Breaking News
BigRoz Big Roz
Home / Breaking News / आज क्या आज़ादी का जश्न है? या चन्द लोगों की आज़ादी का जश्न : मनीष कुमार

आज क्या आज़ादी का जश्न है? या चन्द लोगों की आज़ादी का जश्न : मनीष कुमार

15 अगस्त यानि आज़ादी का दिन। जश्न मनाने का दिन। 15 अगस्त एक ऐसा विशेष दिन जिस दिन हमें आज़ादी मिली थी। हमारा भारत सम्पूर्ण भारत बना था।

हमें आज़ादी तो मिली थी लेकिन यह आज़ादी लाखों शहीदों के खून से सनी आज़ादी थी। हमारे देश के अमर शहीद, अमर आत्माओं ने अपने लहूँ से आज के दिन का नाम लिख दिया था।
1947 से पहले जिस खुली हवा में भारतवासी सांस लेने के सपने देख रहे थे उन सपनों को हमारे शहीदों ने अपना लहू बहाकर, खून का एक-एक कतरा इस देश के नाम कर हमें आज़ादी दिलाई थी।
जी हाँ उनके लिए जितना लिखा जाए उतना कम है। तो आज मैं अपने मन में अमर शहीदों के प्रति सच्चे भाव से, दिल से, नमन आखों से याद करते हुए उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करता हूँ।
मेरे पास शब्दों की कमी नहीं है लेकिन जिस तरह का त्याग इस देश के सच्चे सपूतों ने भारत की गरिमा बचाये रखने के लिए किया है, वहाँ पर हर किसी लेखक, पत्रकार के शब्द कम पड़ जाएंगे।

हम आज़ादी की 72वीं वर्षगांठ तो मना रहे हैं लेकिन क्या आज वाकई हम वही आज़ादी मना रहे हैं जिसे हमारे देश के युवा नौजवान अपनी जान पर खेलकर हमें आज़ादी देकर गए थे।
क्या है आज आज़ादी का मतलब…. खैर बातें बहुत सारी हैं और अगर मैं करूँगा तो वो राजनीतिक मतलब ले जाएगी। और मैं देशद्रोही हो जाऊंगा। आज फिर एक कविता के माध्यम से में अपनी बात कहना चाहूंगा जिसमें शायद आपको इस खोखली आज़ादी का मतलब भी समझ में आ जाए।
कविता भले पुरानी है लेकिन शब्दों में दर्द आज भी उतना ही है।

मैं जश्न ऐ आज़ादी कैसे मनाऊँ!!

मासूम बच्चियों के साथ हैवानियत पर उनकी मौत पर… मैं जश्न ऐ आज़ादी कैसे मनाऊँ…
सरहद पर कटते जवानों के सर… मैं जश्न ऐ आज़ादी कैसे मनाऊँ…
राक्षसों के हाथों लूटती बेटी की अस्मत… मैं जश्न ऐ आज़ादी कैसे मनाऊँ…
सेल्टर होम में सांस लेने को तड़पती जिंदगियों के बीच…. मैं जश्न ऐ आज़ादी कैसे मनाऊँ…
नेताओं के हाथों लुटता देश देखकर… मैं जश्न ऐ आज़ादी कैसे मनाऊँ…
धर्म के नाम पर एक दूसरे के खून के प्यासे लोग… मैं जश्न ऐ आज़ादी कैसे मनाऊँ…
जाति भेद के बंधन में फंसे लोगों के बीच…. मैं जश्न ऐ आज़ादी कैसे मनाऊँ…

और अब मैं क्या लिखूँ… क्योंकि मेरे लिए आज़ादी का कोई मतलब नहीं है। यह कैसी खोखली आजादी है? सरकार की कारगुज़ारियों की आलोचना करने पर लोग बेटी के साथ रेप की धमकी देते हैं… तो मेरे लिए यह आज़ादी खोखली ही नहीं बल्कि बकवास है, जहां कलम के दुश्मन घात लगाए बैठे रहते हैं और अनपढ़ गंवार नेताओं की बातों से हम छले जाते हों, तो ऐसी आज़ादी के कोई मायने नहीं।

और अब अंत में

कोई बता दें मुझे
आज मैं क्या लिखूँ….
कटे हुए शहीदों के शीश लिखूँ…
या खून से लथपथ शहीदों की पीठ लिखूँ…
खंड-खंड होता भारत लिखूँ..
नारी का क्षीण-क्षीण होता सम्मान लिखूँ…
उसकी लूटती इज्ज़त का बखान लिखूँ..
उसे देखने वाली तमाशबीन भीड़ लिखूँ…
बच्चों की मौत का जश्न लिखूँ
उनके हाथ हुई हैवानियत का गुणगान लिखूं
उन रोती बिलखती माँओं के दर्द लिखूँ…
इंसान से डरते इंसान का भय लिखूँ…,
रोटी छीनते हुए नेता की भूँख लिखूँ
या कचरे से बीनते गरीब के उस निवाले को लिखूँ
कोई तो बता दे मुझे…
आज मैं क्या लिखूँ ??

जाग गया हूँ मैं आज…
मुझे क्या लिखना है।
मैं जोश लिखूँ…
जूनून लिखूँ..
जज्बा लिखूँ,
दुधारी तलवार लिखूँ..

अब पता है मुझे क्या लिखना है..
अब मैं यलगार लिखूँ..
ललकार लिखूँ..।
जगाना है मुझे इस सोते समाज को..
मैं क्रांति लिखूँ
अंगार लिखूँ..।

ना जाने हम किस आज़ादी का जश्न मना रहे हैं… अगर आपको फिर भी लगता है, तो यह आज़ादी मुबारक..।

***

स्वतन्त्रता दिवस की 72 वीं वर्षगांठ आप सभी को मुबारक हो

मनीष कुमार


Discover more from Khabar 24 Express | India's Leading Hindi News Network

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Check Also

“कोट्यवधींचा खर्च, तरीही सुविधा नाहीत; भुसावळ नगरपरिषदेवर श्वेतपत्रिकेची मागणी”

"कोट्यवधींचा खर्च, तरीही सुविधा नाहीत; भुसावळ नगरपरिषदेवर श्वेतपत्रिकेची मागणी"

Leave a Reply

Discover more from Khabar 24 Express | India's Leading Hindi News Network

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading