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टिकट कटते ही चौकीदार डॉ. उदित राज पूरे नाट्य रूपांतरण के साथ कांग्रेस में हो गए शामिल

चौकीदार डॉ. उदित राज टिकट कटने से इतने खफ़ा हुए कि 23 की सुबह के वक़्त पहले तो उन्होंने अपने नाम के आगे से चौकीदार शब्द हटा लिया लेकिन शाम होते होते उन्होंने अपने नाम के आगे फिर से चौकीदार शब्द जोड़ लिया। अटकलें लगाई गईं कि कोई डील हुई होगी। और अब सब कुछ नॉर्मल हो गया है।

उत्तर पश्चिम दिल्ली से भाजपा सांसद डॉ. उदित राज टिकट कटने से भाजपा से इतने खफा हो गए कि उन्होंने आज आखिरकार भाजपा को अलविदा कह दिया और वे कांग्रेस में शामिल हो गए। पिछले 24 घंटे से जारी सियासी घटनाक्रमों के बीच बुधवार सुबह उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी संग मुलाकात की। महासचिव केसी वेणुगोपाल, दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष शीला दीक्षित और प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला की उपस्थिति में कांग्रेस में शामिल होने की औपचारिकता पूरी करने के बाद उदित राज ने भाजपा पर खूब निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भाजपा को दलित वोट तो चाहिए, लेकिन दलित नेता नहीं।

उदित राज ने टिकट कटने के पीछे की वजह बताई कि दो अप्रैल 2018 को जब दलित सड़कों पर आए, तो मैंने समर्थन किया। उन्होंने कहा कि 2014 में रामनाथ कोविंद मेरे पास आए थे। कहा कि मेरा कुछ कराइए। वह भी टिकट चाहते थे, लेकिन नहीं दिया। वह चुप रहे तो उन्हें राष्ट्रपति बना दिया गया। हो सकता है, मैं चुप रहता तो मुझे भी पीएम बना देते। मैं गूंगा-बहरा बन कर नहीं रह सकता।

इससे पहले उन्होंने अपने ट्विटर एकाउंट पर लिखा कि अगर मुझे पहले बता दिया गया होता तो इतना कष्ट ना होता। पार्टी को इतना कष्ट क्यों करना पड़ा कि नामांकन के आखिरी दिन एक बजे नाम की घोषणा करनी पड़ी। पहले कह देते तो मुझे कोई तकलीफ नहीं होती। किराएदार हूं, बात मान लेना पड़ता।

उत्तर-पश्चिमी दिल्ली से टिकट कटने के बाद भाजपा नेता और सांसद उदित राज ने पहले चौकीदारी छोड़ी, उसके बाद वापस भी ले ली। मतलब ये कि भाजपा से उम्मीदवारी खारिज हो जाने के बाद पहले उन्होंने अपने ट्विटर परिचय में चौकीदार डॉ. उदित राज से ‘चौकीदार’ शब्द हटाकर डॉ. उदित राज कर दिया। लेकिन कुछ ही घंटे के बाद ‘चौकीदार’ शब्द वापस जुड़ गया। माना जा रहा था कि, भाजपा से कोई आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने ये फैसला किया होगा।

बता दें कि उत्तर-पश्चिमी दिल्ली से उनका टिकट काटकर गायक हंस राज हंस को उम्मीदवार बनाया गया है। ताजा हालात देखते हुए भाजपा से उदित राज की विदाई लगभग तय मानी जा रही थी। उन्होंने सुबह ही एलान कर दिया था कि अगर उन्हें भाजपा ने टिकट नहीं दिया तो वो पार्टी छोड़ देंगे। बुधवार सुबह आखिरकार ऐसा ही हुआ। उन्होंने भाजपा को अलविदा कह दिया और कांग्रेस का हाथ थाम लिया।

डॉ. उदित राज दलितों के नेता माने जाते हैं और उनका भी अच्छा खासा वोटबैंक है। अब देखना यह दिलचस्प रहेगा कि उदित राज भाजपा का कितना नुकसान करते हैं।


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