अनन्तकाल सर्प दोष का उपाय :-
पार्ट 1 :-
-1-इस दोष के निवारण के लिए अपने शहर या किसी पवित्र नदी में स्नान करने अमावस्या को जाये और वहां जाने से पूर्व 8 रोटी और कोई भी सब्जी बनाकर ले जाये साथ ही कसार यानि पाव भर भुना आटा और उसमे शक्कर मिलाकर भी साथ ले जाये और वहां पहुँच कर पहले स्नान करें और पुरुष तो स्नान कर ही लेते है ।परन्तु यदि किसी कारण बहुत सी स्त्रियों को वहां कपड़े बदलने की समस्या के चलते स्नान नही करने को मन है तो हाथ मुख धोकर मुख में पानी भर कर उस कुल्ले को अपने अंदर ही पी ले और थोडा सा नदी जल पीकर अब आप पूजा को तैयार है अब अपनी अंजुली में जल भरते अपने पितरो को सूर्य की दिशा में अर्पित करते हुए छोड़ते चले ऐसा 108 बार ॐ पितराय नमः स्वाहा के 108 जप करें और इस पूजा को करके अपने साथ लाया भोजन को किसी गरीब को दे या वहाँ किसी गाय को दे और जो आटे और शक्कर का बना पाव भर कसार लाये थे उसे नदी के किनारे किनारे वृक्षों की जड़ या जहाँ चीटियाँ हो वहाँ डालते जाये और इस टहलने से जो थकन होगी उसके उपरांत आप किसी मन्दिर या व्रक्ष के नीचे ध्यान करने या लेट कर थोडा जप और चिंतन करते सो जाने का प्रयास करें तो तुम्हे आपके पितृ या गुरु या उनके रूप ने कोई दिव्य आत्मा जो सन्देश दे उसके अनुसार आगामी कार्य करने से आपका सर्व कल्याण होगा।और तब लोट आये।और अपने दैनिक कार्य करे।ऐसा कम से कम 5 अमावस्या तो करना ही चाहिए।
2:- अपने गले लाल और काले रंग की बटी हुयी डोरी में ऊपर की और चार मुखी रुद्राक्ष(राहु के लिए) और बीच में गांठ लगाकर फिर एक सात मुखी रुद्राक्ष(केतु के लिए) डाले और उसे पंचाम्रत से स्नान कराकर रविवार को प्रातः गले में पहन ले।
(उपाय भाग-2-)
2-कुलिक कालसर्प दोष के लिए उपाय:-
एक कलावे को पुरुष सीधे और स्त्री उलटे अपने हाथ में पहले तीन बार लपेट कर उससे और अधिक उतना तोड़ ले और स्मरण रहे की आपके द्धारा लगाई कलावे में गांठों से उसकी लम्बाई कम नहीं हो अब उस कलावे में पहले चार गांठ इस प्रकार मारे की वो आपके हाथ में तीन बार के लपेटे में बांधते में ऊपर की और रहे और 7 गांठ इस प्रकार लगाये की वो गांठे ठीक चार गांठो के नीचे की और कलाई में रहे।ऐसा रविवार या बुधवार को बाँधे और यदि हो सके तो ये उपाय 7 अमावस्या को बाँधते हुए करे अर्थात एक अमावस्या को कलावा बाँधे और दूसरे अमावस्या को नया बनाकर बाँधे और पुराना खोलकर बहती नदी में प्रवाहित करे।ऐसा करने से बड़ा ही लाभ होगा।
2:-
बीच में से छेद करी हुयी स्वच्छ सी एक काली और एक धूसर रंग की कोडी लाये और पहले इस काली कोडी को सरसों के तेल में काले तिल डाल कर अपने सामने रखे और पूजाघर में बैठकर अपने सामने ज्योति धूपबत्ती जलाये और अब इस काली कोड़ी को देखते हुए-राहु देव का मंत्र ॐ रां राहुवे नमः 108 बार जपे।और अब उस एक धूसर रंग की कोड़ी को भी एक अलग कटोरी में केवल तिल के तेल में डुबों कर अपने सामने रख कर उसे देखते हुए-केतुदेव का मंत्र-ॐ कं केतुवे नमः का 108 बार जप करे।और ये पूजा सम्पन्न होने पर पहले काली कोडी को तेल से बाहर निकले और एक पीले रेशमी डोरी में राहुदेव का मन्त्र जपते हुए उसमें पिरोये और अब एक गांठ लगा दे और इसके बाद धूसर रंगी की कोडी को भी तेल से निकाल कर केतुदेव का मन्त्र जपते हुए इसे भी उस डोरी के दूसरे छोर से डोरी में धीरे से डाले और अब इसे इस प्रकार पहने की आपके गले में लटकते में काली कोड़ी सीधे हाथ की और रहे और धूसर रंग की कोड़ी उलटे हाथ की और रहे और गले में ह्रदय तक ही लटकी हो।
इसे बुधवार को ही धारण करें।और दोनों तेलों को अलग अलग मट्टी के दीपक में करके किसी मन्दिर में पीपल पर जाकर जला आएं और बिना उन्हें देखे तुरन्त वापस लोट आये।ये एक बार ही करके जबतक शांति का अनुभव हो तबतक इस माला को पहने रहे।पर स्मरण रहे की कोई इसे बाहर का व्यक्ति छुए नहीं अन्यथा नई कौड़ियां लेकर यही सब करके फिर से पहनना होगा।और उस भंग हुयी माला को नदी में प्रवाहित करना होगा।और जो गृहस्थी लोग है,वो सामान्यतोर पर रात्रि में भी इसे पहने रख सकते है इसमें शौच जाने आदि को लेकर कोई रोक टोक नहीं है,बस पति पत्नी के रिलेशन से पहले इसे उतार दे और प्रातः स्नान करके ही इस सिद्ध माला को धुप दीप करके पहन ले।
