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सुबह की सैर और स्वप्न सिद्धि की प्राप्ति, आपको देती है वो शक्ति जिसे पाकर आप जीवन के सभी मूल्यों को कर सकते हैं हासिल : श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज

 

 

 

 

“यूँ तो सुबह जल्दी उठना, सैर पर जाना स्वास्थ के लिए तो अच्छा होता ही है लेकिन अगर आप रोजाना समय से उठकर सैर पर जाना इसके बाद ध्यान लगाने से आपको वो मिल सकता है जिसे पाने के लिए इंसान क्या कुछ नहीं करता।”

 

श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज आज एक ऐसे महत्त्वपूर्ण विषय पर बात करने जा रहे हैं जो आजके समय की बहुत जरूरत है लेकिन हम इंसानों के पास दूसरों के लिए तो क्या खुद के लिए समय नहीं है।
तो आइए जानते हैं कि आज स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज का जो महत्त्वपूर्ण विषय है उससे हम सबको क्या ज्ञान मिल सकता है और स्वामी जी के बताए ज्ञान को करने या अपनाने से क्या उपलब्धियां प्राप्त हो सकती हैं?

 

स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज आज प्रातः की सैर और स्वप्न सिद्धि की प्राप्ति के बारे में बता रहे हैं।

 

स्मरण रखें-वेदों का कथन है की-अपनी आत्मा के जिस रूप अरूप का चिंतन मनन जिसे मंत्र कहते है, उससे ध्यान करोगे, वो आपकी आत्मा का स्वरूप मैं उसी रूप में बनकर आपको आपके प्रश्न का उत्तर देगा, इसी को गीता में कहते है की मुझे जिस रूप में भजोगे मैं उसी रूप में दर्शन दूंगा।

सभी सुबह उठकर घुमे जाते ही है, यदि इसे थोड़ा सा साधना से जोड़ ले तो क्या कहने-
आम के आम, गुठलियों के दाम.. वाली कहावत सिद्ध हो जायेगी।

चलो अब जानते है-स्वप्न सिद्धि का रहस्य-प्रातः का समय प्रकृति में तीनों गुणों सत रज तम् का सन्धिकाल का समय होता है, इस समय त्रिगुण प्रकर्ति में रात्रि के गुण का परस्पर विलय हो रहा होता है और त्रिगुणों में उस सन्धि के बीच कुछ समय रहकर फिर से नए कर्म काल का उदय हो रहा होता है,ठीक यही सायंकाल में भी होता है, ये योग के “रहस्यमयी क्षण विज्ञानं” के अंतर्गत विषय आता है, ये ही इस समय मनुष्य में सुषम्ना नाड़ी यानि मन शरीर के द्धार खुलते है, और जो इस समय ध्यान जप आदि करता है, उसे शीघ्र ही जप से ध्यान में प्रवेश मिल जाता है, और मनुष्य में मन ही तो माया जगत का कारक है, यानि मन ही मनुष्य की समस्त इच्छाओं के समूह का नाम है, इस मायावी जगत को पकड़ने के लिए क्षण विज्ञानं को गुरु से जानना बहुत आवशयक है, सिद्ध गुरु ही इस क्षण विज्ञानं के रहस्य को जानते है। त्रिगुण प्रकर्ति का सन्धिकाल में जो लौकिक या अलौकिक उपाय करता है, उसे मन की मायाविक सिद्धि होती है, जिसे तन्त्र शास्त्रों में अनेकों नाम से साधना के रूप में जाना जाता है।

 

 

“चाहे वो देवी देव की त्रिकाल सिद्धि हो या कर्णपिशाचनि हो या दृष्टि पिशाच हो या ब्रह्म प्रेत या बेताल या जिन्न हो या यक्ष यक्षणी या परी या पीर की सिद्धि हो, ये सब मन के नामो के प्रकार मात्र है।”

 

 

तो मैं यहां तुम्हें एक सरल पर अवश्य ही सफलता देने वाला स्वप्न सिद्धि ज्ञान दे रहा हूँ जिसे करके आप अपना कोई एक प्रश्न हर सप्ताह में केवल एक बार ही जान सकते है।

लगभग पाव भर आटे को भूनकर उसमे चीनी या बुरा या शक्कर मिलाकर अपने साथ प्रातः घूमने ले जाने के लिए एक बर्तन या थैले या एक पन्नी के थैले में भर ले और कब सैर पर जाये, तो जहाँ भी चींटियाँ के बिल दिखे जो सड़क से थोड़ा हटकर हो,ताकि लोगों के पैर आपके दिए मीठे आटे को खाते में उनके ऊपर नहीं पड़े और वे मर नहीं जाये,बहुत से भक्त ऐसा करते हो और चींटी चुगाने के नाम पर और पाप ले लेते है।यो रास्ते के साइड में ही चींटियों को खिलाते खिलाते इस मंत्र को जपते जाये और मीठा आटा जब खत्म हो जाये और और आप कुछ थकन अनुभव करने लगे, तो वहीं किसी भी पेड़ के नीचे ध्यान करने बैठ जाये और मंत्र जपते रहे या लेट भी जाये ताकि आपको नींद जो की जप और तप से एक योग निंद्रा यानि माया जगत के दर्शन वाली निंद्रा होती है।उसकी कुछ देर को अचानक प्राप्त हो जायेगी।
अब उसी निंद्रा के ध्यान में आपको कोई अद्रश्य या दीखते हुए कोई भी आपके प्रश्न का उत्तर देंगे।

