कछुए की अंगूठी पहनने के कारण और फायदे? किस राशि वाले करें इसे धारण? क्या होता है इसका प्रभाव? जाने इसके सम्पूर्ण रहस्य, बता रहे हैं स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज

 

 

 

 

“कछुए की अंगूठी के पहनने का कारण और उसका लोगों को क्या लाभ मिलता है? और किस राशियों वालों को पहननी चाहिए किसे नहीं? तो आइए जानते हैं इस रहस्य को, श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज कछुए की अंगूठी के बारे में दे रहे हैं सम्पूर्ण जानकारी।”

 

 

हमारे सनातन धर्म में ये कच्छुआ यानि कच्छप अवतार जिसे हम कूर्म अवतार भी कहते है,ये भगवान सत्यनारायण के त्रिदेवावतार यानि 1-ब्रह्मा-2-विष्णु-3-शिव में से विष्णु जी के बाद 10 वें अवतार में से दूसरे अवतार है। जो समुंद्र में जन्में और देवो और दैत्यों के द्धारा समुंद्र मंथन में अपनी पीठ पर महेंद्र पर्वत को धारण करके और मंथन के घर्षण को सहन करके चोदह रत्नों की प्राप्ति में कच्छप अवतार बनकर साहयक हुए थे।तथा और भी अनगिनत अलौकिक धर्म कथाओं से डिवॉन और मनुष्य भक्तों का कल्याण किया है। ये अतिपूज्य भी है।

इन सब कथाओं का उल्लेख निम्न ग्रंथ-भागवत पुराण, शतपथ ब्राह्मण, आदि पर्व, पद्म पुराण, लिंग पुराण में विस्तार से कहा गया है।

जन्मोउत्सव दिवस:-

कच्छप यानि कूर्म अवतार का जन्मोउत्सव यानि कूर्म जयंती को वैशाख की पूर्णिमा को मनाया जाता है।

कूर्म पुराण में भगवान विष्णु ने अपने कच्छपावतार में सप्त ऋषियों से जीवन के चार लक्ष्यों (धर्म, अर्थ, काम तथा मोक्ष) का वर्णन किया था।यो जो भी ऋषि या मनुष्य इन जीवन के चार लक्ष्यों को अपने जीवन में सही से धारण करने से उसे लक्ष्य की शक्ति यानि लक्ष्मी की प्राप्ति या लक्ष्मी की कृपा होना कहते है।यो लक्ष्य के साथ उसे प्राप्त करने और कराने की शक्ति का भी जन्म होता है,यो ये लक्ष्मी अवतरण भी कहते है।अतः समुंद्र में कच्छप अवतार हुए और लक्ष्मी भी समुंद्र से ही अवतरित हुयी और विष्णु जी की वे प्रिया भी है,यो कछुए और लक्ष्मी का संग है और जो कछुए की सेवा और पूजा अथवा उनके चाँदी में अंकित चित्र को धारण करता है,तो उसके ऊपर स्वयं ही लक्ष्मी जी कृपा होती है।यो ये कछुए की अंगूठी भक्त लोग धारण करते है।

कछुए से जुडी मान्यताएं:-

कछुआ पूरी सृष्टि से जुड़ा माना जाता है, जैसे कि-

1-कछुए के चार पैर-1-अर्थ-2-धर्म-3–काम-4-मोक्ष के प्रतीक है।

2-कछुए का मुख-स्वर्ग को और ले जाने वाला द्धार माना जाता है।

3-कछुए की पुंछ-स्वर्ग से धरती की और आने वाला प्रवेश द्धार है।

4-कछुए की पीठ-सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड को धारक करने वाली आधार पीठ मानी गयी है।

5-पीठ पर पड़ी धारियां-ब्रह्माण्ड को नो खण्डों में बांटती है।

6-कछुए की पीठ का रंग हरित प्रकर्ति का प्रतिनिधित्त्व करता है।यानि मनुष्य को सदा जीवन और सुख को देने वाला है।

7-कछुआ सबसे अधिक आयु का जीव माना जाने से इसकी संगत या इसका घर या अंगूठी में इसका चित्रण धारण करने से व्यक्ति की स्वस्थता के साथ आयु भी बढ़ती है।

8-कछुआ शांति और प्रेम की वृति वाला जीव होने से इसके चित्रण को अंगूठी में धारण करने से मनुष्य में शांति और प्रेम की वृति बढ़ती है,जिससे उसे सकारात्मक अनुभव होते है।

9-इस कछुए से दत्तात्रेय भगवान ने 24 गुरुओं में से एक मान कर ये ज्ञान सीखा की-मनुष्य को कछुए के भांति विपदा आने पर अपने खोल में, अपनी सभी इन्दियों को वशीभूत करके छिपा लेनी चाहिए।यानि अपने मन को विषय शून्य बनाकर अपनी आत्मा में लीन होकर समाधिस्थ हो जाना चाहिए।

