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गुजरात में कांटे की टक्कर के साथ, तो हिमाचल में एक तरफा जीत, भाजपा कार्यकर्ताओं में उत्साह, लेकिन दोनों पार्टियों के लिए मंथन करने का समय

 

 

“भाजपा को गुजरात और हिमाचल प्रदेश में मिली जीत के लिए ख़बर 24 एक्सप्रेस की तरफ से ढेरों शुभकामनाएं।”

 

गुजरात व हिमाचल प्रदेश के रुझान परिणामों में तब्दील होने लगे हैं। ऐसे में भाजपा को गुजरात और हिमाचल प्रदेश में पूर्ण बहुमत की जीत मिलती दिख रही है।

ये कहना गलत न होगा कि यह जीत पीएम नरेंद्र मोदी की जीत है उन्होंने दोनों प्रदेश के चुनाव अपने दम खम पर लड़वाये। इसके लिए उन्होंने जबर्दस्त चुनाव प्रचार भी किया।

बेशक गुजरात में भाजपा को पूर्ण बहुमत मिल गया हो लेकिन यह जीत इतनी भी बड़ी जीत नहीं है जितनी बड़ी होनी चाहिए थी। भाजपा की तरफ से स्टार प्रचारक खुद पीएम मोदी थे, इसके अलावा भाजपा की तरफ से पूरा केंद्रीय मंत्रिमंडल गुजरात चुनाव प्रचार में उतरा हुआ था। साथ ही यूपी के नए नवेले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी गुजरात में भाजपा की तरफ से कई रैलियां कीं। बाबजूद इसके 2012 के मुकाबले भाजपा को यहां पर मिली कम सीटों की जीत से ही संतोष करना पड़ेगा।

कांग्रेस की तरफ से राहुल गांधी स्टार प्रचारक की भूमिका में थे साथ ही क्षेत्रीय नेता कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ खड़े नजर आए लेकिन बाकी कोई बड़ा कांग्रेसी नेता गुजरात चुनाव प्रचार में ज्यादा नहीं दिखाई दिया। राहुल गांधी ने जिग्नेश, अल्पेश, और हार्दिक पटेल का भरपूर साथ लिया लेकिन बाबजूद इसके ये सब मिलकर भी कांग्रेस को जीत नहीं दिला पाये।

“खैर यह जीत भाजपा के लिए एक बड़ी जीत है।”

पिछले 22 सालों से भाजपा यहां जीतती आ रही है और एक बार फिर गुजरात के मतदाताओं ने भाजपा पर भरोसा जताया है। लेकिन भाजपा को गुजरात में भले जीत मिल रही हो लेकिन इसको हम बम्पर जीत नहीं कह सकते हैं।
जीत तो जीत होती है। लेकिन भाजपा को इस जीत के बाद भी आत्ममंथन करना होगा और जो कमियां पिछली 22 सालों की सरकार में रह गयी हों, उन्हें इस बार पूरा करना होगा।

वहीं हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की हार ने साबित कर दिया कि प्रदेश की जनता कांग्रेस की सरकार से नाराज थी, असंतुष्ट थी।और उसने अपनी यह नाराजगी अपने मत के जरिये ज़ाहिर भी कर दी। यहां पर कांग्रेस को अपनी हार से सबक लेते हुए मंथन करना करने की जरूरत है, आखिर उसे हार मिली तो कैसे मिली? उसकी सरकार में क्या खामियां रहीं जिनकी वजह से वोटर्स ने उनकी तरफ मुंह नहीं किया।
देश के बाकी राज्यों में जहां कांग्रेस की सरकार है वहां पर कांग्रेस को मजबूती के साथ काम करना पड़ेगा और अपने नेतृत्व में भी सुधार करना पड़ेगा।
भले ही राहुल गांधी कांग्रेस के अध्यक्ष बन गए हों लेकिन अभी भी राहुल गांधी को अपने अंदर बहुत सारे बदलाव लाने होंगे और जनता के बीच अपनी पैंठ को और मजबूत करना होगा।

क्योंकि 2018 में होने वाले कर्नाटक, मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ समेत कुल सात राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों पर भी इस परिणाम का असर पड़ सकता है।
दोनों पार्टियों के पास वक़्त है अपनी-अपनी गलतियों को सुधारने का।

 

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मनीष कुमार

ख़बर24 एक्सप्रेस


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