तो आपका सभी और से बड़ा ही कल्याण होगा।
(उपाय भाग-3-)
-तृतीय भाव के वासुकि कालसर्प दोष का एक मात्र अचूक निवारण:-
-जिस भी दिन अमावस्या पड़े उस दिन की दोपहर में किसी मन्दिर में जहाँ पीपल और बड़ के पेड़ हो,या ऐसा नहीं मिले तो अलग अलग स्थानों से भी ये उपाय कर ले आये,,यानि वहाँ से पीपल की छोटी सी जड़ की नोक का टुकड़ा ले और बड़ के पेड़ की लटकती हुयी जटा से एक छोटा टुकड़ा ले और इससे पहले दो चांदी के लम्बे आकार के ताबीज लेकर उन दोनों के बीच टांका लगवा ले ताकि वे जुड़ जाये और उनमें सीधे हाथ की और पीपल की जड़ भरा वाला ताबीज हो और उलटे हाथ वाले ताबीज में बड़ की जटा भरी हो।अब इस ताबीज को एक नवरत्न की माला में नीचे की और बांध दे और अब इस ताबीज को अमावस्या की रात्रि में सम्भव हो तो अपने घर में तुलसी के पोधे के पास पश्चिम दिशा की और को एक तिल के तेल का अखण्ड ज्योत प्रातः भोर तक जलावे और उस जलते दीपक को इस नवरत्न माला में जड़ित ताबीज को एक गोलघेरा बनाकर उसके बीच में रख दे और रात्रि भर रखा रहने दे,आप में यदि वहीं बैठकर राहु के मन्त्र की 22 माला और उसके बाद केतु की 25 माला जपने की शक्ति हो तो करें अन्यथा अपने बिस्तरे पर जाकर इस माला सहित दीपक का ध्यान करते हुए अपने ऊपर कृपा हो ऐसी प्रार्थना करते हुए सो जाये और जो स्वप्न दिखे उसका सही अर्थ ही आपका भविष्य होगा।नहीं दिखे तो कोई बात नहीं,तब संकेत है की सब ठीक है और प्रातः उठकर स्नान करके उस जलते हुए दीपक को प्रणाम करें या वो दीपक बुझ गया हो तो उसे पुनः जलाये और नमन करके अब उस माला को दीपक के चारों और से उठाकर अपने गले में पहन ले और दीपक को पूजाघर में रख आये और अब अपना दैनिक कार्य करें।अब आपकी राहु केतु के कालसर्प दोष के निवारण और कृपा वाली सिद्ध माला आपकी सदा चमत्कारिक सहायता करेगी।इसमें कोई खाने पीने के कोई नियम निषेध नही है।बस कोई इसे बाहर का व्यक्ति छुए नहीं और ग्रहस्थ समय रात्रि को उतार कर सोये प्रातः स्नान करके पहन ले।
(उपाय भाग-4-)
चतुर्थ घर के-शंखपाल कालसर्प दोष का उपाय:-
किसी भी अमावस्या के दिन में शाम के समय से अँधेरे तक यानि इस उपाय को शाम के 6 से 9 बजे के मध्य कभी भी कर सकते है,यो इस समय आप गेहूं के पाव भर आटे की लोई को लेकर उसके दो बराबर भसग करो और एक भाग से एक मनुष्य की आक्रति वाला मिलता जुलता सा पुतला बनाओ और ऐसे ही दूसरा पुतला भी बनाओ, अब एक भोजपत्र पर काजल की स्याही से राहुदेव का “रां” बीज मंत्र लिखे और उसे पहले बनाये पुतले के ह्रदय वाले भाग में दबा दे और ऐसे ही दूसरे भोजपत्र पर केतुदेव के बीज मंत्र “कं” को लाल स्याही से लिखे और पुतले के पेट वाले भाग में दबा दे।
सब इन् दोनों पुतलों को एक दूसरे की कमर के भाग की और से मिलाकर अब इस मंत्र..
जपते हुए कलावे से 12 बार लपेटकर बाँध दे और अब इसे अपने से 12 बार उलटा उतार ले, और इसे अपने शहर की नहर या बम्बे पर ले जाकर उसके पूल पर बीच में खड़े होकर बहते जल में डाल दे और पीछे मुड़कर नहीं दिखे।बस आपके 12 अमावस्या करने से कालसर्प दोष में चमत्कारी रूप से लाभकारी शांति और सुख की प्राप्ति होगी।
-2:
अपने घर में जहाँ बिजली का बोर्ड लगा हो उसके पास एक राहु केतु का संयुक्त यन्त्र लाकर उसे पंचमृत से स्नान कराते समय ही पहले 108 बार राहुदेव का मन्त्र जपे और फिर 108 बार केतु देव का मन्त्र जपे और इस यन्त्र को पंचमृत से निकाल कर उसे वहाँ लगा दे या चिपका दे।और रविवार को अवश्य धुपबत्ती से उसे केवल नमन किया करें और उस धूपबत्ती को बाद में वहीं नीचे रख जलने से।बस घर में होने वाली अचानक इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं आदि में हानि या कोई अग्नि घटना और अन्य अद्रश्य प्रभाव नहीं होंगे।इस यन्त्र को प्रत्येक छोटी दीपावली या छोटी होली पर बदल दिया करें और ऐसे ही करके नया यन्त्र वहीं लगा दिया करें।
ये प्रबल प्रभावी उपाय है।
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शेष उपाय आगामी लेख में पढ़े…
स्वामी सत्येंद्र सत्यसाहिब जी
जय सत्य ॐ सिद्धायै नमः
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Jai Satya om sidhaya namah….