10-कछुए की पीठ बड़ी सख्त होती है,बड़े से बड़े प्रहार करके भी इसे आसानी से नहीं तोड़ा जा सकता है,यो मनुष्य युद्ध में कछुए की पीठ को अपनी सुरक्षा के लिए ढाल का उपयोग करता था,यो ये एक प्रकार से मनुष्य को बुरे विचारों से ढाल की तरहां रक्षा कवच बनती है,यो इसका अंगूठी के रूप में सभी तन्त्र मन्त्र यन्त्र के रक्षाकवच के रूप में उपयोग भी है।

वास्तु शास्त्र के उपाय:-

ज्योतिषी की वास्तु शास्त्र के अनुसार सलाह से बहुत लोग अपने हाथ में ग्रह दोष निवारण के लिए उस ग्रह सम्बंधित रत्नों वाली अंगूठी या फिर रत्न को ब्रेसलेट में या अपने गले की चेन में रत्नों को जड़वाकर पहनते हैं। परन्तु आजकल रत्नों के अलावा भी अनेक तरह की केवल ग्रहों से सम्बंधित अंकों से बनी हुयी यन्त्र की अंगूठियां लोगों के हाथों में पहने दिखती हैं,और उन्हीं में आजकल बहुत संख्या में एक है “कछुए वाली अंगूठी”!!

कछुए वाली अंगूठी और उसके चमत्कारिक लाभ:-

दरअसल कछुए वाली अंगूठी को वास्तुशास्त्र के अंतर्गत बड़ा ही शुभ माना गया है। यह अंगूठी व्यक्ति के जीवन के अनेकों दोषों को शांत करते हुए उन्हें बनाने का भी काम भी करती है।और साथ ही व्यक्ति में धैर्य और आत्मविश्वास की वृद्धि करती है।

लक्ष्मी माता की कृपा वर्षा:-

ज्योतिष और वास्तु शास्त्रों के अनुसार कछुआ जो कि- जल में रहता है, और जल शीतलता से लेकर जीवन शक्ति का प्राय है,और जल के साथ रहने वाला ये जीव ईश्वर अवतार कछुआ भी मनुष्य के लिए सभी प्रकार से सकारात्मकता और सर्व सुख व् उन्नति,सम्रद्धि,एश्वर्य आदि का प्रतीक माना गया है।

 

चांदी की अंगूठी में ही पहने:-

वास्तु शास्त्र के अनुसार कछुए वाली अंगूठी सामान्यत: चांदी से ही बनी होनी चाहिए। यदि आप किसी दूसरी धातु यानि सोना या तांबा या प्लेटनीयम या मिश्रित धातु का प्रयोग करना चाहें और उसमें अपनी राशि का रत्न भी जड़वाएं, तो कछुए के आकार को चांदी में बनवाकर उसके ऊपर सोने का डिजाइन या रत्न को जड़वा सकते हैं।

पहनने के नियम:-

ध्यान रखें कि इस अंगूठी को इस तरह बनवाएं की-कछुए के सिर वाला हिस्सा पहनने वाले व्यक्ति की ओर आना चाहिए। कछुए का मुख बाहर की ओर होगा, तो धन आने की बजाए हाथ से चला जाएगा।

क्या सावधानियां रखनी चाहिए:-

पहले तो इस कछुए की अंगूठी को सीधे हाथ में ही पहना जाता है। और भाग्य व्रद्धि के लिए इसे सीधे हाथ की मध्यमा ऊँगली में पहने और पद प्रतिष्ठा की व्रद्धि के लिए इसे सीधे हाथ की पहली ऊँगली यानि तर्जनी अंगुली में पहनें। भगवान विष्णु जी के दूसरे अवतार कछुए को उनकी प्रिया देवी लक्ष्मी के साथ जोड़ा गया है, इसलिए इसे धारण करने का दिन भी पूर्णिमा और शुक्रवार ही है, जो कि ये दोनों दिन धन की देवी को प्रसन्न करने का दिन माना जाता है।

विशेष चमत्कारिक उपाय:-
चूँकि कच्छप भगवान का जन्म बैसाख पूर्णिमां के दिन हुआ था और माता लक्ष्मी का भी समुंद्र से जन्म पुर्णिमा के दिन ही हुआ था, यो यदि आप किसी भी पूर्णिमा के दिन ही चांदी की कछुए की अंगूठी सुनार से बनवाये तो कछुए की पीठ पर लक्ष्मी बीज मंत्र “श्रीं” इस प्रकार से लिखाये की-श्रीं की ईं मात्रा बाहर की और रहे यानि ऊँगली के नाख़ून की और रहे,ताकि लक्ष्मी आपकी और आये।और अंगूठी को पंचाम्रत-गाय का दूध+दही+गंगा जल+तुलसी+शहद को एक प्लेट में करके उसमें अंगूठी को भगवान विष्णु जी और लक्ष्मी जी के नीचे दिए मंत्र से जपते हुए प्रत्येक मंत्र को बोलते हुए पंचाम्रत से धोते रहे और तब अंत में स्त्री भी और पुरुष भी अपने सीधे हाथ की मध्यमा ऊँगली में पहन ले।और पंचाम्रत को अपनी तुलसी के पोधे पर चढ़ा दे।वेसे ऐसा प्रत्येक पूर्णिमां के दिन करें,तो आपकी ये कछुए की अंगूठी मंत्र से अभिमन्त्रित होकर विशेष लाभकारी और चमत्कारिक बनकर कल्याण करेगी।मुख्य आस्था अधिक विषय है।
सामान्य दिनों में शुक्रवार को भी ऐसे ही अभिमन्त्रित करके पहनी जा सकती है।

