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आज शनिवार है, श्री शनिदेव जी का वार है तो आओ मिलकर करें “श्री “शनि भगवान का वरदायनी” पाठ” : श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज

 

 

 

श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज श्री शनिदेव भगवान का चमत्कारिक वरदायनी पाठ बता रहे हैं जिसे करने से श्री शनिदेव भगवान प्रसन्न होंगे।

 

 

 

भगवान शनिदेव का सर्व मनोकामना सिद्धि भाग्यदाता पाठ-जो करेगा अवश्य मनोकामना पूर्ण होगी।

 

हे सूर्य पुत्र श्याम वर्ण
हे शिव भक्त बलशाली।
अति प्रभावी तीक्ष्ण द्रष्टि
प्रसन्न भव् भाग्यशाली।।
कालाग्नि कृतांत स्वरूपी
शनै शनै गति धारी।
उज्वल क्रांति अमावस रासी
प्रसन्न भव हे वर धारी।।
भास्कर पुत्र सूर्यनन्दन
माता छाया यम भाई।
यमुना बहिन वचन के रक्षक
पुनः प्रसन्न हो अथाई।।
हे न्यायधीश वली मुख
नयन कठोर कृपालु।
कठिन आप की और देखना
प्रसन्न भव अभयी दयालु।।
हे तपि हे मंत्र जपि
हे सिद्ध महा एश्वर्य।
हे योगाभ्यासी योगफली
मुझ कृपा करो दे धैर्य।।
हे प्रिये हे बजरंग सखे
हे सर्व पदार्थ के स्वामी।
नीला देवी सती पति तुम
मम् भक्ति स्वीकारो नमामि।।
अश्व गिद्ध बैल मयूर
काक गर्दभ हाथी हिरण।
हे अष्ट सवारी धारक दाता
मुझ दो भक्त शरण।।
हे शमी निवासी पीपलवासी
भक्ति शक्ति के दाता।
साढ़े साती ढईया तारो
हे शनिदेव तारण दाता।।
ओ कश्यपनंदन पिप्पलाद वंदन
ॐ शं शनैश्चराय नमः।
ॐ प्रां प्रीं प्रों सः शनैश्चर्य
जय शनिदेव नमो नमः।।

*सत्य साहिब रचित श्री “शनि वरदायनी” सम्पूर्ण*

 

 

 

भगवान श्री शनिदेव चालीसा

दोहा
श्री गणेश वंदन करूँ,पुनि पुनि नवाऊ मैं माथ।
शनि की कृपा सदा रहे,सब नवग्रहों के साथ।।
कष्ट मिटे संकट मिटे,मिटे कर्ज और घात।
सुमरु मैं शनिदेव को,सुबहा मध्य और रात।।
*चालीसा प्रारम्भ*

 

