( उपाय-भाग-5) भाग 2 : –
5-पद्य कालसर्प दोष उपाय:-
चैत्र-ज्येष्ठ-क्वार-माघ की चारों नवरात्रियों में नो कन्याओ को आमन्त्रित करे और जब वे आये तो उन्हें अपने दरवाजे से सम्मान और प्यार से लेते हुए आसन बिछाकर उस पर बैठाएं और उनके पुरे वस्त्र और चप्पल या सेंडिल और चांदी के हाथों के कड़े व् पायल भेंट करें, यदि ये सामर्थ्य नहीं हो तो उन्हें नो नो चूड़ियाँ भेंट करें और उन्हें भोजन उपरांत उनकी देवी की आरती को गा कर उनकी आरती करके उन्हें सम्मान से विदाई में जो दक्षिणा बने देकर विदा करने अपने दरवाजे तक जाये।ऐसा करते ही आपको उसके बाद 3 दिन में जो सपना आये,उस पर विशेष ध्यान दें उसका अर्थ करें वही आपका भविष्य और निदान होगा।ये आपके सभी शिक्षा-सन्तान-पेट के रोग या गर्भ के रोग और आय के सभी साधनों का खोलकर सर्व कल्याण करेगा।
*(उपाय-भाग-6)*
*6-महापद्य कालसर्प दोष उपाय:-*
आपको सदा प्रेम में धोखा मिलता हो तो-जाने महापद्य कालसर्प दोष है और इसका उपाय ये है-जिससे आपको प्रेम है अथवा जो लोग आपके प्रति विरोध ही जताते रहते है,उनके यदि फोटों मिल जाये तो अतिउत्तम अन्यथा उनके अलग अलग एक एक भोजपत्र पर पूरा नाम,उसका गोत्र व् उनकी माता का नाम और यदि विवाहित है तो उनकी पत्नी का नाम और निवास स्थान का नाम सामान्य लाल स्याही वाली पेन पेन्सिल से लिखें,और उस सबको सही से तह बनाकर एक अच्छे से स्टील या डिब्बे में रखे फिर उसमें जो आपको पसंद हो वो इत्र उसमें अच्छी तरहां छिड़के और राहुउदेव का बीज मंत्र रां और केतुदेव का बीज मंत्र कं का भी जप करते जाये और अब उस डिब्बे को बन्द करें की वो कोई खोले नहीं और उसे अपने पूजाघर में या वहाँ इतना स्थान नहीं हो तो पूजाघर के नीचे रख दे।अब जब भी प्रातः या साय की पूजा की ज्योत करें और पूजा पूरी हो जाये तब शेष जल रहे दीपक को उस डिब्बे के ऊपर रख दिया करें।तब इसके बाद में हुए चमत्कार आप स्वयं अनुभव करेंगे।ऐसा क्या नहीं जो आपको प्राप्त नहीं होगा..
*(उपाय-भाग-7)*
*7-तक्षक कालसर्प दोष के उपाय:-*
*-अमावस्या को या फिर बुधवार के दिन को एक ही चांदी के लॉकेट में ऊपर की साइड में गोमेद और गोमेद से सटा हुआ ही पीछे की साइड में लहसुनिया को जड़वाकर बनवाये और तब उसे पंचाम्रत में स्नान कराये।
और गोमेद को देखते हुए उसका चित्र अपनी आँखों में लेकर राहुदेव का मन्त्र 108 जपे , और ऐसे ही लहसुनिया को अपनी और करके अब उसे देखते हुए केतुदेव का मन्त्र जपता ध्यान करें,तो इससे राहु और केतुदेव की शक्ति गोमेद में जाग्रत होकर तुम्हारे ध्यान के माध्यम से तुममे प्रवाहित होगी और तुम्हारा सर्व कल्याण होगा।अब इस लॉकेट की गले में पहने और पंचाम्रत की किसी गुलाब या गेंदे या गुड़हल आदि के पोधे पर चढ़ा दे।ऐसा जब भी अमावस्या हो तब अवश्य करने पर राहुदेव और केतुदेव की कृपा होगी।
यहाँ एक बात भक्तों को ये स्मरण रहे की-जो ये सोचते है की हम तो अपने इष्ट की पूजा करते है,यो ये राहु केतु हमारा क्या बिगड़ लेंगे?तो उन्हें ये स्मरण रखना चाहिए की-ये दोनों देव भी ईश्वर के इस सृष्टि में उसी की लीला से कार्यरत है और इन्हें भी जो अधिकार मिले है,उनमें स्वयं ईश्वर का हस्तक्षेप भी सहजता से नहीं होता है,यदि ऐसा होने लगा तो इन दोनों देवों के अधिकारों को उसे प्रदान करने का क्या औचित्य रहेगा।यो इनकी पूजा बिना कुछ सम्भव नहीं है।केवल प्रत्यक्ष गुरु ही इन सबके दोषों का निवारण कर सकता है।
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स्वामी सत्येंद्र सत्यसाहिब जी
जय सत्य ॐ सिद्धायै नमः
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