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डायबीटीज यानी मधुमेह होने के ज्योतिषीय कारण? और उसको संतुलित करने के ज्योतिषीय उपाय, बता रहे हैं स्वामी सत्येंद्र सत्यसाहिब जी

प्रत्येक मनुष्य के खानपान और अतिवादी प्रवर्ति के कारण के साथ साथ उसका परिश्रम नहीं करने के कारण तथा किसी भी लम्बी बीमारी के इलाज में ज्यादा दवाई के चलते आपका लिवर कमजोर होते होते खराब होने लगता है,तब लिवर से आगामी पेनक्रियाज वाला अंग पर जोर पड़ने लगता है,तब वह भी अपना संतुलन खो बैठता है,तब आपके शरीर में मौजूद ब्लड शुगर या ब्लड ग्लूकोज़ की मात्रा बहुत बढ़ जाती है तो वही कारण मिलकर मनुष्य में भारी थकन,जल्दी जल्दी बीमार होने,चोट लगने पर बहुत ही देर में घाव भरना आदि के लक्षण उत्पन्न होने पर जांच कराने पर जो रोग निकलता है,उसे ही डायबिटीज, जिसे हिंदी में मधुमेह कहते हैं।यो आपके रक्त में शुगर की अधिकतम मात्रा अधिक समय तक बनी रहने पर आपके किसी भी अंग पर बहुत बुरा प्रभाव डालकर अंत मे आपके लिए जानलेवा भी साबित हो सकती है।यो इस रोग को भी आपकी जन्मकुंडली में जांचा जा सकता है,की ये किसी ग्रहयोग से बना और कबतक प्रभावी है,यानी सामान्यतौर बना रहेगा या असाध्य बनकर आपके जीवन को क्षति पहुँचा देगा,तो यो आपकी जन्म कुंडली में स्थित ग्रहों की स्थिति को आज इस लेख के माध्यम से मैं आपको डायबिटीज होने के संभव ज्योतिषीय कारण और उपाय के बारे में बताने जा रहा हूं।

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डायबिटीज होने के ज्योतिषीय कारण निम्न है:-

आपकी कुंडली में गुरु यानी बृहस्पति की स्थिति इस रोग के लिए मुख्य कारण होती है :- ज्योतिषशास्त्र के अनुसार,यो तो मंगल ग्रह रक्त से सम्बंधित रोग दोष आदि विषय को बताता है,पर मुख्यतौर पर यदि बृहस्पति आपकी जन्म राशि से छठे, आठवें और बारहवें भाव में दुर्बल या पीड़ित अवस्था में स्थित होता है, तो ऐसे जातक डायबिटीज की समस्या से रोगी हो सकते हैं।ओर यदि इस ग्रह की स्थिति पहले, पांचवें और नवम घर में विपरीत या शत्रु राशि या क्रूर ग्रह की संगति में है, तो इससे भी व्यक्ति मधुमेह की समस्या से ग्रसित हो सकता है।क्योकि दूषित गुरु जातक की जन्मकुंडली में उसके पहला भाव यानी पैतृक कारणों से उस व्यक्ति के उलझने के कारण उसके मस्तिष्क में निरन्तर चिंता बनाये रखेगा।यो लगातार भयंकर तनाव इस रोग का कारण बनता है।और पंचम भाव यानी लिवर पर दूषित गुरु या गुरु के साथ अन्य क्रूर ग्रहों का प्रभाव व्यक्ति के लिवर ओर पेनक्रियाज पर सीधा असर डालती है,ये योग उस व्यक्ति को किसी लम्बे बुखार और सही खुराक नहीं मिलने से लीवर को खराब करके बनता है।और नवम भाव पर गुरु की स्थिति भी व्यक्ति को गलत मंत्रोउचारण व गलत व भष्ट धार्मिक आचरण के कारण मिले शापित व्यवहार से रोग होता है।