यदि उस स्थान पर उत्तर नहीं मिले तो अपने घर के बिस्तर पर आकर लेटकर ध्यान करे और तब उत्तर मिलेगा।पर अपने बिस्तर पर थोड़ा गंगा जल छोड़क ले, ताकि वहाँ शुद्धि हो,क्योकि ये पवित्र आत्माए ऐसे अपवित्र स्थान पर कम ही आती है।क्योकि प्रकर्ति में तो ये विचरती ही है,और वहां की शुद्धि इन्हें आपसे सम्पर्क करा देती है और उस क्षण में आपको उत्तर मिल जाता है।

क्योकि दिन और पहर के अनुरूप इन सिद्ध आत्माओं के रूप अलग अलग होते है।
जैसे-
सोमवार को सफेद कपड़ों में स्त्री या पुरुष का दर्शन।

मंगल में लाल साड़ी में स्त्री या गेरुवे वस्त्रधारी पुरुष के दर्शन।

बुध में हरी साड़ी में स्त्री या हरे कपड़े के वस्त्र पहने पीर के दर्शन।

गुरुवार में पीली साड़ी में स्त्री या पीले कपड़े में ब्राह्मण पुरुष आत्मा के दर्शन हो।

शुक्रवार में नीले रंग की साड़ी में स्त्री या नील वर्ण के पुरुष के दर्शन हो।

शनिवार में काले वस्त्र में स्त्री या पुरुष के दर्शन हो या किसी भी जीव के रूप में भी ये दिखाई दे।

रविवार को तेज प्रकाश या आकाशीय वाणी में दर्शन हो।

अमावस्या को अँधेरे से आवाज या बोलता सर्प के दर्शन हो।

पूर्णिमां को चन्द्रमा के दिखने के बाद स्वयं में ज्ञान का अनुभव मिले।या किसी व्रक्ष के दर्शन के बाद ज्ञान मिले।

सूर्य ग्रहण के समय देव पितृ दर्शन और ज्ञान मिलता है।

चन्द्र ग्रहण में अपनी कुलदेवी और स्त्री पितरों के दर्शन से ज्ञान मिलता है।

विशेष:-आपको अनेक बार जो सर्प या कोई आपकी और देखता हुआ दर्शन देता हुआ दिखता है,वो यही अवस्था का अधूरा रूप है।और ये ऊपर दिया ज्ञान उसका पूरा रूप है।इस विषय पर फिर अन्य लेख में बताऊंगा।

स्वप्न सिद्धि मंत्र है:-

देवी देव दर्शन देव,अमोघसत्य बताओ मेव।
मम् स्वप्न अनागत उत्तर कथय कथ्य स्वाहा।

जो सत्य ॐ सिद्धाश्रम से गुरु दीक्षा लिए है- वे इस त्रिकाल दर्शी सिद्धासिद्ध शावर महामंत्र को जप कर सिद्ध कर सकते है।वेसे जो भक्त दीक्षा नहीं लिए है,उन पर भी इस मंत्र के जप से अवश्य कृपा होगी।

सत्य गुरु ॐ माई शक्ति,अष्ट सिद्धि नव निधि दे भक्ति।
नष्ट करो शत्रु विकराला,चढाउँ पान मिठाई माला।
जो देखूं वो सच दिखलाओ,ढूंढ ढूंढ़ मनचाहा लाओ।
मुझको दे दो सच्चा दूत,बाँधू पीर वीर जिन्न भुत।
चोर चोकी मुँह की खाये,पीड़ा रोग जड़ से जाये।
सत्य गुरु ॐ की आन,सत्य ॐ सिद्धायै नमः दे सिद्ध ज्ञान।
शब्द साँचा पिंड कांचा,चले मंत्र सत्य ॐ का वाचा स्वाहा..

विशेष:-जब ये जप करें तो,अंगारी या यज्ञ कुण्ड के पास और अपने सामने- एक मीठा पान और कुछ भी मिठाई के साथ एक फ़ूलों की माला चढ़ाये।और अंगारी या यज्ञ समाप्त होने के बाद इस पान मिठाई और माला को यज्ञ में अर्पित यानि चढ़ा दे बस और नमन कर उठ जाये।तब आपको अवश्य मंत्र सिद्धि और त्रिकाल दर्शी की एक एक क्रम से दर्शन होकर कृपा होगी।
नवरात्रि और ग्रहण में और होली दीपावली और अवतारों के जन्मदिन पर इसी विधि से जप यज्ञ करने से अति शीघ्र सिद्धि होती है।

 

इस लेख को अधिक से अधिक अपने मित्रों, रिश्तेदारों और शुभचिंतकों को भेजें, पूण्य के भागीदार बनें।

अगर आप अपने जीवन में कोई कमी महसूस कर रहे हैं? घर में सुख-शांति नहीं मिल रही है? वैवाहिक जीवन में उथल-पुथल मची हुई है? पढ़ाई में ध्यान नहीं लग रहा है? कोई आपके ऊपर तंत्र मंत्र कर रहा है? आपका परिवार खुश नहीं है? धन व्यर्थ के कार्यों में खर्च हो रहा है? घर में बीमारी का वास हो रहा है? पूजा पाठ में मन नहीं लग रहा है?
अगर आप इस तरह की कोई भी समस्या अपने जीवन में महसूस कर रहे हैं तो एक बार श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज के पास जाएं और आपकी समस्या क्षण भर में खत्म हो जाएगी।
माता पूर्णिमाँ देवी की चमत्कारी प्रतिमा या बीज मंत्र मंगाने के लिए, श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज से जुड़ने के लिए या किसी प्रकार की सलाह के लिए संपर्क करें +918923316611

ज्ञान लाभ के लिए श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज के यूटीयूब

https://www.youtube.com/channel/UCOKliI3Eh_7RF1LPpzg7ghA से तुरंत जुड़े।

 

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श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येंद्र जी महाराज

जय सत्य ॐ सिद्धायै नमः


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