
मनीष कुमार :
लालू यादव ने अपना सबसे पुराना राजनीतिक हथियार आखिरकार निकाल ही लिया और इसके निकलते ही विरोधी खेमें में खलबली मचनी शुरू भी हो गयी।
नीतीश के धोखे से बौखलाए लालू यादव ने बड़ी ही सूझबूझ के साथ जबाव देने का मन बनाया। जैसे ही लालू ने अपना सबसे पुराना राजनीतिक हथियार बाहर निकाला वैसे ही विरोधी खेमे में हायतौबा मचनी शुरू हो गयी। लालू यादव राजनीति के एक मंझे हुए खिलाड़ी हैं उन्हें अपने विरोधियों से निपटना अच्छे से आता है। जिस बात पर नीतीश लालू के साथ छोड़ भाजपा की गोद मे जा बैठे लालू उसी को अपना हथियार बना रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक काफी सारे जेडीयू के नेता अपनी पार्टी का दामन छोड़ लालू के साथ जाने का मन बना रहे हैं।
शरद यादव से तो लालू ने यहां तक कह डाला कि हम दोनों ने लाठियां खायीं हैं अब समय आ गया कि वे कमान संभाले।
शरद यादव भाजपा के साथ हुए गठबंधन से नाराज हैं और उनकी नाराजगी नीतीश के सामने भी जगजाहिर कर चुके हैं।
इसके अलावा पार्टी में कई सारे यादव, पिछड़े हुए और मुस्लिम जातियों के विधायक हैं जो भाजपा के साथ हुए गठबंधन से नाराज हैं। भाजपा और जेडीयू भले ही इन्हें मंत्रिपद की गारंटी दे रही हो लेकिन मिलेगा कब इसकी कोई गारंटी नही है।
लेकिन ऐसे में लालू के साथ जाने से एक तो मंत्रिपद पक्का और दूसरा वोट बैंक भी बना रहेगा।
अब इसको लेकर विरोधी खेमों में हलचल तो है लेकिन जाहिर नहीं होने दे रहे हैं।
चार साल बाद नीतीश की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में वापसी, जदयू और भाजपा के सहयोगी दलों के कुछ नेताओं को रास नहीं आई है। एक ओर जदयू के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव नीतीश के फैसले से नाराज हैं। वहीं, एनडीए के सहयोगी दल ‘रालोसपा’ और ‘हम’ भी मौजूदा कैबिनेट में जगह नहीं मिलने से उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक लालू ने इन असंतुष्ट नेताओं के लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं। लालू ने शरद यादव को नेतृत्व संभालने का निमंत्रण तक दे डाला है। लालू ने कहा कि शरद को साथ लेकर भाजपा से लड़ेंगे। शरद हमारे साथ थे और रहेंगे। हमने और शरद ने साथ लाठी खाई है, संघर्ष किया है। आज देश को फिर संघर्ष की जरूरत है। हम नया आंदोलन खड़ा करेंगे। दक्षिणपंथी तानाशाही को नेस्तनाबूद कर देंगे।
लालू की इस अपील पर जदयू ने तो कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन भाजपा नेता और उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने कहा है कि कोई कहीं नहीं जा रहा है। कैबिनेट में अभी काफी जगह खाली है और शीघ्र ही उसका विस्तार होगा। बता दें कि जदयू और भाजपा के बीच हुए समझौते में केवल लोजपा के लिए ही जगह बन पाई है।
सूत्रों के मुताबिक ‘रालोसपा’ के उपेंद्र कुशवाहा और ‘हम’ के जीतनराम मांझी राजग के साथ कितने दिन रहेंगे यह सब नीतीश कैबिनेट और केंद्रीय कैबिनेट के विस्तार में इनकी हिस्सेदारी पर निर्भर करेगा। सूत्र बताते हैं कि मंत्रिमंडल में कायस्थ समाज से किसी को शामिल नहीं करने का भी विरोध शुरू हो गया है। सांसद आरके सिन्हा और जदयू प्रवक्ता अजय आलोक ने इस पर नाराजगी जाहिर की है।
जदयू के अलावा राजग के पास बिहार में 61 विधायक हैं। उसमें भाजपा के 58 विधायक हैं। ऐसे में यदि मंत्रिमंडल में आठ मंत्रियों का कोरम भरा जाता है, तो जदयू के पांच और भाजपा के खाते दो सीटें जाएंगी। बची हुई एक सीट ‘रालोसपा’ या ‘हम’ में से किसी एक को ही दी जा सकती है। भाजपा अपने कोटे से मंत्री पद देगी इसके आसार कम हैं। ऐसे में घटक दलों की नाराजगी दूर करना भाजपा के लिए आसान नहीं होगा।
*****
ख़बर 24 एक्सप्रेस
Discover more from Khabar 24 Express | India's Leading Hindi News Network
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
Khabar 24 Express | India's Leading Hindi News Network Khabar 24 Express brings the latest Hindi News, Breaking News, Live TV, India News, Maharashtra News, Nagpur News, Politics, Crime, Business, Sports, Entertainment, Technology, Auto, Health, Education, Lifestyle and World News with fast, accurate and trusted updates 24×7