साथ ही आपकी कुंडली में शनि की स्थिति केसी है :-

कर्क राशि अथवा चंद्रमा से शनि का दृष्टि या युति संबंध होने पर जातक को अनेक अनावश्यक घरेलू या प्रोपर्टी के विवाद झगड़ो के मुकदमे आदि के निरन्तर बने रहने से शराब पीने और व्यर्थ धन खर्च व सम्मान हानि आदि के तनाव से भी मधुमेह यानी डायबिटीज होने की बड़ी भारी संभावना होती है।

बृहस्पति के साथ शनि का संबंध:-

ऐसी स्थिति में, जहाँ बृहस्पति शनि के राशि चक्र में स्थित होता है, और किसी हानिकारक ग्रह की उसपर दृष्टि होती है तो ऐसे में जातक उच्च शुगर यानी डायबिटीज की समस्या से ग्रसित हो सकता है। इस विकार का एक अन्य कारण जातक की जन्म कुंडली में शनि की दृष्टि या इन दोनों ग्रहों की युति हो सकता है।

आपकी कुंडली में राहु की स्थिति इस सम्बंध में विशेष रोग फल देती है :-

जब कुंडली में राहु की स्थिति आठवें भाव या त्रिकोण भाव यानी पहले, पांचवें और नवम घर में हो और राहु का आठवें भाव के स्वामी के साथ युति हो तो जातक मधुमेह का रोगी होता है।क्योकि गुरु और राहु का योग यदि नीच हो,तो इस योग में जातक को बड़ी तेज गुस्सा आता है,ओर उसके जीवन मे अचानक ही बड़े विचित्र परिवतर्न आते है,नतीजा वो ऊंचाई पर पहुँचने के बाद फिर से नीचे गिर जाने के कारण,उसे फिर से नए सिरे से पूरी महनत करनी पड़ती है,उसे धोखे मिलते है,यो वो इस मानसिक संघर्ष के भीषण थकन से इस रोग से ग्रस्त हो जाता है।और इस गुरु राहु या गुरु शनि के योग से उसपर तांत्रिक क्रिया गुप्त रूप से होती है या वो इन विद्याओं के जानने से अन्य लोगो का उपचार करने से भी उनके पाप बल से ग्रस्त होकर इस जैसे रोग से ग्रस्त हो जाता है।

लग्न और अष्ठम भाव के स्वामी की स्थिति :-

त्रिक भाव का स्वामी अथवा कोई पाप ग्रह लग्न में स्थित हो तथा लग्नेश, चंद्रमा, गुरु और शुक्र में से कोई दो ग्रह दुःस्थान में स्थित होकर अन्य प्रकार से अशुभ हों तो डायबिटीज की समस्या हो सकती है। इसके साथ ही अष्टम भाव पर यदि पाप ग्रह का प्रभाव हो तथा चंद्रमा गुरु और शुक्र में से कोई दो ग्रह अशुभ हों तो भी डायबिटीज होने का खतरा बना रहता है।अष्टम घर अचानक होने वाली बुरी घटनाओं का घर है,नतीजा ये योग अष्टम घर को प्रभावित करते है,ओर अशुभ चन्द्रमा जातक को घोर प्रेम पीड़ा और विपरीत लिंगी से हानि देने से मानसिक तनाव से ये रोग देता है।और गुरु या शुक्र का अष्टम भाव पर नीच असर से गुप्त सम्बन्ध रखने व उसको बनाये रखने में आवश्यकता से अधिक धन खर्च करने आदि और उनके छिपाए रखने के मानसिक तनाव विवाद से ये रोग आता है।

डायबटीज का ज्योतिषीय निदान:-

भारतीय ज्योतिष एक विज्ञान है,जिसमें ज्योतिषीय रोग विपदा के साथ साथ उसके उपचार भी बताए गए है, जो की मधुमेह से पीड़ित हैं या जिनकी कुंडली में ऊपर दिए गए इस प्रकार के ग्रह योग हैं,तो भविष्य में इससे बचाव कैसे हो,यो ये निम्न उपाय करें..

