नागपुर: आज बात उस नेता की, जिसने केवल राजनीतिक पद नहीं पाया, बल्कि अपने व्यक्तित्व और काम से एक अलग पहचान बनाई।
महाराष्ट्र की सत्ता समीकरणों में जिस नाम की चर्चा लगातार बढ़ रही है, वे हैं राजस्व मंत्री और नागपुर-अमरावती के पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले, जिन्हें मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सबसे भरोसेमंद और प्रभावी चेहरों में गिना जा रहा है।
किसान परिवार से सफर, संगठन से सत्ता तक
बावनकुले का राजनीतिक सफर किसी विशेष सुविधा से नहीं, बल्कि साधारण किसान परिवार से शुरू हुआ। मेहनत, व्यवहारिक राजनीति और संगठन के प्रति समर्पण ने उन्हें वहां तक पहुंचाया जहां आज वे खड़े हैं।
यह सफर सिर्फ पद पाने की कहानी नहीं, बल्कि संघर्ष से नेतृत्व बनने की दास्तान है।
2019 में टिकट कटने के बाद भी उन्होंने पार्टी के प्रति निष्ठा नहीं छोड़ी। ऐसे मौकों पर कई नेता दल बदल लेते हैं लेकिन बावनकुले ने इसी समय को अपनी ताकत बनाया और संगठन में अपना विश्वास और भी मजबूत किया।
जमीनी स्टाइल ने कराया अलग पहचान
चंद्रशेखर बावनकुले को केवल बैठकों में देखा जाने वाला मंत्री नहीं, बल्कि जमीन पर काम करने वाला नेता माना जाता है।
गांव–गांव के दौरे, जनता दरबार, मौके पर समाधान और लगातार फॉलो-अप… लोगों के पार्टी उनकी भावनाएं.. यही कार्य उन्हें बाकी नेताओं से अलग बनाते हैं।
इस वजह से हर वर्ग में उनकी पहचान “काम कराने वाले मंत्री” के रूप में बनी।
आंदोलन से राजनीति तक — नेतृत्व की तीन परतें
90 के दशक में सामाजिक आंदोलन से शुरुआत, छत्रपति सेना की स्थापना, समाज सुधार यात्रा और बाद में भाजपा युवा मोर्चा में नेतृत्व — इन चरणों ने बावनकुले को जनता से गहरा जुड़ाव और संगठन का अनुभव दिया। तीन बार विधायक के रूप में जीत ने जनता के विश्वास पर मुहर लगाई।
2019 का टिकट कटना कठिन समय था, लेकिन उन्होंने निष्ठा और धैर्य को हथियार बनाया, यही असली नेतृत्व की पहचान है।
प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद बड़ी भूमिका
जब 2023 में भाजपा ने उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाया तो उन्होंने कुर्सी नहीं, मिशन संभाला।
ओबीसी समाज को जोड़ने की सबसे बड़े अभियान में वे खुद गांव–कस्बों में उतरते रहे। हजारों कार्यकर्ताओं से मिलकर संगठन की नब्ज़ थामी।
इस सक्रियता ने 100 से अधिक सीटों पर भाजपा को निर्णायक बढ़त दिलाने में अहम भूमिका निभाई। पीएम मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, जेपी नड्डा या फिर सीएम देवेंद्र फडणवीस इन सबके साथ संवाद और रणनीति बनाने की क्षमता ने उन्हें महाराष्ट्र में भाजपा का सबसे भरोसेमंद स्ट्रैटेजिस्ट बना दिया।
राजनीतिक गलियारों में उन्हें आज चाणक्य कहा जाना कोई अतिशयोक्ति नहीं।

आज की भूमिका और भविष्य की संभावनाएं
आज वे हर महत्वपूर्ण निर्णय में मुख्यमंत्री के साथ दिखाई देते हैं और यह महज औपचारिक उपस्थिति नहीं, बल्कि जिम्मेदारी का प्रतीक है।
उनकी कहानी यह साबित करती है कि राजनीति में कद भाषणों या पोस्टरों से नहीं, बल्कि विश्वास, कार्य की परिणति और संकट में भी निष्ठा बनाए रखने से बनता है।
चंद्रशेखर बावनकुले आज उस नेतृत्व मॉडल का प्रतीक हैं जहां सत्ता नहीं, सेवा ही परिचय है और यही उन्हें भविष्य की राजनीति के सबसे संभावित चेहरों में खड़ा करता है।
Manish Kumar Ankur | Exclusive Report | Nagpur News
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