सर ठगी होता है
सबक: पढ़े-लिखे चेहरे भी अपराध के पीछे छिपे हो सकते हैं
नोएडा का यह मामला साफ दिखाता है कि अपराध सिर्फ अनपढ़ चेहरों तक सीमित नहीं है। डिग्री, बिजनेस और प्रोफेशन भी अपराध की गारंटी नहीं होते। आसान पैसे का लालच अक्सर सबसे महंगा साबित होता है।
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