स्वास्थ्यवर्द्धक इन मन्त्रों का जाप करें व मन्त्र शुद्धि करें :-

नियमित रूप से यदि व्यक्ति इन निम्लिखित मन्त्रों के जाप करेगा तो ये कुंडली में मौजूद दोषों को दूर कर डायबिटीज जैसी बीमारी को सन्तुलित कर बचा जा सकता है।इससे प्रथम व पंचम भाव का गुरु दोष से मुक्ति मिलती है।प्रथम व पंचम भाव मन्त्र विद्या व दीक्षा लेने और शिष्य होने का घर है,यो इस पर गुरु ग्रह की अशुद्धि के व गुरु मंत्र या अपने मन्त्र का ओर अन्य मन्त्रों से निम्न समझने के दोष से मुक्ति मिलती है।मन्त्र की मात्रा दोष व इष्ट व गुरु अपमान व निंदा के दोष से मुक्ति मिलती व मन्त्र फलित होता है।
पहले तो किसी भी मंत्र जप के साथ साथ ही 25 बार अनुलोम विलोम करते हुए जप करें।फिर चाहे तो बाकी मन्त्र जप को सामान्य अवस्था मे बैठकर गहरा सांस भरकर अपने गुरु मंत्र का जप करते हुए धीरे धीरे छोड़ते हुए जप करते रहे,ऐसा अभ्यास बना ले,तो शीघ्र ही मन्त्र भी जाग्रत होगा और स्पष्ट मन्त्र जप भी होगा ओर भूत शुद्धि से प्राण शुद्धि होकर स्वस्थ लाभ भी होगा,पर धीरे धीरे ये अभ्यास 25 प्राणायाम प्रात- ओर 25 साय करके बढ़ाये।

ओर ब्रहस्पति मन्त्र का भी जप किया करें:-

 !!ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरुवे नमः!!

बृहस्पतिवार को मन्दिर के पण्डित जी या किसी वैदिक विद्यालय के ब्राह्मणों को भोजन खिलाएं।बृहस्पतिवार को ब्राह्मणों को भोजन खिलाने से पूर्वजन्म का किया अधार्मिक कार्य का दोष नष्ट होकर, उनका आशीर्वाद मिलता है। जिसके फलस्वरूप नवम भाव का दोष मिटकर आपको मधुमेह जैसी बीमारियों से लड़ने को पुण्य बल शक्ति मिलती है।

बृहस्पतिवार का व्रत रखें :-

गुरुवार का व्रत करने से एक तो शुगर भी सन्तुलित होगी और लिवर आदि पर भी कम भार पड़ने से उस सम्बन्धित अंग को मजबूती मिलती जाने से लाभ होता है,ओर धर्म बल बढ़ता है।

गाय को या भैंस को चारा खिलाएं :-

हमारे पूर्व जीवन मे या वर्तमान जीवन मे हमारे द्धारा किसी दुधारू जीव ओर उसके बछड़े व बैल या भेंसे आदि को प्रताड़ित करने से हमें उसके दूध के माध्यम से दोष लगता है।यो इन जीवों को गुरुवार में चारा खिलाने से इस पूर्वजन्म के दोष का निवारण होता है,ओर रोग में शांति आती है।यो ऐसा करने से आप कुंडली में मौजूद ये या ऐसे ओर भी अहितकर रोग कष्टकारी योग से भी बचा जा सकता हैं।

खूनी नीलम;-

इस सम्बंध में हलके आसमानी रंग का या चमकीले नीले रंग का या विशेषकर खूनी नीलम को टेस्ट करके पहनने से बहुत ही लाभ मिलता है।

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स्वामी सत्येंद्र सत्यसाहिब जी
जय सत्य ॐ सिद्धायै नमः
www.satyasmeemission.org

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