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पुलिस वालों की ईमानदारी का क्या यही है इनाम, वाह रे गहलोत सरकार !!

डूंगरपुर, जगदीश जी तेली :

अगर कोई पुलिस अधिकारी अच्छा काम करे तो उन्हें ऐसा ईनाम दिया जाता है। पुलिस वाले अपनी जान हथेली पर रखकर अपराधियों की धर पकड करते हैं और आम आदमी को सुरक्षित जीवन देने की गारंटी देते हैं। लेकिन रसूखदार अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करने पर ऐसे ईमानदार पुलिस वालों को क्या इनाम मिलता है ये तो उन्हीं पुलिस वालों से जानें।

खबर डूंगरपुर जिले से है जहां शराब माफियाओं पर कार्रवाई करने वाले ईमानदार पुलिस इंस्पेक्टर को सरकार ने गणतंत्र दिवस पर सम्मानित तो किया था और गणतंत्र दिवस बीतते ही उनका ट्रांसपफर कर दिया गया।

हम बात कर रहे हैं डूंगरपुर जिले के ईमानदार और जाँबाज पुलिस इंस्पेक्टर सुनील शर्मा की जिनका एक महीने के अंदर यह दूसरा तबादला है।

बता दें कि सुनील शर्मा वही पुलिस इंस्पेक्टर हैं जिन्हें सरकार ने गणतंत्र दिवस पर सम्मानित किया था।


सुनील शर्मा व उनकी टीम ने मिलकर डूंगरपुर जिले में चल रहे अवैध शराब माफियाओं पर लगाम कसी थी और उन्हें गिरफ्तार किया था।
6 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध शराब सुनील शर्मा की टीम ने ही पकड़ी थी जो राजस्थान की अब तक कि सबसे बड़ी कार्रवाई थी। लेकिन बदले में उन्हें इनाम क्या मिला?

अब एसपी शंकरदत्त को हटाने की चल रही सुगबुगाहट

एक ओर जहां गहलोत सरकार रात्रि 8 बजे शराब की दुकानों को बंद करने के आदेश जारी कर रही है वहीँ दूसरी ओर शराब माफीया राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल कर ईमानदार पुलिस अफसरों को हटवाने पर तुले है।
डूंगरपुर जिले के बिछीवाड़ा थानाधिकारी रहे सुनिल शर्मा ने अपने 10 माह के कार्यकाल में 6 करोड़ रुपए की शराब पकड़कर रिकॉर्ड बनाया, यही नहीं शराब माफिया ने उन्हें जान से मारने की नियत से वाहन उन पर चढ़ाने की कोशिश भी की थी जिस दौरान उनके पैर भी ज़ख्मी हो गए थे, लेकिन इस जाँबाज पुलिस इंस्पेक्टर सुनील शर्मा ने अपनी जान हथेली पर रखकर शराब माफियाओ के विरुद्ध सख़्ती बरतते हुए शराब की तस्करी पर अंकुश लगाने में कोई कसर बाक़ी नही रखी।
सरकार द्वारा उन्हें शाबाशी देना तो दूर उनका स्थान्तरण दोवड़ा कर दिया। लेकिन उन्होंने यहां भी माफियाओं के खिलाफ अपना अभियान जारी रखा। यहां एक स्थानीय होटल जो उप प्रधान का है, वहां खुलेआम शराब परोसी जा रही थी। लेकिन सुनील शर्मा ने शराब परोसते वक़्त होटल के लोगों को रंगे हाथों पकड़ लिया।
माफियाओं की पहुंच ऊपर तक होने की वजह से, सुनील शर्मा का मात्र एक माह में ही दूसरा स्थान्तरण जिले के बाहर राजसमंद कर दिया।

अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि अगर कोई पुलिस वाला ईमानदारी से अपना काम करे और बदले में सरकार उन्हें ऐसा इनाम दे तो ऐसे में कौन पुलिस वाला अपनी जान जोखिम में डालकर अपराधियों को पकड़ेगा?

एक ओर जहां हर सरकार द्वारा पुलिस को ईमानदारी व “आमजन में विश्वास-अपराधियो में डर” का पाठ पढ़ाया जाता है और ऐसे में जब पुलिस अपना काम इमानदारी से करे और जनता का भला करने की सोंच रखे तब उन्ही ईमानदार पुलिस वालों का तबादला कर उन्हें परेशान किया जाता है, तब भला कोई कैसे करेगा ईमानदारी से काम…….?

शराब माफियाओ व अपराधियों की पकड़ सरकार में होने के चलते अब उनका मसुंबा एसपी शंकरदत्त शर्मा को हटाने का है जो जिले में शराबबंदी व अपराधियों पर लगाम लगाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़े हुए हैं।
यही नहीं जनता की चुप्पी अपराधियों व शराब माफियाओं के हौसले बुलंद कर रही है जो जिले में नशे के कारोबार को बेधड़क चला रहे हैं। अगर जनता ने भी ऐसे ही मोन धारण कर लिया तो कोई अफ़सर फिर कैसे उनके हितों के बारे में सोचेगा और उन्हें अपराधियों से बचाएगा…….।


रिपोर्ट : जगदीश जी तेली
डूंगरपुर (राजस्थान) : ख़बर 24 एक्सप्रेस


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