शुक्रवार को कैसे पहने:-

शुक्रवार के दिन ही इस कछुए की अंगूठी को खरीद कर घर लाये और घर लाकर लक्ष्मी जी की तस्वीर या मूर्ति के सामने घी का दीपक जलाकर इसे केवल दूध और पानी के मिश्रण से धोते हुए,इस महामंत्र का 108 बार जप करें-
ॐ भगवते कुर्मायै ह्रीं नमः
और इसके बाद ऐसे ही धोते हुए ही महा लक्ष्मी जी का महामंत्र जपे-
ॐ श्रीं श्रीं कमले कमलायै प्रसीद प्रसीद श्रीं महालक्ष्मी नमो नमः।।
और जिन्हें इतना बड़ा मन्त्र याद नहीं रहे, तो कोई बात नहीं।वे केवल महालक्ष्मी जी के बीज मंत्र-श्रीं..का ही 108 बार जप करें।
और अब दूध जल से निकाल कर अपने सीधे हाथ की मध्यमा ऊँगली में पहन लें।
-जो अपने गुरु मन्त्र या अपने इष्ट मन्त्र के जपने में विश्वास करते है,वे भक्त इस कछुए की अंगूठी को अपने गुरु और इष्ट के मंत्र से जपते हुए धोते हुए पहने तो और भी अधिक कल्याण होगा।मूल में श्रद्धा ही सभी सकारात्मक लाभों का मुख्य आधार है।

और हमें क्या नहीं करना चाहिए:-

अंगूठी पहनने के बाद इसे बार बार बात करते हुए बेचैनी में घुमाते रहना बिलकुल भी ठीक नहीं है। यदि आप इसे घुमाते रहेंगे तो- उसके साथ कछुए का सिर भी अपनी दिशा बदलता रहेगा जिससे कि इसके पहने के आकर्षण बल से आने वाले धन में भी ऐसे बदलाव के साथ रुकावट आती रहेगी और सम्भव है होता होता काम भी बिगड़ जायेगा।यो बिलकुल भी व्यर्थ में नहीं घुमाया करें।
यदि किसी कारण जैसे- शौच या नहाने या आटा गूँथने आदि के कारण उतारनी भी पड जाये,तो उतार कर अपने पूजाघर में रख दे और अपने काम से निपटने के उपरांत स्नान करके या हाथ धोकर फिर से लक्ष्मी जी के चित्र या मूर्ति को छुलाकर पहने ले।

किन राशियों वालो को कछुए की अंगूठी पहननी नहीं चाहिए:-

अनेक ज्योतिषियों के अनुसार,
मेष, कन्या, वृश्चिक और मीन राशि के लोगों को भूलकर भी कछुए की अंगूठी नहीं पहननी चाहिए। इन राशियों के लोगों द्वारा कछुए की अंगूठी पहनने से लाभ के विपरीत हानिकारक प्रभाव ही होता है। और उनके व्यापार और कामकाज तथा पद प्रतिष्ठा से लेकर घर में कलह और अशांति आदि का अनुभव और नुकसान होता है।यदि किसी को कोई रोग है,तो वो बढ़ जायेगा। साथ ही उनकी धन-दौलत में कमी भी आने लगती है। इसलिए इन राशियों के लोग भूलकर भी कछुए की अंगूठी नहीं पहननी चाहिए।

परन्तु ऐसा कोई विशेष कारण पता नहीं चला है की-मेष,कन्या,वृश्चिक और मीन राशि की कछुए से क्या वैर है या अन्य राशियों से मित्रता है,बल्कि इन राशियों को सोने में कछुए की अंगूठी शुभ रही है,चांदी की विशेष लाभकारी नहीं रही है।
और मछली की आकृति से बनी चांदी या सोने की अंगूठी यानि मछली की अंगूठी शुभ रही है,क्योकि ये राशि भगवान सत्यनारायण के मध्य अवतार श्री विष्णु जी के मत्स्य अवतार के अधीन राशियाँ है,जिस पर अन्य लेख मछली की अंगूठी के चमत्कारिक लाभ विषय में कहूँगा।यो सब कछुए की अंगूठी पहन सकते है,बस सही से बनवाकर सही विधि और मन्त्र उच्चारण से जपते हुए श्रद्धापूर्वक पहने,तो सर्वत्र लाभ होता है।

 

 

 

“श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येंद्र जी महाराज”

“जय सत्य ॐ सिद्धायै नमः”

“इस लेख को अधिक सेअधिक अपने परिचितों पर शेयर करके धर्म सहित पूण्य लाभ कमाएं”

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