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यूपी की योगी सरकार के अंदर नहीं चल रहा सब कुछ सही, नेता, मंत्री नाराज, मेनस्ट्रीम मीडिया खबरों को दबा रहा है

योगी आदित्यनाथ से नेताओं की नाराजगी अभी से नहीं बल्कि पहले चरण यानी 1.0 से ही है। लेकिन दोबारा सरकार के गठन के बाद नेताओं की नाराजगी अब खुलकर सामने आ रही है।

योगी सरकार 1.0 में प्रधानमंत्री मोदी तक सीएम योगी से नाराज दिखे थे लेकिन योगी का प्रताप और रुतबा और मीडिया में नाराजगी की खबरों के आगे पीएम मोदी को ही झुकना पड़ा और मजबूरन सीएम योगी को गले लगाना पड़ा।

एक समय था जब आलाकमान यूपी में नेतृत्व बदलने की जुगत में था, लेकिन सीएम योगी ने पार्टी से इस्तीफा देने की धमकी दे दी थी। आज फिर वही समय आ गया है। 2024 के चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आते जा रहे हैं यूपी में भाजपा के नेताओं का सीएम योगी से असंतोष बढ़ता जा रहा है। असंतोष भी इसलिए क्योंकि योगी नेताओं से मिलने का समय नहीं देते हैं। इसी के चलते यूपी सरकार के एक मंत्री ने इस्तीफा दे दिया, भले उनका इस्तीफा अभी तक स्वीकार नहीं किया गया हो। लेकिन यह भी सच है कि नाराज मंत्री फोन नहीं उठा रहे हैं।

दूसरी नाराजगी कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए जितिन प्रसाद की है। लेकिन जितिन की नाराजगी को सीएम योगी भाव नहीं दे रहे हैं, और न ही उन्हें मिलने का समय दे रहे हैं।

वहीं उत्तर प्रदेश में तबादलों में गड़बड़ी और मंत्रियों की नाराजगी की खबर के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने मंत्रियों को नसीहत दे डाली। योगी आदित्यनाथ ने मंत्रियों से साफ कर दिया है कि वे अपने स्टाफ पर आंख मूंद कर भरोसा न करें। लेकिन इस बीच उन्होंने किसी भी नेता या मंत्री से मिलने का समय नहीं दिया।

मंत्रालय में तबादले की जांच और अपने करीबी के खिलाफ कार्रवाई से नाराज उत्तर प्रदेश सरकार के लोकनिर्माण मंत्री जितिन प्रसाद को पार्टी नेतृत्व ने मिलने का समय नहीं दिया। इसके उलट उन्हें तबादले की जांच के समर्थन में बयान भी देना पड़ा। दरअसल भाजपा नेतृत्व को जितिन की नाराजगी से ज्यादा जलशक्ति राज्य मंत्री दिनेश खटीक की आरोपों की चिंता है।

नेतृत्व को डर है कि अगर इस मामले को जल्द नहीं सुलझाया गया तो सरकार और पार्टी में जातिगत स्तर पर विरोध के स्वर उठेंगे। पार्टी सूत्र के मुताबिक जितिन को अगर पार्टी नेतृत्व ने मिलने का समय दिया होता तो उत्तर प्रदेश सरकार में भ्रष्टाचार को संरक्षण दिए जाने का संदेश जाता। यही कारण है कि उन्हें मिलने का समय नहीं दिया गया।

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इसके उलट उन्हें तबादले की विभागीय जांच के फैसले का समर्थन करने का दो टूक निर्देश सुनाया गया। मुलाकात का समय न मिलने के बाद पार्टी नेतृत्व के निर्देशों के अनुरूप ही जितिन ने खुद के नाराज न होने की बात कही। साथ ही तबादले की जांच को सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति से जुड़ा मामला बता कर इसका समर्थन किया। बता दें कि जितिन प्रसाद वहीं नेता हैं जिन्हें कांग्रेस ने केंद्र में दो बार मंत्री बनाया था और उन्हें अहम पदों पर बिठाकर बड़ी जिम्मेदारी दी गई थी। जितिन राहुल गांधी के भी सबसे करीब माने जाते थे। लेकिन कांग्रेस के डूबते जहाज से जितिन कूद गौर और भाजपा की नाव में सवार हो गए। जितिन भले भाजपा की नाव में सवार हो गए हों लेकिन उन्हें कितनी इज्जत और मान सम्मान मिल रहा है यह जग जाहिर हो गया है। जितिन को न तो आलाकमान मिलने का समय दे रहा है और न ही सीएम योगी उन्हें भाव दे रहे हैं।

दरअसल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राज्य के सीएम पर ओबीसी विरोधी होने का आरोप लगाकर कई मंत्रियों और विधायकों ने भाजपा से किनारा कर लिया था। तब स्थिति को संभालने के लिए पार्टी नेतृत्व को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी थी। नेतृत्व को डर है कि अगर खटीक के मामले को नहीं संभाला गया तो विरोध के और स्वर सुने जा सकते हैं।

पार्टी सूत्रों का कहना है कि खटीक के आरोपों को लेकर पार्टी नेतृत्व गंभीर है। यही कारण है कि डिप्टी सीएम केशव मौर्य के जरिये नौकरशाही को मंत्रियों और कार्यकर्ताओं का सम्मान करने की नसीहत दी गई। खटीक ने गृह मंत्री अमित शाह और राज्यपाल आनंदी बेन पटेल को भेजे त्याग पत्र में दलित होने के कारण सरकार में सम्मान न मिलने और अधिकारियों की ओर से अपमानित करने का आरोप लगाया था। सूत्रों का कहना है कि खटीक का इस्तीफा स्वीकार नहीं होगा। इसकी जगह कैबिनेट और राज्य मंत्रियों में बेहतर तालमेल की कवायद की जाएगी।

जितिन के मामले में सख्ती बरत नेतृत्व ने दूसरे मंत्रियों और नेताओं को सख्त संदेश दे दिया है। संदेश यह है कि जो सीएम योगी को मंजूर होगा यूपी में वही होगा। कोई भी मंत्री किसी भी प्रकार का स्वयं फैसला नहीं ले सकता है।

गौरतलब है कि तबादला विवाद के कारण कुछ और मंत्री सीएम योगी से नाराज हैं।

वहीं जल शक्ति राज्यमंत्री दिनेश खटीक के इस्तीफे पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तंज कसा है। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि जहां मंत्री होने का सम्मान तो नहीं, लेकिन दलित होने का अपमान मिले, ऐसी भेदभावपूर्ण भाजपा सरकार से त्यागपत्र देना ही अपने समाज का सम्मान रखने के लिए सही उपाय है। कभी-कभी बुलडोजर उल्टा भी चलता है। इसी तरह उन्होंने दूसरे ट्वीट में लिखा कि उत्तर प्रदेश भाजपा सरकार में भ्रष्टाचार और कुशासन की क्रोनोलॉजी समझिए।

ब्यूरो रिपोर्ट : खबर 24 एक्सप्रेस


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