
लेकिन इस बार 2014 के मुकाबले भाजपा को नुकसान होता दिख रहा है। नुक्सान के बाबजूद भाजपा सत्ता में आती दिखाई दे रही है।
लेकिन इस बार सत्ता की चाभी भारत की आब्से बड़ी हिंदूवादी संस्था आरएसएस के हाथों में हो सकती है।
बता दें कि लोकसभा चुनाव में भाजपा की सफलता के लिए समर्थन मांगने गए राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को संघ ने धरातल पर काम करने की नसीहत दे डाली थी। भाजपा अध्यक्ष केदारपुर धाम में चल रही संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में गए थे जहां संघ ने सबको साथ लेकर चलने व धरातल पर रहकर काम करने की नसीहत दी थी।
आपको बता दें कि संघ कुछ समय से मोदी व शाह की जोड़ी से नाराज दिखाई दे रहा है। इसके कारण भी कई हैं।
इस बार के चुनावों में भले भाजपा पानी की तरह पैसा बहा रही हो लेकिन यूपी का गठबंधन भाजपा की बात बिगाड़ता नज़र आ रहा है। यही कारण है कि शाह को संघ की शरण में जाना पड़ा।
बता दें कि शाह ने नाराज चल रहे संघ प्रमुख मोहन भागवत आैर अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों को मनाने की भरपूर कोशिश की व साथ में मंत्रणा भी की। इसके बाद करीब साढ़े सात घंटे तक तीन अलग-अलग बैठकों में भी शामिल हुए। संघ प्रमुख के समक्ष दस मिनट में उन्होंने पार्टी का प्रतिवेदन भी रखा। इसमें केंद्र सरकार की उपलब्धियां आर योजनाआें को गिनाने के साथ ही एयर स्ट्राइक की सफलता का जिक्र भी किया। इसके बाद लोकसभा चुनाव सफलता के लिए संघ का समर्थन भी मांगा।
शाह ने संघ को बताया कि इनके कारण सरकार आैर पार्टी के प्रति जनता का विश्वास बढ़ा है।
सूत्रों की मानें तो इस सबको सुनने के बाद संघ की आेर से उन्हें नसीहत दी गई कि योजनाएं, भाषण आैर कार्यक्रम तो ठीक हैं लेकिन चुनाव में सफलता के लिए जनता के बीच धरातल पर जाकर मजबूती के साथ काम करना होगा। पता चला है कि देश भर के 43 प्रांतों से आए प्रचारकों, पूर्व प्रचारकों ने लोकसभा चुनाव को लेकर जो फीडबैक दिया है, वह संतोषजनक नहीं कहा जा सकता। इसी फीडबैक के आधार पर भाजपा अध्यक्ष को चुनावी तैयारी के लिए सब कुछ ठीक करने को कहा है। इस संबंध में सर संघचालक मोहन भागवत, सर कार्यवाह भय्याजी जोशी आैर कुछ अन्य पदाधिकारियों के साथ अमित शाह आैर संगठन महामंत्री रामलाल की अलग से मंत्रणा भी हुई।
संघ सर कार्यवाह भय्याजी जोशी ने संवाददाताआें से चर्चा के दौरान कहा कि एक राजनीतिक दल के नेता के नाते सभी से समर्थन मांगना अमित शाह का काम है। संघ से भी उन्होंने समर्थन मांगा है। हम एक सामाजिक जीवन में हैं। वे एक राजनीतिक दल के अध्यक्ष हैं। चुनाव में संघ की भूमिका निश्चित है। मतदान का प्रतिशत कम होता है तो यह चिंता का विषय है। इसलिए हम जनता के बीच जाकर शत-प्रतिशत मतदान सुनिश्चित कराने के लिए जागरूकता लाने का प्रयास करेंगे। देश हित में कौन ठीक रहेगा, मतदाता इसे जानता है।
खैर जो भी हो, अगर भाजपा सत्ता में वापसी करती है तो इस बार सत्ता की चाभी संघ के हाथों में होने की उम्मीद है। यह भी हो सकता है कि परिणामों के आने के बाद बीजेपी संगठन में भी बदलाव हों।
ये तो 23 मई को ही स्पष्ट हो पायेगा कि मोदी का जादू चला या विपक्ष ने बाजी मार ली।
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