Breaking News
BigRoz Big Roz
Home / Breaking News / 22 अप्रैल पृथ्वी दिवस पर विशेष : पृथ्वी बचाओ, पर्यावरण बचाओ, जलवायु बचाओ. अगर खुद को है बचाना, तो जिंदगी में कम से कम 10 पेड़ है लगाना. सद्गुरु स्वामी श्री सत्येन्द्र जी महाराज का कविता रूपी जनसंदेश

22 अप्रैल पृथ्वी दिवस पर विशेष : पृथ्वी बचाओ, पर्यावरण बचाओ, जलवायु बचाओ. अगर खुद को है बचाना, तो जिंदगी में कम से कम 10 पेड़ है लगाना. सद्गुरु स्वामी श्री सत्येन्द्र जी महाराज का कविता रूपी जनसंदेश











पृथ्वी को संरक्षण प्रदान करने के लिए और सारी दुनिया से इसमें सहयोग और समर्थन करने के लिए पृथ्वी दिवस मनाया जाता है। यह दिवस 22 अप्रैल को मनाया जाता है। यह वार्षिक तौर पर प्रतिवर्ष मनाया जाता है। इस दिन को 193 देशों ने अपना समर्थन प्रदान किया। अब इसके लिए विश्व स्तर पर कार्यकर्म को समन्वित किया जा रहा है। कई समुदायों ने पृथ्वी सप्ताह का समर्थन करते हुए पुरे सप्ताह पुरे विश्व के पर्यावरण सम्बन्धी मुद्दों पर ध्यान केन्द्रित कर पृथ्वी को बचाने के लिए अनुकरणीय कदम उठाने का फैसला किया गया है।


पृथ्वी दिवस की स्थापना अमेरिकी सीनेटर गेलोर्ड नेल्सन (Gaylord Nelson) ने पर्यावरण शिक्षा के रूप की थी। सन् 1970 से प्रारम्भ हुए इस दिवस को आज पूरी दुनिया के 195 से अधिक देश मनाते हैं।

महात्मा गाँधी ने एक बार कहा था कि प्रकृति में इतनी ताकत होती है कि वह हर मनुष्य की “जरुरत” को पूरा कर सकती है लेकिन पृथ्वी कभी भी मनुष्य के “लालच” को पूरा नही कर सकती है।

सद्गुरु स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज ने भी पृथ्वी दिवस पर एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि
“पृथ्वी बचाओ, पर्यावरण बचाओ, जलवायु बचाओ, अगर खुद को है बचाना, तो जिंदगी में कम से कम 10 पेड़ है लगाना,”

आज बहुत तेज़ी से जलवायु परिवर्तन हो रहा है, पर्यावरण खतरे में है। इन सबका खतरा इंसान की आयु कम कर रहा है।



🌏22 अप्रैल पृथ्वी दिवस पर्यावरण और जलवायु साक्षरता 2019 पर सत्यास्मि मिशन की ओर से स्वामी सत्येंद्र सत्यसाहिब जी कविता के माध्यम से ये जन संदेश देते कहते है 










बढ़ता चल रहा काल बन
मरुस्थल धरा पे दिन रात।
सटक जा रहा सभी कुछ
पी खाता हुआ दीखता जो ज्ञात।।
ये अंधकार है दीखता हुए भी
सभी की खुली आँखों में अंघवात।
पीतवर्ण सा श्वेत चमकता कणों युक्त
समा लेगा सभी को अपने ही साथ।।
जो रोक रहे थे वर्षो इसको
बन हमारी रक्षा की ढाल।
उन्हीं रक्षकों की कर हत्या
निज हाथों आहुति दे रहे उस काल।।
काट रहे हम अपने ही हाथों
अपने सुख शांति हरित वृक्ष।
जला रहे उन वृक्ष रूप में
चिता जीते जी अपने ही पक्ष।।
जो जीने का सबसे बड़ा साधन
वही करते हम नित व्यर्थ।
जब देखों वही बहा जा रहा
जल रूपी जीवंत प्राण हम अर्थ।।
बढ़ रही गर्मी की तपिश रात दिन
जल रहा है नभ् से आता प्रकाश।
जला रहा जल हरित धरा को
नही बचने की भविष्य में आश।।
बिगाड़ रहे हम निकाल निकाल कर
खनिज माटी समुंद्र से तेल।
बदले दे रहे अगलित प्लास्टिक
कैसे लेन देन धरा हम मेल।।
खुली आँखों पे पट्टी बांधे
हम बढ़ा रहे विकास की दर।
बस उन्नतिकारक चिंतन करते
नही चिंता करें बढ़ रही मृत्यु का डर।।
यही हाल रहा तो अति शीघ्र ही
सूर्य तोड़ देगा रक्षक धरा की सीमा।
और मिट जायेंगे यूँ घर बेठे ही
भून जायेंगे इस आग में धीमा धीमा।।
यूँ डरो इस आती मृत्यु से
जो तुमने ही अपने भोज बुलाई।
असमय इस मृत्यु दे निमंत्रण
जो बिन खाये ना वापस जाई।।
लगाओ एक वृक्ष नित माह
और जल करो उपाय निज संचित।
अभी समय है कुछ शेष धरा तुम
फिर नही समय मिलेगा किंचित।।





आज ही आप भी एक वृक्ष अवश्य लगाये
स्वामी सत्येंद्र सत्यसाहिब जी











🌹🌴🚰🌹🌏🎂🌹🌳🏝💦🌹
🙏जय सत्य ॐ सिद्धायै नमः🙏
www.satyasmeemission.org


Discover more from Khabar 24 Express Indias Leading News Network, Khabar 24 Express Live TV shows, Latest News, Breaking News in Hindi, Daily News, News Headlines

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Check Also

नवी दिल्ली : ‘नारी शक्ती वंदन अधिनियम’मुळे महिलांना राजकारणात नवे बळ — रक्षाताई खडसे

नवी दिल्ली : ‘नारी शक्ती वंदन अधिनियम’मुळे महिलांना राजकारणात नवे बळ — रक्षाताई खडसे

One comment

  1. Ji guru ji

Leave a Reply

Discover more from Khabar 24 Express Indias Leading News Network, Khabar 24 Express Live TV shows, Latest News, Breaking News in Hindi, Daily News, News Headlines

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading

Subscribe