
हिंदू पंचांग के अनुसार आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को पितृ विसर्जनी अमावस्या अथवा सर्वपितृ अमावस्या या अश्विन अमावस्या कहते हैं। इसी दिन श्राद्ध पक्ष का समापन होता है। यानी,माना जाता है कि, इसी दिन पितृ लोक से आए हुए हमारे पूर्वज वापस अपने पितृलोक को लौट जाते हैं।
वैसे,सही बात ये है कि,ये समय मे किया जप तप दान के द्धारा हम वर्तमान जीवित परिजन अपने अपने पितर, जो अपनी काल या अकाल म्रत्यु उपरांत, इसी पृथ्वी पर किसी भी देश विदेश में किसी भी जाति,परिवार में जन्म लेकर,हमसे शेष रहे कर्मों के शेष रहे फल के अनुसार, हमारे मित्र व शत्रु या सम्बन्धी बनकर हमसे मित्रता या शत्रुता या सामान्य रिश्ते का सम्बन्ध,नवीन जन्म के आगामी कर्म अनुसार निभाते है या हमारे ओर उनके जन्मकाल व मृत्युकाल के अनुसार आगे पीछे समयानुसार अच्छे या बुरे सम्बन्ध निभाएंगे।यो उसी कर्मानुसार सम्बन्ध संस्कार को सहज व मित्रता ओर प्रगाढ़ता के बढ़ावे को ही,ये इस दिन किये कर्मकांड से मिले पुण्यबल व्रद्धि के कर्म-जैसे-जप,तप,दान आदि के रूप में किये जाते है।जो उन जाने अनजाने सम्बन्धो को मधुर,सुदृढ,सहज कर हमारे परस्पर समस्त आगामी जीवन मे उपयोगी बन चलते जाएं।यो,इन दिनों या प्रतिदिन ऐसे शुभकर्म करने से हमें सदा बढ़ते हुए शुभ फल के रूप में,शुभ परिणाम के रूप में प्राप्त होते है।यो इस सबका सर्वश्रेष्ठ उपाय है,रेहीक्रियायोग विधि,,
रेहि क्रियायोग स्वमेव ही इस सब प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष,कर्म संस्कार से बने सभी अच्छे बुरे सम्बन्धो में सर्वकालीन शुभ बनकर उपयोगी होता है,यो सदा प्रतिदिन समय अनुसार रेहि क्रियायोग करते रहो और पितरों व वर्तमान के सभी सम्बन्धो को सुधारकर आनन्दित व सफल रहो।
ये अश्वनी अमावस्या की सबसे ख़ास बात यह है कि यह पितृपक्ष में आती है जिस के चलते इस अमावस्या का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। 2020 में अश्विन अमावस्या कब है और उस समय मे पुण्य बल व्रद्धि को क्या करें,जाने:-
आश्विन अमावस्या तिथि और शुभ मुहूर्त जाने:-
आश्विन अमावस्या, 17 सितंबर, 2020 गुरुवार को है,ओर वैसे
सितंबर 16, 2020 को 19:58:17 बजे से अमावस्या आरम्भ होकर,सितंबर 17, 2020 को 16:31:32 बजे पर अमावस्या समाप्त होगी।
क्या करें,सामान्य व विशेष अनुष्ठान:-
मेरा मानना है कि,ऐसे समय मे अखण्ड घी या तेल की पूजाघर में ज्योत जलाकर, एक आसन बिछाकर या आप स्वस्थ नहीं है तो,जहां सुविधा लगे, वहां गंगा जल से शुभ संकल्प करके छींटे मार कर बैठे और अधिक से,अधिक संख्या में,यानी कम से कम 21 माला या 51 माला का,अपने गुरु या इष्ट मंत्र के जप को जो भी आपके यहाँ माला हो,वो लेकर जप करे,यदि सुविधा हो तो,जप उपरांत या जप के साथ साथ, यज्ञ प्रज्वलित करके आहुतियां देते हुए करें,तो अति उत्तम पुण्य लाभ मिलेगा।और इस समय के उपरांत जो भोजन व खीर,मीठा आदि बने,उसे कुत्ते व अन्य जीवों को भरपेट खिलाएं,जीवो की तृप्ति से सभी कुछ पुण्य प्राप्त होता है, ओर अधिक बने,तो आसपास के गरीबो या असहायों के लिए या ऐसी किसी संस्थाओं के पते पर या अपने गुरु स्थान पर वहां चल रहे शुभ कार्यो में अपना अधिक से अधिक दान अवश्य भेजे या करें।
जय सत्य ॐ सिद्धायै नमः
स्वामी सत्येंद्र सत्यसाहिब जी
www.satyasmeemission.org
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