जय जय शनिदेव हितकारी।
सुनिए प्रभु जी अरज हमारी।।
हम पर अपनी कृपा करिये।
सभी विघ्न कष्टों को हरिये।।
सूर्य पुत्र और छाया माता।
यमुना बहिन और यम है भ्राता।।
शिव के शिष्य हनुमंत के प्यारे।
इनके भक्तों पे नजर ना डारे।।
रूप तुम्हारा है विकराला।
तीक्ष्ण द्रष्टि से भड़के ज्वाला।।
ॐ शं शनैश्चार्य नमः।
शनि मंत्र सुखदाय हमः।।
शनि के चार चरण है नामा।
लोह स्वर्ण चाँदी और ताँबा।।
लोह चरण से जब शनि आते।
टीम मन धन की हानि कराते।।
ताँबा रजत अति सुख कारी।
स्वर्ण चरण अति मंगलकारी।।
ऐसे तुम न्याय के साथी।
कैलाश छोड़ शिव बन गए हाथी।।
कृपा तुम्हारी पवन कुमारा।
जराई लंका बनाई कारा।।
गोरी पुत्र पड़ी शनि की छाया।
कटा शीश तब गज मुख पाया।।
अष्ट वाहनों के तुम हो स्वामी।
गज सिहं स्वान गर्दभ मृगामी।।
चील गिद्ध घोड़े की सवारी।
अतुलित बल प्रताप अति भारी।।
सती पर पड़ी शनि की छाया।
दक्ष यज्ञ तन सति जलाया।।
गौतम पर की कृपा महान।
पाये बुद्धत्व हुए भगवान।।
राज्य छोड़ जंगल को ध्याये।
महावीर तब परम् पद पाये।।
ऐसा ना कोई देव भगवान।
जिसे ना शनि शक्ति का भान।।
जब द्रष्टि कृष्णा पे डारी।
कहलाये रणछोड़ मुरारी।।
कुपित द्रष्टि हरिश्चंद्र पे डारी।
बिछुड़े राज्य पुत्र और नारी।।
नृप विक्रम पर हुए सवार।
निगली खूंटी नो लखा हार।।
विक्रम को तब चोर बताया।
हाथ पैर से हीन बनाया।।
फिर निवास तेली घर पाया।
थी जिस पर शनि कृपा अथाया।।
दीप राग गा दीप जलाये।
कर पूजा शनि देव रिझाये।।
फिर से उनके दिन बौराये।
कर विवाह रानी घर लाये।।
जिस पर शनि हाथी संग आते।
राज्य मिले सुख सम्पत्ति पाते।।
राजा नल पर शनि जब आये।
हरा राज्य वन वन भटकाये।।
फिर जब नल ने पूजा कीन्ही।
राज्य दिया विपदा हर लीन्ही।।
प्यासे पांडव जब अकुलाये।
देख ताल मन में हरसाये।।
रहता था वहाँ यक्ष बलशाली।
प्रश्न पूछे करे रखवाली।।
पांडव उत्तर ना दे पाये।
मृत्यु को तब गले लगाये।।
किया युधिष्ठर प्रश्न निदान।
मिला सभी को जीवन दान।।
है यही वही सिद्ध स्थान।
जहाँ हुआ शनि मंदिर निर्माण।।
यहाँ शनि रहते सपरिवार।
करते भक्तों का उद्धार।।
जो जन यहाँ आ शीश झुकाते।
मिटे रोग सुख शांति पाते।।
जिस पर हो ढैया साढ़े साती।
इकतालीस दिन करे आरती।।
उसके सभी कष्ट मिट जाते।
शनिदेव की कृपा पाते।।
जो यहाँ आकर दर्शन करते।
उस पर क्रोध शनि नही करते।।
जो करे पाठ शनि चालीसा।
कहे सत्येंद स्वामी दे शनि आशीषा।।

दोहा
सिद्ध शनि मंदिर यही,ऐसा पावन धाम।
जो भी मांगे सभी मिले,करके शनि प्रणाम।।
शनि जयंती रथ यात्रा,जो करे कराये भक्त।
शनि दशा हितकारी हों,शनि लाभ पाये वो भक्त।।
पूरी हो मनोकामना जो सोचा सो पाये।
श्री गणेश हनुमान वचन,सिद्ध शनि जो ध्यायै।।

बोलो  जय शनिदेव महाराज की जय 
बोलो  ॐ शं शनेश्चराय नमः🙏
बोलो सत्य ॐ सिद्धायै नमः🙏

 


 

श्री शनिदेव भगवान की आरती

ॐ जय जय शनिदेवा,बाबा जय जय शनिदेवा.
जो कोई तुमको ध्यावे-2,कष्ट मिटे उसका।।ॐ जय जय..
मति जगाओ मेरी,ज्ञान भरो देवा-2..बाबा ज्ञान..
द्रष्टि प्रेम की फेरो-2,सब कष्ट हरो मेरा।ॐ जय शनिदेवा।।
जीवन से तुम मोक्ष के कारक,सर्व सम्पत्ति दाता-2..बाबा..
जो खोया सो पावे-2,कृपा तुम्हारी पाता।।ॐ जय शनिदेवा।।
रंक से राजा के तुम स्वामी,कर्म फल के दाता-2..बाबा कर्म..
जो कोई आरती गावे-2,आशीष तुम्हारा पाता।।ॐ जय शनिदेवा।।
सब ग्रहों की कृपा हो मुझ पर,मनवांछित पाउ-2..बाबा..
कहत सत्येंद्र स्वामी-2,सुख जीवन पाऊ ।ॐ जय जय शनिदेवा।।

स्वामी सत्येंद्र सत्य साहिब जी रचित भगवान श्री सत्य शनिदेव जी की आरती सम्पूर्ण
 बोलो जय जय शनिदेवा🙏
बोलो सत्य ॐ सिद्धायै नमः🙏
www.satyasmeemission.org

 

 

*****

 

श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज

ॐ शं शनैश्चराय नमः

जय सत्य ॐ सिद्धायै नमः


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